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                <title>साहित्य - Gambheer Samachar</title>
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                <title>मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम </title>
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                        <![CDATA[<p>  </p>
<p>कविता </p>
<p>चैत्र शुक्ल की सुनहरी बेला में,<br />अयोध्या के आँगन में उषा उतरी,<br />जग ने देखा धर्म का सूर्योदय जब <br />करुणा की किरण बन राम अवतरे।।</p>
<p>वन-वन में जिसकी गूँज पवित्र,<br />न्याय की ज्योति जिसने जगाई,<br />वाणी में मधुर सत्य की धारा,<br />भुजाओं में मर्यादा समाई।।</p>
<p>शस्त्र नहीं केवल शक्ति बने,<br />शास्त्रों का भी मान बढ़ाया,<br />राजा होकर त्याग का पथ चुन,<br />मानवता को धर्म सिखाया।।</p>
<p>जन-मन में दीपक-सा जलते,<br />संयम जिनका स्वर्णिम आभूषण,<br />सीता-सा धैर्य, लक्ष्मण-सी सेवा,<br />भक्ति बने हनुमत का समर्पण।।</p>
<p>आज भी जब तम घिर आता है,<br />मन संशय से भर जाता है,<br />राम-नाम का एक प्रभात</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/literature/maryada-purushottam-prabhu-shri-ram/article-2761"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/shri-ram.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>कविता </p>
<p>चैत्र शुक्ल की सुनहरी बेला में,<br />अयोध्या के आँगन में उषा उतरी,<br />जग ने देखा धर्म का सूर्योदय जब <br />करुणा की किरण बन राम अवतरे।।</p>
<p>वन-वन में जिसकी गूँज पवित्र,<br />न्याय की ज्योति जिसने जगाई,<br />वाणी में मधुर सत्य की धारा,<br />भुजाओं में मर्यादा समाई।।</p>
<p>शस्त्र नहीं केवल शक्ति बने,<br />शास्त्रों का भी मान बढ़ाया,<br />राजा होकर त्याग का पथ चुन,<br />मानवता को धर्म सिखाया।।</p>
<p>जन-मन में दीपक-सा जलते,<br />संयम जिनका स्वर्णिम आभूषण,<br />सीता-सा धैर्य, लक्ष्मण-सी सेवा,<br />भक्ति बने हनुमत का समर्पण।।</p>
<p>आज भी जब तम घिर आता है,<br />मन संशय से भर जाता है,<br />राम-नाम का एक प्रभात<br />अंतर का अंधकार मिटाता है ।।</p>
<p>नवमी के इस उत्सव पर,<br />हृदय में मर्यादा जगाएँ,<br />करुणा,सत्य,शील की ज्योति<br />जीवन-अयोध्या फिर बसाएँ।।</p>
<p>               गोपाल कौशल भोजवाल <br />          बस स्टैंड महू नीमच राजमार्ग फोरलेन <br />               नागदा जिला धार मध्यप्रदेश <br />                      9981467300</p>]]>
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                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 15:21:56 +0530</pubDate>
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                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'समानता' (दलित कविता)</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>समानता</p>
<p>मैं बिस्तर पर लेटे था। </p>
<p>किसी ने यह पूछा दिया- </p>
<p>क्या भाई तुम्हारे यहां </p>
<p>असमानता है क्या?</p>
<p>  </p>
<p>तड़के ही उत्तर दिया,</p>
<p>नहीं भाई, नहीं तो !</p>
<p>हमारे पास संविधान है।</p>
<p>तो कैसे होंगे असमान?</p>
<p>  </p>
<p>घोड़ा और घास </p>
<p>साथ-साथ, पास-पास रहता है ,</p>
<p>शिकार तो घास को ही होना पड़ता है।</p>
<p>फ़िर भी दोनों समान है!</p>
<p>  </p>
<p>दलित भीड़ बढ़ाए </p>
<p>नेता के लिए वोट मांग लाए ,</p>
<p>चुनाव के समय भाई-बंधु-हितैषी बन जाए ।</p>
<p>कहां कोई असमान है?</p>
<p>  </p>
<p>विधायक, सांसद, नेता, मंत्री बनते ही </p>
<p>फ़िर वापस लौट आते हैं हम अपने पद पर,</p>
<p>गरीब, शोषित, अछूत, भंगी और दलित !</p>
<p>कहीं</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/literature/-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE---%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE/article-2620"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-02/img_20260204_1931151.jpg" alt=""></a><br /><p>समानता</p>
<p>मैं बिस्तर पर लेटे था। </p>
<p>किसी ने यह पूछा दिया- </p>
<p>क्या भाई तुम्हारे यहां </p>
<p>असमानता है क्या?</p>
<p> </p>
<p>तड़के ही उत्तर दिया,</p>
<p>नहीं भाई, नहीं तो !</p>
<p>हमारे पास संविधान है।</p>
<p>तो कैसे होंगे असमान?</p>
<p> </p>
<p>घोड़ा और घास </p>
<p>साथ-साथ, पास-पास रहता है ,</p>
<p>शिकार तो घास को ही होना पड़ता है।</p>
<p>फ़िर भी दोनों समान है!</p>
<p> </p>
<p>दलित भीड़ बढ़ाए </p>
<p>नेता के लिए वोट मांग लाए ,</p>
<p>चुनाव के समय भाई-बंधु-हितैषी बन जाए ।</p>
<p>कहां कोई असमान है?</p>
<p> </p>
<p>विधायक, सांसद, नेता, मंत्री बनते ही </p>
<p>फ़िर वापस लौट आते हैं हम अपने पद पर,</p>
<p>गरीब, शोषित, अछूत, भंगी और दलित !</p>
<p>कहीं कुछ असमान दिखा?</p>
<p> </p>
<p>समानता !</p>
<p>बनी हुई है,</p>
<p>सदियों से, कई अरसों से,</p>
<p>चुनाव ही तो जीता है, </p>
<p>कोई आसमान का तारा नहीं।</p>
<p>अच्छे से देखें हम अब भी समान हैं!</p>
<p> </p>
<p>समानता !</p>
<p>चुनाव के पहले वाली भी वही है </p>
<p>और चुनाव के बाद वाली भी वही है!</p>
<p>देखें ध्यान से, सब कुछ समान है?</p>
<p> </p>
<p>समानता !</p>
<p>ग़रीबी की गरीबों से हैं!</p>
<p>मंत्रालय की मंत्रियों से हैं!</p>
<p>चमार की चमारों से हैं!</p>
<p>ब्राह्मण की ब्राह्मणों से हैं!</p>
<p> </p>
<p>अब आप ही बताइए </p>
<p>और आप ही तय कीजिए </p>
<p>कहीं असमानता दिखीं ?</p>
<p>पूरे समाज में फैली है </p>
<p>समानता! </p>
<p> </p>
<p>समानता !</p>
<p>बस्स समानता!</p>
<p> </p>
<p><img class="img-align-left" src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-02/img_20260204_1931152.jpg" alt="img_20260204_193115" width="187" height="195"></img></p>]]>
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                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 21:28:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Gambheer Samachar ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुक्रग़ुज़ार करो!</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-02/img_20260204_1931151.jpg" alt="img_20260204_193115" width="187" height="195" /></p>
<p>  </p>
<p>                                शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>            उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>                      जिन्हें वसीयत में मिली, </p>
<p>      अपमान, तिरस्कार और दुत्कार को, </p>
<p>                                      ठुकरा रहे हैं।</p>
<p>  </p>
<p>                            शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>          उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>                        अपमान की परिभाषा, </p>
<p>                चूहड़ा-चमरा-भंगी कहने की, </p>
<p>                      मानसिकता बदल रहे हैं। </p>
<p>    </p>
<p>                              शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>            उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>जिन्हें परंपरा में मिली गंदी गालियों को,</p>
<p>                              सिर्फ़ बताया है।</p>
<p>लौटाने की मानसिकता दर्शा नहीं रहे हैं।</p>
<p>  </p>
<p>                                  शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>              उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>                        जिन्होंने अपने इतिहास में, </p>
<p>                                    बदला के बजाय,</p>
<p>            बदलाव और बराबरी को चुना है।</p>
<p>  </p>
<p>                                शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>            उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>                      जिन्होंने अपने समाज में, </p>
<p>                      हिंसा के बदले, हिंसा नहीं। </p>
<p>प्रेम, सद्भावना और भाईचारा को चुना है।</p>
<p>  </p>
<p>                                  शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>                उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>                जिन्होंने</p>
<p>कभी</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<br /><p><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-02/img_20260204_1931151.jpg" alt="img_20260204_193115" width="187" height="195"></img></p>
<p> </p>
<p>                शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>      उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>           जिन्हें वसीयत में मिली, </p>
<p>   अपमान, तिरस्कार और दुत्कार को, </p>
<p>                   ठुकरा रहे हैं।</p>
<p> </p>
<p>              शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>     उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>            अपमान की परिभाषा, </p>
<p>        चूहड़ा-चमरा-भंगी कहने की, </p>
<p>           मानसिकता बदल रहे हैं। </p>
<p>  </p>
<p>               शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>      उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>जिन्हें परंपरा में मिली गंदी गालियों को,</p>
<p>               सिर्फ़ बताया है।</p>
<p>लौटाने की मानसिकता दर्शा नहीं रहे हैं।</p>
<p> </p>
<p>                 शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>       उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>            जिन्होंने अपने इतिहास में, </p>
<p>                  बदला के बजाय,</p>
<p>      बदलाव और बराबरी को चुना है।</p>
<p> </p>
<p>                शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>      उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>           जिन्होंने अपने समाज में, </p>
<p>           हिंसा के बदले, हिंसा नहीं। </p>
<p>प्रेम, सद्भावना और भाईचारा को चुना है।</p>
<p> </p>
<p>                 शुक्रग़ुज़ार करो!</p>
<p>        उन वंचित-शोषित-दलितों को,</p>
<p>        जिन्होंने भूखे-प्यासे सवर्णों को,</p>
<p>कभी जल तो कभी खाद्य मुहैया कराकर,</p>
<p>      इंसानियत का रास्ता बताया है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/literature/be-thankful/article-2619</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 21:15:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Gambheer Samachar ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक दलित! </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><br />                    <br />  <br />एक दलित! <br />जब पढ़ लिखकर क़ाबिल बना, <br />हमारे गाँव ने ख़ुशियाँ मनाईं.<br />  <br />एक दलित! <br />जब अफ़सर और सिपाही बना, <br />पूरे मुहल्ले ने जश्न मनाया.<br />  <br />एक दलित! <br />जब ज़िला कलेक्टर व मुख्य सचिव बना, <br />पूरे इलाक़े में भव्य कार्यक्रम हुआ.<br />  <br />एक दलित! <br />जब चुनाव में प्रत्याशी बना, <br />पूरे दलित समाज ने भीड़ बढ़ायी.<br />  <br />एक दलित! <br />जब चुनाव जीता, <br />दलित युवकों ने जय भीम का नारा लगाया.<br />  <br />एक दलित! <br />कभी अभिनेता, कभी खिलाड़ी, कभी बिज़नेस मैन, <br />कभी साइंटिस्ट, कभी बुद्धिजीवी बना. <br />इस ख़ुशी में हमने सोशल मीडिया पर <br />स्टेटस लगाया.<br />  <br />एक दलित! <br />जब ग़रीबी, प्रताड़ना और हिंसक घटना का शिकार बना. <br />उसके</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/literature/-draft--add-your-title/article-2498"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-02/img_20260204_193115.jpg" alt=""></a><br /><p><br />          <br /> <br />एक दलित! <br />जब पढ़ लिखकर क़ाबिल बना, <br />हमारे गाँव ने ख़ुशियाँ मनाईं.<br /> <br />एक दलित! <br />जब अफ़सर और सिपाही बना, <br />पूरे मुहल्ले ने जश्न मनाया.<br /> <br />एक दलित! <br />जब ज़िला कलेक्टर व मुख्य सचिव बना, <br />पूरे इलाक़े में भव्य कार्यक्रम हुआ.<br /> <br />एक दलित! <br />जब चुनाव में प्रत्याशी बना, <br />पूरे दलित समाज ने भीड़ बढ़ायी.<br /> <br />एक दलित! <br />जब चुनाव जीता, <br />दलित युवकों ने जय भीम का नारा लगाया.<br /> <br />एक दलित! <br />कभी अभिनेता, कभी खिलाड़ी, कभी बिज़नेस मैन, <br />कभी साइंटिस्ट, कभी बुद्धिजीवी बना. <br />इस ख़ुशी में हमने सोशल मीडिया पर <br />स्टेटस लगाया.<br /> <br />एक दलित! <br />जब ग़रीबी, प्रताड़ना और हिंसक घटना का शिकार बना. <br />उसके दुःख को कोई नहीं समझा.<br /> <br />वह पढ़ा लिखा दलित, <br />सामने नहीं आया.<br />जिसके लिए ख़ुशियाँ मनाई थीं.<br /> <br />उस दलित अफ़सर और सिपाही ने, <br />मुँह फेर लिया.<br />जिसके लिए जश्न मनाया था.<br /> <br />वह दलित ज़िला कलेक्टर और मुख्य सचिव ने, <br />पहचानने से इंकार कर दिया.<br />जिसके लिए कार्यक्रम में शरीक हुए थे.<br /> <br />उस दलित नेता ने, <br />उजड़े घर को बसाने से <br />इनकार कर दिया.<br />जिसके लिए भीड़ बढ़ाई थी <br />और जय भीम के नारे लगाए थे.<br /> <br />ख़ैर उन अभिनेता, खिलाड़ी, बिज़नेस मैन, <br />साइंटिस्ट और बुद्धिजीवियों का क्या? <br />वे तो वर्चुअल थे! <br /> <br />असल ज़िन्दगी में उन दलितों ने, <br />मुझ जैसे दलितों का सिर्फ़ फ़ायदा लिया.<br />आवेग में आने के लिए. <br /> <br />अब मैं ना कोई जश्न मनाता हूँ.<br />ना कोई भीडतंत्र का पात्र बनता हूँ.<br />और ना ही कोई उनके जलसे-जुलूस में <br />शरीक होता हूँ. <br /> <br />बस्स बहुत हो चुका! <br />यह सब देखकर। <br />अब औरों की तरह, <br />चुपचाप आगे बढ़ जाता हूँ .........</p>
<p> </p>
<p>   <img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-02/img_20260204_193115.jpg" alt="IMG_20260204_193115" width="187" height="195"></img></p>]]>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 19:33:32 +0530</pubDate>
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