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                <title>धर्म संस्कृति - Gambheer Samachar</title>
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                <title>हिंदू धर्म में पावन पर्व माना जाता है अक्षय तृतीया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br />पचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया का पावन पर्व इस साल 19 अप्रैल 2026, रविवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आने वाला यह दिन हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ ही है जिसका कभी विनाश न हो, अर्थात इस दिन किए गए दान और पुण्य का फल कभी समाप्त नहीं होता। आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय स्वयं को ईश्वर से जोड़ने और अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का एक सुंदर अवसर प्रदान करता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च स्थिति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/akshaya-tritiya-is-considered-a-sacred-festival-in-hindu-religion/article-2880"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-15-at-2.10.03-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br />पचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया का पावन पर्व इस साल 19 अप्रैल 2026, रविवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आने वाला यह दिन हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ ही है जिसका कभी विनाश न हो, अर्थात इस दिन किए गए दान और पुण्य का फल कभी समाप्त नहीं होता। आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय स्वयं को ईश्वर से जोड़ने और अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का एक सुंदर अवसर प्रदान करता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च स्थिति में होते हैं, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पावन तिथि हमें सिखाती है कि निस्वार्थ भाव से किया गया हर कार्य हमारे भविष्य को उज्जवल बनाता है।<br />अक्षय तृतीया  पर दान करने का बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन दी गई वस्तुएं कई गुना होकर वापस मिलती हैं। इस तिथि पर जल से भरे मिट्टी के पात्र, नए वस्त्र और अनाज का दान करना बहुत फलदायी होता है। दूसरों की सहायता करना और जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्ची पूजा है। जब हम पवित्र मन से समाज की भलाई के लिए कदम उठाते हैं, तो हमारे घर में बरकत आती है और बिगड़े काम बनने लगते हैं। इस दिन अपनी मधुर वाणी से सबका सम्मान करें और कड़वी बातों से पूरी तरह दूर रहें। अपनी मेहनत से कमाए धन का एक छोटा हिस्सा शुभ कार्यों में लगाने से मन को अपार शांति और संतोष का अनुभव होता है।<br />इस विशेष दिन का हर क्षण बहुत शुभ होता है, इसलिए इसे आत्म-चिंतन और किसी भी नई शुरुआत के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन अपनी बुरी आदतों को छोड़ने और अच्छे गुणों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। भगवान के सामने बैठकर प्रार्थना करने से मन शांत रहता है और जीवन की चुनौतियों से लड़ने की नई शक्ति मिलती है। अपनी परंपराओं का सम्मान करना ही हमें एक सफल इंसान बनाता है। सात्विक भोजन ग्रहण करने और ईश्वर के नाम का जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन सहज लगने लगता है। जब हम सच्चे और निष्कपट मन से इस पर्व को मनाते हैं, तो हमारे जीवन के सभी दुख दूर होने लगते हैं और घर में सुख का स्थाई वास होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:57:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब पटना में भी दिखेगी काशी जैसी भव्यता… और घाटों पर होगी गंगा आरती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अगर आप वाराणसी या हरिद्वार जैसी गंगा आरती का अनुभव लेना चाहते हैं, तो अब इसके लिए बिहार से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पटना में भी अब उसी भव्यता के साथ गंगा आरती शुरू होने जा रही है, जिसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।</p>
<p>बिहार सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। योजना के तहत गंगा किनारे बसे प्रमुख शहरों में वाराणसी की तर्ज पर “महाआरती” का आयोजन कराया जाएगा। इसकी शुरुआत राजधानी पटना से होने जा रही है, जहां दो प्रमुख घाटों को पहले चरण में चुना गया है।</p>
<p><em><strong>इन</strong></em></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/now-kashi-like-grandeur-will-be-seen-in-patna-too%E2%80%A6-and/article-2840"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/coverimagef04f7014031648f5a6104e241c5efd5d1955.jpg" alt=""></a><br /><p>अगर आप वाराणसी या हरिद्वार जैसी गंगा आरती का अनुभव लेना चाहते हैं, तो अब इसके लिए बिहार से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पटना में भी अब उसी भव्यता के साथ गंगा आरती शुरू होने जा रही है, जिसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।</p>
<p>बिहार सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। योजना के तहत गंगा किनारे बसे प्रमुख शहरों में वाराणसी की तर्ज पर “महाआरती” का आयोजन कराया जाएगा। इसकी शुरुआत राजधानी पटना से होने जा रही है, जहां दो प्रमुख घाटों को पहले चरण में चुना गया है।</p>
<p><em><strong>इन घाटों से होगी शुरुआत</strong></em></p>
<p>पहले चरण में पटना के मितन घाट और पर्यटन घाट दीघा पर गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। इन दोनों घाटों को खास तौर पर विकसित किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक भव्य अनुभव मिल सके। गंगा आरती के आयोजन के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं। निजी कंपनियों और उद्यमियों को घाट की सजावट, पूजा सामग्री और अनुभवी पंडितों की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाएगी।</p>
<p><em><strong>जानिए किस दिन कहां होगी आरती</strong></em></p>
<p>पटना के अलग-अलग घाटों पर गंगा आरती का साप्ताहिक शेड्यूल भी तय कर लिया गया है।</p>
<p>मीनार घाट पर हर गुरुवार और शुक्रवार को महाआरती होगी</p>
<p>कंगन घाट पर हर मंगलवार को गंगा आरती आयोजित की जाएगी</p>
<p>सीढ़ी घाट बख्तियारपुर पर पहले से ही साप्ताहिक आरती जारी है</p>
<p>इस शेड्यूल के जरिए अलग-अलग दिनों में लोग अलग-अलग घाटों पर जाकर आरती का आनंद ले सकेंगे।</p>
<p><em><strong>दीघा घाट को बनाया जा रहा है बड़ा टूरिस्ट स्पॉट</strong></em></p>
<p>दीघा पाटी पुल घाट को खास तौर पर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए सरकार सौंदर्यीकरण पर जोर दे रही है। घाट पर पक्के निर्माण कार्य के साथ-साथ बड़े स्तर पर पौधारोपण भी किया जा रहा है, ताकि यहां आने वाले लोगों को साफ-सुथरा और आकर्षक वातावरण मिल सके। आने वाले समय में यह घाट पटना का एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।</p>
<p><em><strong>पटना में पहले भी होती रही है गंगा आरती</strong></em></p>
<p>गंगा आरती की परंपरा पटना में नई नहीं है। गांधी घाट पर साल 2011 से गंगा आरती आयोजित की जा रही है। यहां हर शनिवार और रविवार को भव्य आरती होती थी, जिसमें 51 दीपों के साथ भगवा वस्त्रधारी पुरोहित शंखनाद के बीच पूजा करते थे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक वहां पहुंचते थे। अब इसी परंपरा को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।</p>
<p><em><strong>अब कई शहरों तक पहुंचेगी भव्य आरती</strong></em></p>
<p>पटना के बाद इस योजना को बक्सर, भागलपुर समेत अन्य शहरों तक भी ले जाया जाएगा। इसका मकसद सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। सरकार की कोशिश है कि बिहार के घाट भी देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों की तरह विकसित हों, जहां लोग दूर-दूर से आकर इस भव्य आरती का हिस्सा बन सकें।</p>
<p>अब अगर आप भी गंगा किनारे बैठकर दीपों की रोशनी, शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच आध्यात्मिक माहौल महसूस करना चाहते हैं, तो पटना के ये घाट आपका इंतजार कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>बिहार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 17:08:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चारधाम जाने वालों के लिए बड़ा झटका! ये 2 चीजें ले गए तो एंट्री नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<h6 class="Css_PB">चारधाम यात्रा 2026 इस बार 19 अप्रैल से शुरू हो रही है। मंदिर परिसरों में मोबाइल, फोटो और वीडियो बनाने पर रोक रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।</h6>
<p>उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष 19 अप्रैल 2026 से विधिवत शुरू होने जा रही है। यात्रा को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और प्रशासन के साथ-साथ बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि इस बार यात्रा के दौरान नियमों को सख्ती से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/big-shock-for-those-going-to-chardham-no-entry-if/article-2809"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/image-(9).png" alt=""></a><br /><h6 class="Css_PB">चारधाम यात्रा 2026 इस बार 19 अप्रैल से शुरू हो रही है। मंदिर परिसरों में मोबाइल, फोटो और वीडियो बनाने पर रोक रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।</h6>
<p>उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष 19 अप्रैल 2026 से विधिवत शुरू होने जा रही है। यात्रा को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और प्रशासन के साथ-साथ बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि इस बार यात्रा के दौरान नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा, ताकि मंदिरों की गरिमा बनी रहे और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन मिल सके।</p>
<p>बीकेटीसी अध्यक्ष के अनुसार, इस बार मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन, कैमरा और वीडियो रील बनाने पर सख्त प्रतिबंध रहेगा। विशेष रूप से मंदिर के 70 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि दर्शन व्यवस्था बाधित न हो और श्रद्धालु शांत वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें। पिछले वर्षों में सोशल मीडिया के लिए रील और वीडियो बनाने की प्रवृत्ति बढ़ने से भीड़ प्रबंधन में दिक्कतें सामने आई थीं, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p>चारधाम यात्रा के चार प्रमुख धाम -  यमुनोत्री मंदिर, गंगोत्री मंदिर, केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। इसके बाद 22 अप्रैल को सुबह लगभग 8 बजे केदारनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे, जबकि बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 6:15 बजे खुलेंगे। वहीं, हेमकुंड साहिब के कपाट खोलने की तिथि मई में अलग से घोषित की जाएगी।</p>
<p>इस वर्ष यात्रा को लेकर एक और मुद्दा चर्चा में है, वह है गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर सख्ती। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि चारधाम में गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य धर्म के व्यक्ति में सनातन परंपरा के प्रति आस्था है, तो उसे मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। इस बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया, खासकर तब जब बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के चारधाम यात्रा को लेकर सवाल उठाए गए। सारा अली खान पहले भी केदारनाथ और रुद्रनाथ जैसी कठिन यात्राएं कर चुकी हैं।</p>
<p>श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार ऑनलाइन व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। बीकेटीसी के अनुसार, विभागीय वेबसाइट के माध्यम से जल्द ही पूजा बुकिंग की सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे श्रद्धालु घर बैठे ही अपनी पूजा का समय सुनिश्चित कर सकेंगे। इसके अलावा यात्रा मार्ग में स्थित विश्राम गृहों और अन्य सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
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<p>यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अब तक लगभग 11,68,644 श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस यात्रा की लोकप्रियता को दर्शाता है। प्रशासन का लक्ष्य इस बार दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाना है, ताकि भीड़ प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके।</p>
<p>कुल मिलाकर, चारधाम यात्रा 2026 को लेकर सरकार और मंदिर समिति पूरी तरह से तैयार नजर आ रही है। नए नियमों और बेहतर सुविधाओं के साथ इस बार की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने वाली होगी।</p>
<p> </p>
</div>
<div class="col-12">
<div class="mt-2"> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामनवमी के सुभावसर पर राम मंदिर के सम्मुख शीतल जल एवं शरबत का निःशुल्क वितरण</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>कोलकाता</strong></em> : शुक्रवार २७ मार्च, २०२६ रामनवमी के सुभावसर पर कोलकाता की प्राचीन सेवा संस्था श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति द्वारा चित्तरंजन एवेन्यू स्थित श्री राम मंदिर के सम्मुख शीतल जल एवं शरबत का निःशुल्क वितरण किया गया। यह वितरण श्री राम चंद्र जी के भव्य सवारी के मद्देनजर किया गए। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धालुओं एवं राहगीरों को गर्मी से कुछ आराम देने की मुहिम में एक पहल है। ज्ञात रहे कि विधायक एवं समिति के अध्यक्ष श्री विवेक गुप्ता के निर्देशानुसार, प्रधान सचिव बिमल दीवान, सह सचिव पवन बंसल, सुभाष सवालदावाला एवं मनोज चौधरी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/free-distribution-of-soft-water-and-sherbet-in-front-of/article-2769"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/whatsapp-image-2026-03-27-at-6.00.13-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>कोलकाता</strong></em> : शुक्रवार २७ मार्च, २०२६ रामनवमी के सुभावसर पर कोलकाता की प्राचीन सेवा संस्था श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति द्वारा चित्तरंजन एवेन्यू स्थित श्री राम मंदिर के सम्मुख शीतल जल एवं शरबत का निःशुल्क वितरण किया गया। यह वितरण श्री राम चंद्र जी के भव्य सवारी के मद्देनजर किया गए। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धालुओं एवं राहगीरों को गर्मी से कुछ आराम देने की मुहिम में एक पहल है। ज्ञात रहे कि विधायक एवं समिति के अध्यक्ष श्री विवेक गुप्ता के निर्देशानुसार, प्रधान सचिव बिमल दीवान, सह सचिव पवन बंसल, सुभाष सवालदावाला एवं मनोज चौधरी के नेतृत्व में यह वितरण सेवा कार्य किया गया। अतिथिगणों में पूर्व विधायक संजय बक्शी, पार्षद विजय उपाध्याय, पार्षद राजेश सिन्हा ने काफी सराहना की।साथ ही समिति के सुभाष चंद्र गोयनका, आदित्य विक्रम तुलस्यान ( चीकू भाई ), संतोष अग्रवाल, महेश काबरा, सुमित झुनझुनवाला, प्रकाश सांगानेरिया, महावीर नारनौली,  गोबिंद पंसारी, अनु मिश्रा आदि की उपस्थिति एवं संपूर्ण प्रयासों से यह वितरण सुचारू रूप से सम्पन्न हुआ। समिति के अनवरत सेवा कार्यों का यह एक उदाहरण है। सारी जानकारी समिति के उप सचिव पवन बंसल ने दी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 15:42:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>रामनवमी मर्यादा, साहस और आदर्श जीवन का प्रेरक संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला प्रेरणा-दिवस है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब भी समाज में अन्याय, असत्य और असंतुलन बढ़ता है, तब मर्यादा, धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने वाले आदर्श व्यक्तित्व की आवश्यकता होती है। भगवान राम का जन्म इसी संदेश का प्रतीक है—कि शक्ति का उपयोग सदैव धर्म के लिए हो और जीवन का उद्देश्य केवल स्वयं का नहीं, बल्कि समस्त समाज का कल्याण हो।<br />भगवान राम का जीवन संघर्षों से भरा था, पर उन्होंने हर परिस्थिति में धैर्य और मर्यादा को नहीं छोड़ा। राजमहल का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/ramnavmi-inspirational-message-of-dignity-courage-and-ideal-life/article-2760"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/16966616231.jpg" alt=""></a><br /><p>रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला प्रेरणा-दिवस है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब भी समाज में अन्याय, असत्य और असंतुलन बढ़ता है, तब मर्यादा, धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने वाले आदर्श व्यक्तित्व की आवश्यकता होती है। भगवान राम का जन्म इसी संदेश का प्रतीक है—कि शक्ति का उपयोग सदैव धर्म के लिए हो और जीवन का उद्देश्य केवल स्वयं का नहीं, बल्कि समस्त समाज का कल्याण हो।<br />भगवान राम का जीवन संघर्षों से भरा था, पर उन्होंने हर परिस्थिति में धैर्य और मर्यादा को नहीं छोड़ा। राजमहल का वैभव त्यागकर वनवास स्वीकार करना, कठिनाइयों में भी सत्य का साथ देना, और शत्रु के प्रति भी सम्मान का भाव रखना—ये सभी हमें सिखाते हैं कि महानता परिस्थितियों से नहीं, बल्कि हमारे आचरण से जन्म लेती है। रामनवमी हमें यही प्रेरणा देती है कि जीवन में चाहे कितनी भी चुनौतियाँ आएँ, हमें अपने मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।<br />यह पर्व हमें परिवार और समाज के प्रति कर्तव्य की भी याद दिलाता है। राम आदर्श पुत्र बने, आदर्श भाई बने, आदर्श पति बने और आदर्श राजा भी। उनके जीवन का हर रूप हमें सिखाता है कि संतुलित और जिम्मेदार जीवन ही सच्ची सफलता है। आज के समय में, जब प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ बढ़ रहे हैं, रामनवमी हमें त्याग, सेवा और सहानुभूति का महत्व समझाती है।<br />रामनवमी का संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अपने व्यवहार में उतारना ही इस पर्व का सच्चा उत्सव है। यदि हम सत्य बोलें, दूसरों की सहायता करें, क्रोध के स्थान पर संयम अपनाएँ और अन्याय के विरुद्ध साहस से खड़े हों, तो यही रामनवमी की वास्तविक भावना होगी।<br />आइए, इस रामनवमी पर हम संकल्प लें कि अपने जीवन में मर्यादा, करुणा और सत्य को स्थान देंगे। अपने विचारों को सकारात्मक बनाएँगे, समाज में सद्भाव फैलाएँगे और अपने कर्मों से ऐसा वातावरण बनाएँगे जहाँ हर व्यक्ति सुरक्षित, सम्मानित और प्रेरित महसूस करे। यही रामनवमी का सच्चा संदेश है—अपने भीतर राम के आदर्शों को जगाकर एक बेहतर समाज का निर्माण करना। </p>
<p>                गोपाल कौशल भोजवाल <br />          बस स्टैंड महू नीमच राजमार्ग फोरलेन <br />               नागदा जिला धार मध्यप्रदेश <br />                      9981467300</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 15:19:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य लाती है मां महागौरी की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन अष्टमी तिथि सुबह 11.48 तक है। नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित है। महागौरी अर्थात अत्यंत गौर वर्ण वाली देवी, पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव को पाने की चाहत में कठोर तपस्या के कारण देवी का शरीर काला पड़ गया था, जिसे बाद में भगवान शिव ने गंगाजल से स्नान कराकर पुनः अत्यंत गौर और दिव्य बनाया। इसी कारण इन्हें महागौरी कहा गया। <br />मां महागौरी का स्वरूप<br />•    वर्ण - सफेद (गौर)<br />•    श्वेत वस्त्र धारण करती हैं।<br />•    वृषभ (बैल) पर सवार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/worship-of-maa-mahagauri-brings-unbroken-good-fortune-to-married/article-2750"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/whatsapp-image-2026-03-25-at-4.45.41-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन अष्टमी तिथि सुबह 11.48 तक है। नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित है। महागौरी अर्थात अत्यंत गौर वर्ण वाली देवी, पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव को पाने की चाहत में कठोर तपस्या के कारण देवी का शरीर काला पड़ गया था, जिसे बाद में भगवान शिव ने गंगाजल से स्नान कराकर पुनः अत्यंत गौर और दिव्य बनाया। इसी कारण इन्हें महागौरी कहा गया। <br />मां महागौरी का स्वरूप<br />•    वर्ण - सफेद (गौर)<br />•    श्वेत वस्त्र धारण करती हैं।<br />•    वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं, इसलिए “वृषारूढ़ा” कहलाती हैं।<br />•    चार भुजाएं होती हैं - एक हाथ में त्रिशूल, एक हाथ में डमरू अन्य दो हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा<br />मां महागौरी की पूजा विधि<br />•    नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी को नारियल का भोग लगाना चाहिए।<br />•    रात की रानी के फूल माता महागौरी को अधिक पसंद है। इसलिए इस दिन फूल से पूजा करनी चाहिए।<br />•    माता को चौकी पर स्थापित करने से पहले गंगाजल से स्थान को पवित्र करें। चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका यानी 16 देवियां, सप्त घृत मातृका यानी सात सिंदूर की बिंदी लगाकर स्थापना करें. माता की सप्तशती मंत्रों से पूजा करें।<br />मां महागौरी का भोग<br />मां महागौरी को नारियल का भोग बेहद प्रिय है। माता को सफेद रंग की वस्तुएं विशेष पसंद हैं, जो शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक हैं।<br />मां महागौरी के मंत्र<br />बीज मंत्र - “ॐ देवी महागौर्यै नमः॥”<br />ध्यान मंत्र - श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”<br />स्तुति मंत्र - “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥”<br />मां महागौरी की पूजा के लाभ<br />•    अविवाहित कन्याओं के लिए इनकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इससे उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है।<br />•    वहीं विवाहित महिलाओं के लिए यह पूजा अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती है।<br />•    मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक तीनों प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं, इसलिए नवरात्रि में उनका विशेष महत्व माना गया है।<br />•    देवी भागवत पुराण के अनुसार, उनकी कृपा से साधक के भीतर के नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं और वह धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर होता है।<br />•    व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/worship-of-maa-mahagauri-brings-unbroken-good-fortune-to-married/article-2750</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 18:08:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा को समर्पित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि, शरद नवरात्रि के समान, नौ दिनों के लिये आयोजित की जाती है। चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा को समर्पित होती है। माता के भक्त प्रतिपदा से नवमी तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना और उपवास कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।</p>
<p>चैत्र नवरात्रि के लिये घटस्थापना चैत्र प्रतिपदा को होती है जो कि हिन्दु कैलेण्डर का पहला दिवस होता है। अतः भक्त लोग साल के प्रथम दिन से अगले नौ दिनों तक माता की पूजा कर वर्ष का शुभारम्भ करते हैं। चैत्र नवरात्रि को वसन्त नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। भगवान राम का जन्मदिवस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/chaitra-navratri-dedicated-to-maa-durga/article-2731"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/1696661623.jpg" alt=""></a><br /><p>चैत्र नवरात्रि, शरद नवरात्रि के समान, नौ दिनों के लिये आयोजित की जाती है। चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा को समर्पित होती है। माता के भक्त प्रतिपदा से नवमी तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना और उपवास कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।</p>
<p>चैत्र नवरात्रि के लिये घटस्थापना चैत्र प्रतिपदा को होती है जो कि हिन्दु कैलेण्डर का पहला दिवस होता है। अतः भक्त लोग साल के प्रथम दिन से अगले नौ दिनों तक माता की पूजा कर वर्ष का शुभारम्भ करते हैं। चैत्र नवरात्रि को वसन्त नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। भगवान राम का जन्मदिवस चैत्र नवरात्रि के अन्तिम दिन पड़ता है और इस कारण से चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<p>चैत्र नवरात्रि के दिन माता दुर्गा के नौ भिन्न-भिन्न स्वरूपों को समर्पित होते हैं। शरद नवरात्रि में किये जाने वाले सभी अनुष्ठान चैत्र नवरात्रि के दौरान भी किये जाते हैं। शरद नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना पूजा विधि समान ही होती है।</p>
<p>चैत्र नवरात्रि उत्तरी भारतीय प्रदेशों में ज्यादा प्रचलित है। महाराष्ट्र में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत गुड़ी पड़वा से और आन्ध्र प्रदेश एवं कर्णाटक में उगादी से होती है।</p>
<p><em><strong>नौ देवियाँ</strong></em><br />माँ दुर्गा के नौ रूप इस प्रकार हैं -</p>
<p><em><strong>देवी शैलपुत्री</strong></em> - देवी सती के रूप में आत्मदाह करने के पश्चात, देवी पार्वती ने पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। संस्कृत में शैल का अर्थ पर्वत होता है, इसीलिये देवी को पर्वत की पुत्री शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है।</p>
<p><br /><em><strong>देवी ब्रह्मचारिणी</strong></em> - देवी कूष्माण्डा का स्वरूप धारण करने के उपरान्त देवी पार्वती ने दक्ष प्रजापति की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस रूप में देवी पार्वती एक महान सती थीं तथा उनके अविवाहित ही रूप को देवी ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा जाता है।</p>
<p><br /><em><strong>देवी चन्द्रघण्टा</strong></em> - देवी चन्द्रघण्टा, देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। भगवान शिव से विवाह करने के पश्चात देवी महागौरी ने अपने मस्तक पर अर्ध चन्द्र धारण करना आरम्भ कर दिया, जिसके कारण देवी पार्वती को देवी चन्द्रघण्टा के नाम से जाना जाने लगा।</p>
<p><br /><em><strong>देवी कूष्माण्डा</strong></em> - माँ सिद्धिदात्री का रूप धारण करने के पश्चात, देवी पार्वती सूर्य के केन्द्र के भीतर निवास करने लगीं ताकि वह ब्रह्माण्ड को ऊर्जा प्रदान कर सकें। उसी समय से देवी को कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। कूष्माण्डा वह देवी हैं, जिनमें सूर्य के अन्दर निवास करने की शक्ति एवं क्षमता है। देवी कूष्माण्डा की देह की तेज एवं कान्ति सूर्य के समान दैदीप्यमान है।</p>
<p><br /><em><strong>देवी स्कन्दमाता </strong></em>- जब देवी पार्वती भगवान स्कन्द (जिन्हें भगवान कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है) की माँ बनीं, तो वह देवी स्कन्दमाता के नाम से लोकप्रिय हो गयीं।</p>
<p><br /><em><strong>देवी कात्यायनी</strong></em> - राक्षस महिषासुर का संहार करने हेतु देवी पार्वती ने देवी कात्यायनी का रूप धारण किया था। यह देवी पार्वती का सबसे उग्र रूप था। देवी पार्वती के कात्यायनी स्वरूप को योद्धा देवी के रूप में भी जाना जाता है।</p>
<p><br /><em><strong>देवी कालरात्रि</strong></em> - जब देवी पार्वती ने शुम्भ एवं निशुम्भ नामक राक्षसों का वध करने हेतु अपनी बाहरी स्वर्णिम त्वचा को हटा दिया, तो उन्हें देवी कालरात्रि के नाम से जाना गया। कालरात्रि देवी पार्वती का सर्वाधिक उग्र एवं वीभत्स रूप है।</p>
<p><br /><em><strong>देवी महागौरी</strong></em> - हिन्दु पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी शैलपुत्री सोलह वर्ष की आयु में अत्यन्त रूपवती थीं तथा उन्हें गौर वर्ण का आशीर्वाद प्राप्त था। उनके अत्यधिक गौर वर्ण के कारण उन्हें देवी महागौरी के नाम से जाना जाता था।</p>
<p><br /><em><strong>देवी सिद्धिदात्री</strong></em> - ब्रह्माण्ड के आरम्भ में भगवान रुद्र ने सृजन हेतु आदि-पराशक्ति की पूजा की। मान्यताओं के अनुसार, देवी आदि-पराशक्ति का कोई रूप नहीं था अर्थात वह निराकार रूप में थीं। शक्ति की सर्वोच्च देवी, आदि-पराशक्ति, भगवान शिव के बायें अर्ध भाग से माता सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुयीं थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:20:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार धाम तीर्थ यात्रा में गैर हिन्दू यात्रियों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>देहरादून </strong></em>: चार धाम तीर्थ यात्रा में गैर हिन्दू यात्रियों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग पर भारतीय जनता पार्टी सासंद साक्षी महाराज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर जगह नियम होने चाहिए, इंदिरा गांधी को भी मंदिर में जाने से रोक दिया गया था। उन्होंने कहा कि जल्द ही चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है और इस दौरान भारी भीड़ होती है। मेरा मुख्य आश्रम भी ऋषिकेश में है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुझसे भी संपर्क करते हैं। तीर्थस्थलों की समितियां अपने नियम बनाती हैं और उनका पालन सभी को करना होता है। सांसद महराज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/draft-add-your-titledraft-add-your-titledraft-add-your-title/article-2710"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/original-char-dham_650x400_71484042663.jpg" alt=""></a><br /><p><em><strong>देहरादून </strong></em>: चार धाम तीर्थ यात्रा में गैर हिन्दू यात्रियों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग पर भारतीय जनता पार्टी सासंद साक्षी महाराज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर जगह नियम होने चाहिए, इंदिरा गांधी को भी मंदिर में जाने से रोक दिया गया था। उन्होंने कहा कि जल्द ही चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है और इस दौरान भारी भीड़ होती है। मेरा मुख्य आश्रम भी ऋषिकेश में है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुझसे भी संपर्क करते हैं। तीर्थस्थलों की समितियां अपने नियम बनाती हैं और उनका पालन सभी को करना होता है। सांसद महराज ने कहा कि एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जगन्नाथ पुरी गई थीं, लेकिन वहां की कमेटी ने उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी। वे नहीं गईं और बाहर से प्रणाम कर के लौट आईं। हालिया घटनाक्रम पर सांसद ने कहा कि निर्णय कमेटी का होता है और उसका पालन सरकार को करना होता है। बता दें बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया था कि आने वाली चार धाम यात्रा को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। उनके अनुसार, बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर सहित अन्य पवित्र स्थलों में गैर-सनातनी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा था कि यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, जिसकी शुरुआत आदि शंकराचार्य ने की थी। बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं और इनका गहरा आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने कहा था कि हाल के समय में कुछ समूहों द्वारा धार्मिक स्थलों के माहौल और पवित्रता को प्रभावित करने की कोशिशें सामने आई थीं। लंबे समय से उठ रही मांग के बाद यह प्रस्ताव मंदिर बोर्ड के समक्ष लाया गया, जिसे बिना किसी विरोध के पारित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/draft-add-your-titledraft-add-your-titledraft-add-your-title/article-2710</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:48:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति द्वारा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सत्यनारायण भगवान की सवारी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए मीठी केसरिया ठंडाई का वितरण किया गया। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।</p>
<p>समिति के अध्यक्ष विवेक गुप्ता के निर्देशनुसार, सचिव बिमल दीवान द्वारा प्रेरित, सह-सचिव पवन बंसल एवं सुभाष सावालदावाला की देखरेख में कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के सक्रिय सदस्यों महेश काबरा, संजय अग्रवाल (नीम का थाना), प्रमोद सुरेका, मोहित सुरेका, विनय सोनथालिया, विनोद अग्रवाल, ताड़क नाथ गुप्ता, महेश बन्का आदि की सराहनीय भूमिका रही।</p>
<p>समिति के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/saffron-thandai-distribution-program-completed-by-shri-kashi-vishwanath-seva/article-2652"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/img-20260301-wa0001.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सत्यनारायण भगवान की सवारी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए मीठी केसरिया ठंडाई का वितरण किया गया। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।</p>
<p>समिति के अध्यक्ष विवेक गुप्ता के निर्देशनुसार, सचिव बिमल दीवान द्वारा प्रेरित, सह-सचिव पवन बंसल एवं सुभाष सावालदावाला की देखरेख में कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के सक्रिय सदस्यों महेश काबरा, संजय अग्रवाल (नीम का थाना), प्रमोद सुरेका, मोहित सुरेका, विनय सोनथालिया, विनोद अग्रवाल, ताड़क नाथ गुप्ता, महेश बन्का आदि की सराहनीय भूमिका रही।</p>
<p>समिति के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों के सहयोग से यह सेवा कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रसाद स्वरूप ठंडाई ग्रहण कर समिति के सेवा भाव की प्रशंसा की। कार्यक्रम में पार्षद विजय ओझा सहित कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।</p>
<p>उपरोक्त जानकारी सह-सचिव पवन बंसल द्वारा प्रदान की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 22:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धूमधाम से निकाली गयी श्री  श्याम बाबा की निशान यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><em><strong>कोलकाता </strong></em>: हर साल की भांति इस साल भी श्री श्याम बाबा की निशान यात्रा बड़े ही धूमधाम के साथ निकाली गई जिसमें करीबन 2000 भक्त निशान लेकर शुक्रवार सुबह हिंदुस्तान पार्क (न्यू अलीपुर) से श्री श्याम मंदिर चंडीतल्ला तक गए l<br />तारक सिंह ने पत्रकार धर्मवीर सिंह को जानकारी देते हुए बताया कि इस बार भी धूमधाम से निशान यात्रा निकाली गई जिसमें सभी भक्त बढ़ -चढ़कर हिस्सा लिए l</p>
<p>वहीं दूसरी और श्री श्याम मंदिर में श्री श्याम संकीर्तन का आयोजन संध्या के समय किया गया था जिसमें भक्तों का जन सैलाब देखने के लिए मिला जिसमें प्रसिद्ध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/shri-shyam-babas-nishan-yatra-carried-out-with-much-fanfare/article-2649"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-02/whatsapp-image-2026-02-27-at-5.43.52-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><em><strong>कोलकाता </strong></em>: हर साल की भांति इस साल भी श्री श्याम बाबा की निशान यात्रा बड़े ही धूमधाम के साथ निकाली गई जिसमें करीबन 2000 भक्त निशान लेकर शुक्रवार सुबह हिंदुस्तान पार्क (न्यू अलीपुर) से श्री श्याम मंदिर चंडीतल्ला तक गए l<br />तारक सिंह ने पत्रकार धर्मवीर सिंह को जानकारी देते हुए बताया कि इस बार भी धूमधाम से निशान यात्रा निकाली गई जिसमें सभी भक्त बढ़ -चढ़कर हिस्सा लिए l</p>
<p>वहीं दूसरी और श्री श्याम मंदिर में श्री श्याम संकीर्तन का आयोजन संध्या के समय किया गया था जिसमें भक्तों का जन सैलाब देखने के लिए मिला जिसमें प्रसिद्ध भजन प्रवाहक मौजूद रहे और श्याम के भजनों पर भक्त झूमते गाते हुए दिखाई दिए l</p>
<p>कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से तारक सिंह (प्रेसिडेंट), अमित सिंह (सेक्रेटरी), मनोज चौधरी (वाइस प्रेसिडेंट), सौरभ अग्रवाल (प्रेसिडेंट - श्याम मंदिर), चेतन अग्रवाल, पुनीत कनोई, संदीप अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, विकास शर्मा, विनोद चमड़िया, राजेश अग्रवाल, अभिषेक अग्रवाल के अलावा कई अन्य मेंबर का महत्वपूर्ण योगदान रहा l</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 14:29:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती के भावपूर्ण उत्सव की तैयारी में जुटे बेलूर मठ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="dpContent">रामकृष्ण (1836-1886 ई.) 19वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय सन्त थे। स्वामी रामकृष्ण का जन्म गुरुवार, फरवरी 18, 1836 को भारत के पश्चिम बंगाल में हुगली जिले के कमरपुकुर नामक ग्राम में हुआ था। उनका जन्म एक अत्यन्त निर्धन, किन्तु अत्यन्त धार्मिक परिवार में हुआ था। कालान्तर में वह, देवी काली को समर्पित <strong>दक्षिणेश्वर काली मन्दिर</strong>  के पुजारी बन गये थे। वह अपने भक्तों के मध्य <strong>रामकृष्ण परमहंस</strong>  के नाम से लोकप्रिय हैं। उनका पूरा नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था।</p>
<p class="dpContent">स्वामी रामकृष्ण का विवाह शारदा देवी से हुआ था, जो कुछ समय पश्चात् उनकी आध्यात्मिक संगिनी बन गयी थीं। <a class="dpContentLink" href="https://www.drikpanchang.com/calendars/indian/jayanti/swami-vivekananda/swami-vivekananda-jayanti.html?year=2027">स्वामी विवेकानन्द</a></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/religion-culture/people-are-busy-preparing-for-the-emotional-celebration-of-the/article-2577"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-02/1739967288_ramakrishna_paramhansa.png" alt=""></a><br /><p class="dpContent">रामकृष्ण (1836-1886 ई.) 19वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय सन्त थे। स्वामी रामकृष्ण का जन्म गुरुवार, फरवरी 18, 1836 को भारत के पश्चिम बंगाल में हुगली जिले के कमरपुकुर नामक ग्राम में हुआ था। उनका जन्म एक अत्यन्त निर्धन, किन्तु अत्यन्त धार्मिक परिवार में हुआ था। कालान्तर में वह, देवी काली को समर्पित <strong>दक्षिणेश्वर काली मन्दिर</strong> के पुजारी बन गये थे। वह अपने भक्तों के मध्य <strong>रामकृष्ण परमहंस</strong> के नाम से लोकप्रिय हैं। उनका पूरा नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था।</p>
<p class="dpContent">स्वामी रामकृष्ण का विवाह शारदा देवी से हुआ था, जो कुछ समय पश्चात् उनकी आध्यात्मिक संगिनी बन गयी थीं। <a class="dpContentLink" href="https://www.drikpanchang.com/calendars/indian/jayanti/swami-vivekananda/swami-vivekananda-jayanti.html?year=2027">स्वामी विवेकानन्द</a> उनके प्रसिद्ध शिष्यों में से एक थे। स्वामी विवेकानन्द ने अपने गुरु के सम्मान में, <strong>रामकृष्ण मठ</strong> की स्थापना की, जो कि जन-कल्याण हेतु कार्यरत है तथा विश्व भर में रामकृष्ण मिशन के रूप में आध्यात्मिक आन्दोलन का प्रचार-प्रसार करता है। रामकृष्ण मठ एवं मिशन का मुख्यालय <strong>बेलुड़ मठ</strong> है।</p>
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<div class="pbwidget-body">
<div class="postdisplay_content_inside postdisplay_content_inside_69957ebc02940">
<p dir="ltr"><span>19 फरवरी, कोलकाता और दुनिया भर के आध्यात्मिक केंद्रों में एक शांत उत्साह का माहौल छा रहा है। श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती मनाने की तैयारी में जुट गए हैं। यह महज़ एक और त्योहार नहीं है—यह प्रेम, एकता और ईश्वर तक पहुँचने के सरल मार्ग की एक सशक्त याद दिलाता है, एक ऐसी दुनिया में जो अक्सर विभाजित महसूस होती है।</span></p>
</div>
</div>
</div>
<p class="dpContent"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 14:42:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महाशिवरात्रि: अंधकार से आत्मबोध तक की शिव-यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सनातन चेतना में महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण की दिव्य रात्रि है। यह वह क्षण है जब साधक बाह्य संसार की चंचलता से हटकर अंतर्मन में उतरता है और शिव-तत्त्व का अनुभव करता है। ‘शिव’ का अर्थ ही है कल्याण। जहाँ शिव हैं, वहाँ भय, द्वंद्व और अज्ञान का स्थान नहीं रहता।</p>
<p>आज के भौतिकतावादी और तनावग्रस्त युग में महाशिवरात्रि का महत्व और भी गहरा हो जाता है, क्योंकि यह पर्व मनुष्य को बाहरी सफलता नहीं, बल्कि आंतरिक शांति की ओर ले जाता है। महाशिवरात्रि वह रात्रि है जब प्रकृति स्थिर होती है और चेतना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/astrology/mahashivratri-shivas-journey-from-darkness-to-enlightenment/article-2547"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-02/mahshivratri.jpg" alt=""></a><br /><p>सनातन चेतना में महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण की दिव्य रात्रि है। यह वह क्षण है जब साधक बाह्य संसार की चंचलता से हटकर अंतर्मन में उतरता है और शिव-तत्त्व का अनुभव करता है। ‘शिव’ का अर्थ ही है कल्याण। जहाँ शिव हैं, वहाँ भय, द्वंद्व और अज्ञान का स्थान नहीं रहता।</p>
<p>आज के भौतिकतावादी और तनावग्रस्त युग में महाशिवरात्रि का महत्व और भी गहरा हो जाता है, क्योंकि यह पर्व मनुष्य को बाहरी सफलता नहीं, बल्कि आंतरिक शांति की ओर ले जाता है। महाशिवरात्रि वह रात्रि है जब प्रकृति स्थिर होती है और चेतना ऊर्ध्वगामी होती है। योगशास्त्र के अनुसार इस रात्रि पृथ्वी की ऊर्जा मानव शरीर में सहज रूप से ऊपर की ओर प्रवाहित होती है। यही कारण है कि इस रात्रि ध्यान, मौन और साधना विशेष फलदायी माने गए हैं। शिव को आदियोगी कहा गया है वे प्रथम गुरु हैं, जिन्होंने मानवता को योग, ध्यान और आत्मानुशासन का मार्ग दिखाया। आधुनिक जीवन और हलाहल विष आज का मनुष्य भी प्रतिदिन हलाहल विष का सामना कर रहा है कार्य का दबाव, प्रतिस्पर्धा, रिश्तों में खटास, अकेलापन, उपभोग की असीम चाह और भविष्य की अनिश्चितता। यह विष धीरे-धीरे मन को अशांत, शरीर को रोगी और आत्मा को थका हुआ बना देता है।</p>
<p>समुद्र मंथन की कथा केवल पौराणिक घटना नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत रूपक है। जैसे देवताओं और दानवों के प्रयास से पहले विष निकला, वैसे ही जीवन में परिवर्तन और प्रगति से पहले संघर्ष और पीड़ा आती है। भगवान शिव का विषपान यह संदेश देता है कि जो चेतना में स्थिर है, वही विष को अमृत में बदल सकती है।</p>
<p><em><strong>शिव पूजन बाह्य नहीं, अंतःयात्रा</strong></em></p>
<p>महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पूजन का आध्यात्मिक अर्थ अत्यंत गूढ़ है। शिवलिंग निराकार और साकार के मिलन का प्रतीक है। जब भक्त जल अर्पित करता है, तो वह अपने चंचल विचारों को शांत करता है; दूध अर्पण कर वह अपनी कठोरता को कोमलता में बदलता है। बेलपत्र अर्पण कर वह अपने तीन दोष</p>
<p>काम, क्रोध और लोभ का विसर्जन करता है। आज के समय में शिव पूजन का अर्थ है अपने भीतर के अहंकार, अधैर्य और असंतोष को त्यागना। यही सच्ची आराधना है।</p>
<p>महाशिवरात्रि का रात्रि जागरण केवल आँखों का जागना नहीं, बल्कि चेतना का जागरण है। यह आत्मनिरीक्षण की रात्रि है , मैं कौन हूँ, मेरा लक्ष्य क्या है, और मैं किन विषों को ढो रहा हूँ? आज जब समाज अवसाद, हिंसा और असहिष्णुता से जूझ रहा है, तब शिव का मौन और वैराग्य हमें सिखाता है कि हर समस्या का उत्तर शोर में नहीं, स्थिरता में छिपा है भगवान शिव आशुतोष हैं वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं, क्योंकि वे भाव को देखते हैं, प्रदर्शन को नहीं। आज जब आडंबर और दिखावे ने साधना को भी प्रभावित किया है, शिव हमें सरलता और सच्चाई का मार्ग दिखाते हैं। एक क्षण का सच्चा ध्यान, एक आँसू भरी प्रार्थना, एक मौन स्वीकार यह सब शिव को प्रिय है। महाशिवरात्रि हमें यह स्मरण कराती है कि शिव मंदिर में ही नहीं, हमारे भीतर भी विराजमान हैं। जब हम अपने भीतर की नकारात्मकता, क्रोध और भय को स्वीकार कर उसे चेतना के कंठ में रोक लेते हैं, तब जीवन नीलकंठ बन जाता है। विष रहते हुए भी करुणा और संतुलन से भरा। महाशिवरात्रि पर्व आत्मा को शिवमय करने का अवसर है। ये बाहरी अंधकार से नहीं, भीतरी प्रकाश से जीवन को बदलने का पर्व है।</p>
<p>डॉ. पंकज भारद्वाज.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 17:55:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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