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                <title>अंतर्राष्ट्रीय - Gambheer Samachar</title>
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                <title>फीफा वर्ल्ड कप 2026</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : फीफा वर्ल्ड कप 2026  जो 48 टीमों के साथ शुरू हुआ था, अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। टूर्नामेंट के फाइनल की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। खिताब के लिए अब स्पेन और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगे। एक तरफ मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरा विश्व कप जीतने के इरादे से उतरेगी, तो दूसरी ओर स्पेन 16 साल बाद विश्व कप का खिताब अपने नाम करने की कोशिश करेगा।<br />स्पेन ने सेमीफाइनल में फ्रांस को हराकर फाइनल में जगह बनाई। टीम ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/fifa-world-cup-2026/article-3300"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-17-at-1.25.17-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : फीफा वर्ल्ड कप 2026  जो 48 टीमों के साथ शुरू हुआ था, अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। टूर्नामेंट के फाइनल की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। खिताब के लिए अब स्पेन और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगे। एक तरफ मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरा विश्व कप जीतने के इरादे से उतरेगी, तो दूसरी ओर स्पेन 16 साल बाद विश्व कप का खिताब अपने नाम करने की कोशिश करेगा।<br />स्पेन ने सेमीफाइनल में फ्रांस को हराकर फाइनल में जगह बनाई। टीम ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया है और अब दूसरे खिताब से सिर्फ एक जीत दूर है। वहीं अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को हराकर लगातार दूसरी बार फाइनल का टिकट कटाया है। लियोनेल मेसी एक बार फिर टीम की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे, जबकि स्पेन की नजरें युवा स्टार लामिन यामाल पर टिकी रहेंगी।<br />फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। भारतीय समयानुसार फाइनल मुकाबला 20 जुलाई की देर रात 12:30 बजे शुरू होगा। फाइनल मुकाबला न्यूयॉर्क के न्यूजर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा। भारत में फाइनल का सीधा प्रसारण टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। डिजिटल स्ट्रीमिंग ZEE5 पर होगी, जो टूर्नामेंट का आधिकारिक डिजिटल ब्रॉडकास्टर है। ZEE5 पर मुकाबला देखने के लिए सब्सक्रिप्शन जरूरी होगा। Jio यूजर्स JioTV ऐप पर DD Sports की फीड देख सकते हैं। टीवी दर्शक DD Sports, Unite8 Sports और Unite8 Sports HD पर मुकाबले का लाइव प्रसारण देख सकते हैं।<br />अर्जेंटीना के पास लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का मौका है। अगर वह खिताब बचाने में सफल रहती है तो 1958 और 1962 में लगातार विश्व कप जीतने वाले ब्राजील के बाद ऐसा करने वाली दूसरी टीम बन जाएगी। वहीं स्पेन के पास अपने इतिहास का दूसराफीफा वर्ल्ड कप खिताब जीतने का मौका होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 15:21:28 +0530</pubDate>
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                <title>वियतनाम में भारतीय पर्यटकों से भरी नाव पलटने से 15 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : वियतनाम में भारतीय टूरिस्टों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां फु क्वोक द्वीप के पास एक नाव पलट गई। यह नाव भारतीय टूरिस्टों को ले जा रही थी। भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि वह स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं। स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। <br />वियतनाम में भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह एक दुखद घटना है। कुछ घंटे पहले वियनताम के फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई। घटना की सटीक जानकारी जुटाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/15-killed-when-boat-loaded-with-indian-tourists-capsizes-in/article-3275"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-11-at-5.00.59-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : वियतनाम में भारतीय टूरिस्टों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां फु क्वोक द्वीप के पास एक नाव पलट गई। यह नाव भारतीय टूरिस्टों को ले जा रही थी। भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि वह स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं। स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। <br />वियतनाम में भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह एक दुखद घटना है। कुछ घंटे पहले वियनताम के फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई। घटना की सटीक जानकारी जुटाई जा रही है। स्थानीय अधिकारियों की तरफ से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।<br />फु क्वोक के स्पेशल इकोनॉमिक जोन के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर 1 बजे ओशन पियर आइलैंड कंपनी की एक स्पीडबोट पर्यटकों को होन में रुट से एन थोई पोर्ट जा रही थी। यह फुक्वोक एयरपोर्ट से 25 किलोमीटर दूर है।  तभी होन में रूट न्गोई से लगभग 499 मीटर वह पलट गई। इससे उसमें सवार सभी समुद्र में गिर गए। पलटी नाव को देखकर पास की पर्यटक की नावें मदद के लिए पहुंची। रेस्क्यू में शामिल एक नाव के मालिक ने बताया कि उनकी नाव घटनास्थल पर पांच मिनट में पहुंच गई थी। लेकिन रेस्क्यू में दिक्कत इसलिए आई, क्योंकि नाव के अंदर लोग फंसे थे। <br />उन्होंने जानकारी दी कि बहुत कम लोग होश में आ सके। इलाके में बारिश नहीं हो रही थी। समुद्र की लहरें तेज थी। बारिश नहीं हो रही थी। उस इलाके में पर्यटक नावें चल रही थीं। एन थोई बॉर्डर गार्ड ने घटनास्थल पर दो जहाज और 35 अधिकारी और सैनिक भेजे, जो नौसेना, कोस्ट गार्ड और अन्य संबंधित बलों के साथ बचाव कार्य में शामिल हुए।<br />दोपहर तक रेस्क्यू ने स्पीडबोट में सवार सभी 36 लोगों को किनारे तक पहुंचा दिया था। 21 लोग बच गए। 15 अन्य जिनमें दो महिलाएं और 13 पुरुष शामिल थे। उनकी मौत की पुष्टि हुई।<br />इसके अलावा दूतावास ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को जानकारी और मदद देने के लिए, हो ची मिन्ह सिटी में भारत के वाणिज्य दूतावास में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है: +84 36 281 7930, +84 91 552 37 14 और +84 33 452 0414।<br />हनोई में भी एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिससे +84 91 308 9165 पर संपर्क किया जा सकता है। हम किसी भी मदद और सवाल के लिए उपलब्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:06:07 +0530</pubDate>
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                <title>अगर मौत आएगी तो अपनी ही धरती पर...&quot;, </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह और अवामी लीग के अन्य निर्वासित नेता इसी साल दिसंबर के आसपास स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि लौटते ही उनकी गिरफ्तारी हो सकती है या उनकी हत्या भी की जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश वापस जाएंगी और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी।<br />78  वर्षीय शेख हसीना ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि उन्हें अपनी वापसी के जोखिम का पूरा अंदाजा है। उन्होंने कहा-वे मुझे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/if-death-comes-it-will-be-on-our-own-land/article-3255"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-07/img-20260710-wa0004.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह और अवामी लीग के अन्य निर्वासित नेता इसी साल दिसंबर के आसपास स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि लौटते ही उनकी गिरफ्तारी हो सकती है या उनकी हत्या भी की जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश वापस जाएंगी और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी।<br />78  वर्षीय शेख हसीना ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि उन्हें अपनी वापसी के जोखिम का पूरा अंदाजा है। उन्होंने कहा-वे मुझे लौटते ही गिरफ्तार कर सकते हैं, यहां तक कि मेरी हत्या भी कर सकते हैं। फिर भी मुझे वापस जाना होगा।  हसीना ने कहा कि उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दमन किया जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि उनकी मौत भी होती है तो वह अपने ही देश की मिट्टी पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।<br />शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल होने के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। छात्र-नेतृत्व वाले व्यापक विरोध प्रदर्शनों के चलते उनकी सरकार गिर गई थी और तब से वह निर्वासन में रह रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश लौटने को लेकर उनकी ढाका की मौजूदा सरकार या अधिकारियों से किसी तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है।<br />शेख हसीना का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ महीने पहले ही बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। अदालत ने माना था कि 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई में शेख हसीना की भूमिका थी। फैसले में कहा गया कि उन्होंने या तो प्रदर्शनकारियों की हत्या के आदेश दिए या फिर उन्हें रोकने में विफल रहीं।<br />इसी मामले में अदालत ने बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई है। वहीं, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पांच साल की जेल की सजा दी गई है। अदालत ने शेख हसीना और असदुज्जमान खान कमाल की संपत्तियां जब्त करने के भी आदेश दिए हैं। अब शेख हसीना के दिसंबर में संभावित बांग्लादेश लौटने के ऐलान ने देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 22:18:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सीमा-पार आतंकवाद दुनिया की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा : पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : वैश्विक सुरक्षा के मुद्दे पर मज़बूत और एकजुट रुख अपनाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीमा-पार आतंकवाद दुनिया की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई दिल्ली और कैनबरा मिलकर आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के साझा अभियान में मजबूती से एकजुट हैं। मेलबर्न में तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया सालाना शिखर सम्मेलन के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते ऑपरेशनल तालमेल का ज़िक्र किया।<br />पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/cross-border-terrorism-a-major-threat-to-world-stability-pm-modi/article-3252"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-07/img-20260709-wa0003.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : वैश्विक सुरक्षा के मुद्दे पर मज़बूत और एकजुट रुख अपनाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीमा-पार आतंकवाद दुनिया की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई दिल्ली और कैनबरा मिलकर आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के साझा अभियान में मजबूती से एकजुट हैं। मेलबर्न में तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया सालाना शिखर सम्मेलन के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते ऑपरेशनल तालमेल का ज़िक्र किया।<br />पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि आतंकवाद न केवल किसी एक देश के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसलिए, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई साझा है, हमारा संकल्प अटूट है और इस क्षेत्र में हमारा सहयोग लगातार मज़बूत हो रहा है। दुनिया भर में तनावपूर्ण और संवेदनशील हालात के बीच, प्रधानमंत्री ने भारत के इस सैद्धांतिक रुख को मज़बूती से दोहराया कि सैन्य टकराव से कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सकता; उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव की जगह बातचीत के ज़रिए समाधान निकाला जाना चाहिए।<br />प्रधानमंत्री मोदी ने कहा हमारा यह भी मानना है कि दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और युद्धों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है। हम मिलकर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नेविगेशन की आज़ादी और नियमों पर आधारित व्यवस्था को और मज़बूत करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के रणनीतिक भूगोल को केवल समुद्री रास्तों के मिलन-स्थल के बजाय लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक अहम क्षेत्र के तौर पर देखा और कहा कि दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में खास भूमिका निभा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-बांग्लादेश के बीच फिर से दौड़ेगी मिताली एक्सप्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : भारत और बांग्लादेश के बीच मिताली एक्सप्रेस फिर से चलेगी।  पूर्व रेलवे भारत और बांग्लादेश के बीच सीधी, सीमा-पार यात्री ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने बताया कि इन जरूरी सेवाओं को बहाल करने के लिए राजनयिक बातचीत चल रही है, हालांकि कोलकाता-ढाका ट्रेन को फिर से शुरू करने की कोई तारीख घोषित नहीं की गई है। अधिकारी ने कहा कि जैसे ही तारीखों की घोषणा होगी, हम सर्विसेस शुरू करने के लिए तैयार हैं।<br />किसी भी समय चलाने के लिए रेक और कोच की सफाई और रखरखाव किया जा चुका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/mithali-express-will-run-again-between-india-and-bangladesh/article-3218"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-07/img-20260702-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : भारत और बांग्लादेश के बीच मिताली एक्सप्रेस फिर से चलेगी।  पूर्व रेलवे भारत और बांग्लादेश के बीच सीधी, सीमा-पार यात्री ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने बताया कि इन जरूरी सेवाओं को बहाल करने के लिए राजनयिक बातचीत चल रही है, हालांकि कोलकाता-ढाका ट्रेन को फिर से शुरू करने की कोई तारीख घोषित नहीं की गई है। अधिकारी ने कहा कि जैसे ही तारीखों की घोषणा होगी, हम सर्विसेस शुरू करने के लिए तैयार हैं।<br />किसी भी समय चलाने के लिए रेक और कोच की सफाई और रखरखाव किया जा चुका है। बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद भारतीय रेलवे ने मिताली, मैत्री और बंधन एक्सप्रेस ट्रेनों को अनिश्चित काल के लिए रोक दिया था। मैत्री और बंधन एक्सप्रेस के रेक कोलकाता में हैं।<br />सीमा-पार ट्रेनों को फिर से शुरू करने पर बातचीत तब शुरू हुई जब भारत ने दो साल की रोक के बाद फिर से टूरिस्ट वीजा जारी करने का फैसला किया। वीजा के फैसले के 24 घंटे के भीतर ही बांग्लादेश में वीजा सेंटरों पर भारी भीड़ देखी गई। हजारों बांग्लादेशी नागरिक, जो इलाज के लिए कोलकाता आते हैं, हवाई किराए ज्यादा होने के कारण ट्रेन सेवाएं बहाल होने की उम्मीद कर रहे हैं।<br />दिसंबर 2024 में, बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और बांग्लादेश के विदेश सचिवों की ढाका में मुलाकात के बाद, मिताली एक्सप्रेस रेक लगभग पांच महीने बाद भारत लौटे। मिताली एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी और ढाका को जोड़ती है। रेक बांग्लादेशी इंजन चिलाहाटी बॉर्डर से भारत में दाखिल हुआ और बांग्लादेश लौटने से पहले हल्दीबाड़ी स्टेशन पर मिताली एक्सप्रेस के रेक छोड़ दिए। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि रेक अच्छी हालत में हैं और रोजाना उनका रखरखाव किया जा रहा है। उन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।<br />भारत और बांग्लादेश के बीच रेलवे सेक्टर में सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। भारत ने पहले भी अपने पूर्वी पड़ोसी देश को सैकड़ों कोच और लोकोमोटिव सप्लाई किए हैं। यह नया कदम बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों, खासकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हटने के बाद आए ठहराव के बाद उठाया गया है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि अगले महीने पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में बने 20 ब्रॉड-गेज कोच की पहली खेप आ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 23:09:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>तीस्ता के बहाने चीन पहुंचा चिकन-नेक के पास</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>बांग्लादेश</strong></em> : बांग्लादेश के तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TRCMRP) को लेकर भारत पहले ही अपनी चिंता जाहिर कर चुका है. इस चिंता का मुख्य विषय बीजिंग की पहुंच चिकन नेक के काफी करीब हो जाना. बांग्लादेश और चीन ने तीस्ता ही नहीं बांग्लादेश की दूसरी नदियों के मैनेजमेंट में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनाई है. तीस्ता नदी प्रोजेक्ट पर भारत की आपत्ति को चीन ने दरकिनार कर दिया है.<br />तीस्ता नदी परियोजना के बहाने चीन चिकन नेक के करीब बढ़ता जा रहा है, जो भारत के लिए चिंता की बात है. चीन ने इस प्रोजेक्ट को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/china-reached-chicken-neck-in-the-name-of-teesta/article-3206"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-06/image-2026-06-30t002417.820.jpg" alt=""></a><br /><p><em><strong>बांग्लादेश</strong></em> : बांग्लादेश के तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TRCMRP) को लेकर भारत पहले ही अपनी चिंता जाहिर कर चुका है. इस चिंता का मुख्य विषय बीजिंग की पहुंच चिकन नेक के काफी करीब हो जाना. बांग्लादेश और चीन ने तीस्ता ही नहीं बांग्लादेश की दूसरी नदियों के मैनेजमेंट में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनाई है. तीस्ता नदी प्रोजेक्ट पर भारत की आपत्ति को चीन ने दरकिनार कर दिया है.<br />तीस्ता नदी परियोजना के बहाने चीन चिकन नेक के करीब बढ़ता जा रहा है, जो भारत के लिए चिंता की बात है. चीन ने इस प्रोजेक्ट को लेकर बांग्लादेश के साथ अपने सहयोग को एक बार फिर से दोहराया है. <br />भारत की चिंता के बीच ड्रैगन का बयान भी आया है. जिसमें कहा है कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए. चीन ने साफ किया है कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे पक्ष (विशेषकर भारत) को निशाना बनाकर नहीं किया जा रहा है.<br />चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से राजधानी बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और इसे किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए.<br />चीनी प्रवक्ता ने कहा, चीन, बांग्लादेश के साथ अपनी विकास रणनीतियों में अधिक तालमेल बिठाने के लिए तैयार है. हम अर्थव्यवस्था, व्यापार, जल संरक्षण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.<br />भारत ने तीस्ता नदी से संबंधित परियोजनाओं में चीन की किसी भी भागीदारी का विरोध किया है क्योंकि यह बांग्लादेश के साथ सीमा के एक संवेदनशील क्षेत्र के निकट स्थित है.<br />आपको बताते चले कि तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश से होकर गुजरती है और इसका हिस्सा भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के बहुत करीब है. यही वजह है कि ढाका और बीजिंग की इस संयुक्त पहल को लेकर भारत चिंतित है. तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है,</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:22:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>जॉर्जिया मेलोनी की क्यूट बेटी पहली बार आई सामने</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: फ्रांस के एवियान में आयोजित जी-7 समिट में अमेरिकी राष्ट्रति  डोनाल्ड ट्रंप, पीएम  नरेंद्र मोदी  समेत दुनिया के कई देशों के प्रमुख शामिल हुए। इस दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की 10 साल की बेटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वो कैमरे से बचते हुए अपनी मां के पीछे छिप रही हैं। इस दौरान वो मीडिया वालों से बचने की कोशिश करती नजर आईं।<br />जॉर्जिया मेलोनी के साथ रहने और अपने शर्मीले स्वभाव के चलते उनकी बेटी जिनेव्रा जियाम्ब्रूनो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। जिनेव्रा के इसी शर्मीले स्वभाव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/georgia-melonis-cute-daughter-appears-for-the-first-time/article-3155"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-06/whatsap.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: फ्रांस के एवियान में आयोजित जी-7 समिट में अमेरिकी राष्ट्रति  डोनाल्ड ट्रंप, पीएम  नरेंद्र मोदी  समेत दुनिया के कई देशों के प्रमुख शामिल हुए। इस दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की 10 साल की बेटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वो कैमरे से बचते हुए अपनी मां के पीछे छिप रही हैं। इस दौरान वो मीडिया वालों से बचने की कोशिश करती नजर आईं।<br />जॉर्जिया मेलोनी के साथ रहने और अपने शर्मीले स्वभाव के चलते उनकी बेटी जिनेव्रा जियाम्ब्रूनो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। जिनेव्रा के इसी शर्मीले स्वभाव ने सोशल मीडिया पर सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिनेव्रा जियाम्ब्रूनो भी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने आईं और अपनी मां के साथ आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल हुईं। <br />जिनेव्रा जियाम्ब्रूनो इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की इकलौती संतान हैं। जिनेव्रा का जन्म साल 2016 में हुआ था। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री मेलोनी जब फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए प्लेन से उतर रही हैं, तो उनके साथ उनकी बेटी भी मौजूद हैं। हालांकि मां के साथ चलने की जगह वो मां के पीछे-पीछे छुपने की कोशिश करती दिखीं। उनके इसी शर्मीले और मासूमियत से भरे व्यवहार ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्लेन से उतरते ही वह मीडिया और कैमरों की नजर में आ गईं।<br />वायरल वीडियो में जिनेव्रा अपनी मां का हाथ पकड़े हुए नीचे उतरती हैं और जब मेलोनी का स्वागत किया जा रहा होता है, तब भी वह अपनी मां के पीछे छुपी होती है और लोगों से दूर रहने की कोशिश करतीं है। खास बात ये है कि इस दौरान जिनेव्रा ने आम बच्चों की तरह ही अपनी मम्मी का हाथ थामे रखा।<br />पीएम मेलोनी का एयरपोर्ट पर औपचारिक स्वागत किए जाने के बाद अधिकारियों ने उनकी बेटी जिनेव्रा को गिफ्ट दिया। उस दौरान भी जिनेव्रा का शर्मीला व्यवहार लोगों को बहुत पसंद आया। हालांकि गिफ्ट मिलने पर उनकी खुशी देखने लायक थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>जी7 का सदस्य न होने पर भी भारत होता है खास मेहमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : जी7 भले ही दुनिया की सबसे अमीर और विकसित अर्थव्यवस्थाओं का ग्रुप हो, लेकिन जब भी इसके नेता दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं तो भारत वहां मौजूद होता है। जी7 में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। इसका सदस्य न होने के बावजूद भारत को अक्सर खास मेहमान के तौर पर बुलाया जाता है, जो यह दिखाता है कि ये ग्रुप नई दिल्ली की आवाज को कितनी अहमियत देता है।<br />ग्लोबल इकॉनमी और क्लाइमेट चेंज से लेकर सुरक्षा और कूटनीति तक भारत की भूमिका इतनी बढ़ गई है कि अब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/india-is-a-special-guest-even-though-it-is-not/article-3152"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-18-at-3.34.56-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : जी7 भले ही दुनिया की सबसे अमीर और विकसित अर्थव्यवस्थाओं का ग्रुप हो, लेकिन जब भी इसके नेता दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं तो भारत वहां मौजूद होता है। जी7 में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। इसका सदस्य न होने के बावजूद भारत को अक्सर खास मेहमान के तौर पर बुलाया जाता है, जो यह दिखाता है कि ये ग्रुप नई दिल्ली की आवाज को कितनी अहमियत देता है।<br />ग्लोबल इकॉनमी और क्लाइमेट चेंज से लेकर सुरक्षा और कूटनीति तक भारत की भूमिका इतनी बढ़ गई है कि अब इसके शामिल हुए बिना बड़े अंतर्राष्ट्रीय फैसले लेना लगभग मुश्किल हो गया है। बता दें कि दशकों तक ग्लोबल संस्थाओं पर अधिकतर अमीर पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है। इसी कारण एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के कई विकासशील देशों को लगता रहा है कि उनकी चिंताओं पर कभी विचार विमर्श नहीं किया गया। <br />भारत इन देशों की आवाज उठाने वाले सबसे मजबूत देशों में से एक बनकर उभरा है। बढ़ते प्रभाव और कूटनीतिक पहुंच के साथ नई दिल्ली ने विकसित अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील दुनिया के बीच एक पुल के तौर पर अपनी जगह बनाई है। जी7 के लिए भारत के साथ जुड़ना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि किसी भी वैश्विक नीति की सफलता के लिए उसे व्यापक स्तर पर स्वीकार किया जाना जरूरी है, खासकर पश्चिमी गुट से बाहर के देशों में।<br />इन सबके अलावा भारत की आर्थिक तरक्की ने दुनिया की बड़ी ताकतों के लिए इसे नजरअंदाज करना नामुमकिन कर दिया है। 140 करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला भारत दुनिया के सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट में से एक है। भारत की बढ़ती डिजिटल इकॉनमी, मैन्युफैक्चरिंग पर जोर और टेक्नोलॉजी सेक्टर ने इसे ग्लोबल ग्रोथ प्लान का एक अहम हिस्सा बना दिया है।<br />दुनियाभर की कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए कुछ ही देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं तो ऐसे में जी7 के लिए भारत एक अहम आर्थिक पार्टनर बन गया है। भारत के साथ सहयोग सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि ये ग्लोबल आर्थिक स्थिरता के बारे में भी है।<br />भारत की बढ़ती अहमियत के पीछे एक बड़ा कारण इंडो-पैसिफिक में उसकी रणनीतिक स्थिति भी है। चीन का बढ़ता हुआ सैन्य और आर्थिक प्रभाव जी7 के कई देशों के लिए चिंता का सबब बन गया है। अपने आकार, सैन्य क्षमता और भौगोलिक स्थिति के कारण, भारत को इस क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बनाए रखने में एक अहम साझेदार के तौर पर देखा जाता है। भले ही दुनिया के तमाम नेता खुलकर इस बारे में बात न करें, लेकिन एशिया में एक मजबूत रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिशों में भारत की साझेदारी अहम हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:28:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>जी7 देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के न्योते पर फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हो रहे 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। वे जी7 देशों और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ मिलकर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसी अहम वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे के बीच, सबकी नज़रें बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मोदी की होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं, जिसमें दोनों नेताओं के बीच व्यापार, वीज़ा, ऊर्जा सहयोग और व्यापक रणनीतिक संबंधों पर चर्चा होने की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/pm-modi-arrives-to-participate-in-the-conference-of-g7/article-3140"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-16-at-4.44.33-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के न्योते पर फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हो रहे 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। वे जी7 देशों और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ मिलकर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसी अहम वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे के बीच, सबकी नज़रें बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मोदी की होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं, जिसमें दोनों नेताओं के बीच व्यापार, वीज़ा, ऊर्जा सहयोग और व्यापक रणनीतिक संबंधों पर चर्चा होने की उम्मीद है। <br />प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी7 समिट में शामिल होने के लिए फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स पहुंचे। बैठक से पहले उन्होंने कहा दुनिया के नेताओं से बातचीत करने और अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का बेसब्री से इंतज़ार है। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। जी7 समिट के लिए फ्रांस के एवियन पहुंचा। दुनिया के नेताओं से बातचीत करने और अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का बेसब्री से इंतज़ार है। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 16:10:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू धार्मिक परिसर को लेकर विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन के गाइबांधा जिले में स्थित एक प्रमुख हिंदू धार्मिक परिसर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ कट्टरपंथी समूह परिसर में स्थापित राम, कृष्ण और शिव की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने तथा परिसर के विस्तार का विरोध कर रहे हैं। इन दावों के बाद क्षेत्र के हिंदू समुदाय और श्रद्धालुओं के बीच चिंता का माहौल है। होसैनपुर यूनियन के रामचंद्रपुर गांव में स्थित यह धार्मिक परिसर पिछले कुछ वर्षों में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/controversy-over-major-hindu-religious-complex-of-bangladesh/article-3122"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-06/1-a-16.jpg" alt=""></a><br /><p>बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन के गाइबांधा जिले में स्थित एक प्रमुख हिंदू धार्मिक परिसर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ कट्टरपंथी समूह परिसर में स्थापित राम, कृष्ण और शिव की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने तथा परिसर के विस्तार का विरोध कर रहे हैं। इन दावों के बाद क्षेत्र के हिंदू समुदाय और श्रद्धालुओं के बीच चिंता का माहौल है। होसैनपुर यूनियन के रामचंद्रपुर गांव में स्थित यह धार्मिक परिसर पिछले कुछ वर्षों में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा है। स्थानीय समाजसेवी हरिदास बाबू की पहल से शुरू हुई यह परियोजना अब एक विशाल धार्मिक परिसर का रूप ले चुकी है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस परिसर की प्रमुख पहचान लगभग 50 फीट ऊंची भगवान कृष्ण की प्रतिमा है, जिसे बांग्लादेश की सबसे ऊंची कृष्ण प्रतिमा बताया जाता है। इसका उद्घाटन नवंबर 2025 में भारत के सहायक उच्चायुक्त मनोज कुमार द्वारा किया गया था। इसके बाद से यह स्थल धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है। मंदिर समिति की दीर्घकालिक योजना के तहत परिसर में भगवान राम, भगवान शिव सहित विभिन्न देवी-देवताओं की कुल 144 प्रतिमाएं स्थापित करने और अन्य धार्मिक संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के समर्थकों का कहना है कि यह बांग्लादेश की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सह-अस्तित्व का प्रतीक है। विवाद के बीच सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी कारण राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मामला केवल एक धार्मिक परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। बांग्लादेश का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में किसी भी धार्मिक स्थल या प्रतीक के खिलाफ हिंसा या तोड़फोड़ की धमकियां प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:20:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जापान के बाद नेपाल ने भी आमों पर लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दुनियाभर में मशहूर भारतीय आम अब विदेशी बाजारों में जांच के घेरे में आ गए हैं। जापान के बाद अब नेपाल ने भी भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक क्वारंटीन जांच के दौरान कुछ खेपों में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सुरक्षा सीमा से ज्यादा पाए गए, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। इससे पहले जापान ने भी 20 साल बाद भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के खाद्य सुरक्षा और क्वारंटीन अधिकारियों का कहना है कि हाल की जांच में कुछ आयातित आमों में कीटनाशक अवशेष अनुमत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/after-japan-now-nepal-has-also-banned-indian-mangoes/article-3105"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-06/image-(8).png" alt=""></a><br /><p>दुनियाभर में मशहूर भारतीय आम अब विदेशी बाजारों में जांच के घेरे में आ गए हैं। जापान के बाद अब नेपाल ने भी भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक क्वारंटीन जांच के दौरान कुछ खेपों में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सुरक्षा सीमा से ज्यादा पाए गए, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। इससे पहले जापान ने भी 20 साल बाद भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के खाद्य सुरक्षा और क्वारंटीन अधिकारियों का कहना है कि हाल की जांच में कुछ आयातित आमों में कीटनाशक अवशेष अनुमत सीमा से ज्यादा पाए गए हैं। इसके चलते अधिकारियों ने सीमा चौकियों पर जांच बढ़ा दी है। सख्ती से मानकों को लागू करने का फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। प्रतिबंध लागू होने से पहले करीब 15.8 मीट्रिक टन आम करीब 10 लाख नेपाली रुपए मूल्य की खेप आधिकारिक सीमा चौकियों के जरिए नेपाल पहुंच चुकी थी। अब नई खेपों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है, जब तक कि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर संतोषजनक स्थिति नहीं बन जाती। नेपाली अधिकारियों ने साफ किया है कि यह फैसला भारत-नेपाल व्यापार संबंधों को प्रभावित करने के उद्देश्य से नहीं लिया गया है। उनके मुताबिक यह एक नियामक कदम है, जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और आयातित फलों की गुणवत्ता की निगरानी करना है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में सभी आयातित फलों की जांच और ज्यादा सख्ती से की जाएगी। नेपाल भारतीय फलों और सब्जियों का एक अहम बाजार है। ऐसे में आमों के आयात पर लगी अस्थायी रोक भारतीय निर्यातकों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन तय हो जाता है तो प्रतिबंध हटाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक अवशिष्ट की अधिकतम सीमा यानी किसी खाद्य उत्पाद में कीटनाशक अवशेषों की अधिकतम स्वीकार्य मात्रा होती है। यदि किसी फल या सब्जी में यह मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई जाती है, तो उसे स्वास्थ्य के लिए संभावित जोखिम माना जा सकता है और संबंधित देश आयात पर रोक या अतिरिक्त जांच लागू कर सकता है। नेपाल के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा आगे की जांच और परीक्षण के बाद ही यह तय होगा कि भारतीय आमों के आयात पर लगी रोक कब तक जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/international/after-japan-now-nepal-has-also-banned-indian-mangoes/article-3105</link>
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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:28:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनर्जी संकट के बीच अंडमान में मिला प्राकृतिक गैस का भंडार! </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: भारत ने अंडमान के तटीय बेसिन में एक और प्राकृतिक गैस की खोज की है, जिससे इस इलाके में खोज की कोशिशों को और बढ़ावा मिला है। यह नई खोज सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने की है। केंद्रीय पेट्रोलियम और नैचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज को सरकार की 'समुद्र मंथन'  पहल के तहत एक और मील का पत्थर बताया।<br />अपने एक्स  हैंडल पर एक पोस्ट में, पुरी ने सरकारी कंपनी को बधाई दी और बताया कि अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर, लगभग 355 मीटर पानी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/natural-gas-reserves-found-in-andaman-amid-energy-crisis/article-3086"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-06-at-3.48.47-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: भारत ने अंडमान के तटीय बेसिन में एक और प्राकृतिक गैस की खोज की है, जिससे इस इलाके में खोज की कोशिशों को और बढ़ावा मिला है। यह नई खोज सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने की है। केंद्रीय पेट्रोलियम और नैचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज को सरकार की 'समुद्र मंथन'  पहल के तहत एक और मील का पत्थर बताया।<br />अपने एक्स  हैंडल पर एक पोस्ट में, पुरी ने सरकारी कंपनी को बधाई दी और बताया कि अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर, लगभग 355 मीटर पानी में ओआईएल द्वारा ड्रिल किए गए श्री विजय पुरम-3 खोजी कुएं में नैचुरल गैस मिली है। उन्होंने बताया कि शुरुआती प्रोडक्शन टेस्ट के दौरान 1,900 मीटर से ज़्यादा गहराई पर इओसीन स्ट्रेटा में लगातार फ्लेयरिंग से नैचुरल गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इस नई खोज ने इस विचार को और मज़बूत किया है कि यह इलाका भारत में तेल और गैस की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण नया क्षेत्र बन सकता है।<br />इसके अलावा, अंडमान बेसिन में ओआईएल के एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम (अन्वेषण कार्यक्रम) के तहत यह दूसरी पक्की हाइड्रोकार्बन खोज है। कंपनी को अब तक ड्रिल किए गए तीन एक्सप्लोरेटरी  (खोजपूर्ण) कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन के निशान मिले हैं। यह खोज इसलिए ज़रूरी है क्योंकि विशेय़ज्ञों का मानना है कि अंडमान-निकोबार बेसिन में बहुत बड़े, बिना इस्तेमाल किए गए रिज़र्व हो सकते हैं। क्योंकि यह म्यांमार, थाईलैंड और इंडोनेशिया के हाइड्रोकार्बन-रिच इलाकों के समान जियोलॉजिकल ज़ोन में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:44:46 +0530</pubDate>
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