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                <title>अंतर्राष्ट्रीय - Gambheer Samachar</title>
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                <title>चीन में बने स्मार्ट वाहन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, </title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>वॉशिंगटन </strong></em>: अमेरिका के दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने चीन से जुड़ी गाड़ियों को कनाडा और मैक्सिको के रास्ते अमेरिका आने से रोकने के लिए बिल पेश किया। उनकी ओर से चेतावनी दी गई कि ये गाड़ियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और अमेरिकी ऑटो उद्योग के लिए भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस बिल से चीन और अन्य विरोधी देशों से आने वाले कनेक्टेड वाहनों को अमेरिका में आने से रोक दिया जाएगा, जिसमें चीन में बने या चीनी कंपनियों की ओर से बनाए गए वाहन भी शामिल हैं। हेली स्टीवंस ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को अमेरिकी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/smart-vehicles-made-in-china-are-a-threat-to-americas/article-3037"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-05/-fs3eegofb1ysll_100102_news.jpg" alt=""></a><br /><p><em><strong>वॉशिंगटन </strong></em>: अमेरिका के दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने चीन से जुड़ी गाड़ियों को कनाडा और मैक्सिको के रास्ते अमेरिका आने से रोकने के लिए बिल पेश किया। उनकी ओर से चेतावनी दी गई कि ये गाड़ियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और अमेरिकी ऑटो उद्योग के लिए भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस बिल से चीन और अन्य विरोधी देशों से आने वाले कनेक्टेड वाहनों को अमेरिका में आने से रोक दिया जाएगा, जिसमें चीन में बने या चीनी कंपनियों की ओर से बनाए गए वाहन भी शामिल हैं। हेली स्टीवंस ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को अमेरिकी ड्राइवरों, सड़कों या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के बारे में संवेदनशील जानकारी तक कभी भी पहुंच नहीं मिलनी चाहिए। यह बिल उन खतरनाक कमियों को दूर करता है, जिनके कारण अभी चीन कनेक्टेड वाहन कनाडा और मैक्सिको के रास्ते अमेरिका में आ पाते हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने और मिशिगन के उन ऑटो-कर्मियों के साथ खड़े होने के बारे में है, जो दुनिया के सबसे बेहतरीन वाहन बनाते हैं। उन्होंने बताया कि मैक्सिको बाजार में अब चीनी वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 15 फीसदी है। उन्होंने कनाडा के जनवरी 2026 के चीन के साथ हुए व्यापार समझौते का भी जिक्र किया, जिसके तहत हजारों चीनी वाहनों पर लगने वाले शुल्क में भारी कमी आएगी। सांसदों ने कहा कि चीन से आने वाले कनेक्टेड वाहनों का खतरा अब उत्तर और दक्षिण तक पहुंच चुका है। स्लॉटकिन ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक मामलों तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों से जुड़ा मुद्दा है। हमें इन वाहनों को अपनी सीमाओं को पार करके हमारे समुदायों में प्रवेश करने से हर हाल में रोकना होगा। उन्होंने कहा कि ये वाहन असल में पहियों पर चलते निगरानी तंत्र हैं। ये किसी भी ड्राइवर की सटीक लोकेशन का पता लगाने, पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग करने और हमारे सैन्य ठिकानों सहित अन्य संवेदनशील बुनियादी ढांचों की मैपिंग करने में पूरी तरह से सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि यह कानून मेरी ओर से पेश किए गए, दोनों दलों के समर्थन वाले कनेक्टेड व्हीकल सिक्योरिटी एक्ट 2026 पर आधारित है। इसके तहत चीन में पूरी तरह से तैयार वाहनों को किसी भी रूप में भले ही वह सिर्फ एक दिन के लिए ही क्यों न हो, अमेरिका में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक यह बिल एक ऐसी प्रक्रिया का भी निर्धारण करेगा, जिसके तहत वाहन निर्माता उन वाहनों के लिए विशेष अनुमति मांग सकेंगे, जिन पर अन्यथा प्रतिबंध लगा होगा। इस तरह की कोई भी अनुमति सख्त शर्तों, पारदर्शिता की आवश्यकताओं और कांग्रेस की निगरानी के अधीन होगी। इसके लिए यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन को कानून लागू होने के 90 दिनों के अंदर इसे लागू करने के तरीके तय करने होंगे और बैन किए गए वाहनों की एक लिस्ट बनानी होगी। दोनों पार्टियों के पॉलिसी बनाने वालों ने लगातार यह चिंता जताई है कि आज के जमाने के वाहन कैमरे, सेंसर और इंटरनेट से जुड़े सिस्टम के जरिए बड़ी मात्रा में डाटा इकट्ठा करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:05:22 +0530</pubDate>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप  की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> :  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की कोशिश हुई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रशिक्षित कमांडर ने इवांका को टारगेट बनाया था। 'न्यूयॉर्क पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक-आईआरजीसी के आतंकी मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी ने इवांका को मारने की कसम खाई थी और उसके पास इवांका के फ्लोरिडा आवास का खाका भी था।<br />रिपोर्ट के अनुसार इराकी नागरिक अल-सादी, ट्रंप परिवार को निशाना बनाकर ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। कासिम सुलेमानी की छह साल पहले बगदाद में अमेरिकी हमले में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/attempt-to-assassinate-donald-trumps-daughter-ivanka-trump/article-3015"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-23-at-1.24.30-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> :  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की कोशिश हुई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रशिक्षित कमांडर ने इवांका को टारगेट बनाया था। 'न्यूयॉर्क पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक-आईआरजीसी के आतंकी मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी ने इवांका को मारने की कसम खाई थी और उसके पास इवांका के फ्लोरिडा आवास का खाका भी था।<br />रिपोर्ट के अनुसार इराकी नागरिक अल-सादी, ट्रंप परिवार को निशाना बनाकर ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। कासिम सुलेमानी की छह साल पहले बगदाद में अमेरिकी हमले में मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि अल-सादी सुलेमानी को अपना गुरु मानता था।<br />वॉशिंगटन स्थित इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची इंतिफाध कनबर ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि सुलेमानी की मौत के बाद अल-सादी लोगों से कहता था-हमें इवांका को मारना होगा ताकि ट्रंप के घर को उसी तरह जलाया जा सके, जैसे उन्होंने हमारा घर जलाया।<br />रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गिरफ्तार आतंकी ने सोशल मीडिया पर फ्लोरिडा स्थित इवांका ट्रंप के घर का नक्शा पोस्ट किया था। उस तस्वीर के साथ एक धमकी भरा संदेश भी लिखा गया था-अमेरिकियों से मैं कहता हूं कि इस तस्वीर को देखो और समझो कि न तुम्हारे महल और न ही सीक्रेट सर्विस तुम्हारी रक्षा कर पाएगी। हम फिलहाल निगरानी और विश्लेषण के चरण में हैं। मैंने कहा था कि हमारा बदला सिर्फ समय की बात है।<br />मोहम्मद अल-सादी को इराक-ईरान आतंकी नेटवर्क का बड़ा चेहरा बताया जा रहा है। उसे 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार अल-सादी पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों और हमले की कोशिशों से जुड़े आरोप लगे हैं।<br />अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि अल-सादी ने अमेरिका और यहूदी ठिकानों को निशाना बनाकर कई हमलों की साजिश रची थी। इनमें मार्च महीने में एम्स्टर्डम स्थित बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलॉन पर पेट्रोल बम हमला, अप्रैल में लंदन में दो यहूदी लोगों पर चाकू से हमला और मार्च में टोरंटो स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी की घटना शामिल है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अल-सादी, कासिम सुलेमानी के काफी करीब था। अपने पिता की मौत के बाद वह सुलेमानी को पिता समान मानने लगा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 15:24:29 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया में चर्चा का विषय बने मोदी और मेलोनी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जिन्हें सोशल मीडिया पर लोग प्यार से “मेलोडी” के नाम से भी बुलाते हैं, इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात के जो वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, वे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। दुनिया भर के अनेक टेलिवीजन चैनलों पर भी इन मुलाकातों और दोनों नेताओं की अनौपचारिक बातचीत की चर्चा लगातार की जा रही है। इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर “मेलोडी” से जुड़े फोटो और वीडियो पर तरह तरह के रील्स और मीम्स बनाए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/modi-and-meloni-became-the-topic-of-discussion-in-the/article-2980"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-20-at-2.29.00-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जिन्हें सोशल मीडिया पर लोग प्यार से “मेलोडी” के नाम से भी बुलाते हैं, इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात के जो वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, वे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। दुनिया भर के अनेक टेलिवीजन चैनलों पर भी इन मुलाकातों और दोनों नेताओं की अनौपचारिक बातचीत की चर्चा लगातार की जा रही है। इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर “मेलोडी” से जुड़े फोटो और वीडियो पर तरह तरह के रील्स और मीम्स बनाए जा रहे हैं, जिन्हें लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इतना ही नहीं, दोनों नेताओं द्वारा अपने सोशल मीडिया खातों पर साझा की गई तस्वीरों और वीडियो पर लाइक और कमेंट की जैसे बाढ़ आ गई है। खासतौर पर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से मेलोनी को उपहार के रूप में दिया गया मेलोडी टॉफी वाला वीडियो खूब साझा किया जा रहा है।<br />इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली पहुंचने पर भारत और इटली के संबंधों को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल देखने को मिली। रोम पहुंचते ही प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री मेलोनी से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने रात्रिभोज के बाद रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा करते हुए विभिन्न वैश्विक तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।<br />प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि रोम पहुंचने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ रात्रिभोज और ऐतिहासिक कोलोसियम भ्रमण का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने अनेक विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा भारत और इटली की मित्रता को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की। वहीं प्रधानमंत्री मेलोनी ने भी मोदी के स्वागत में लिखा, “रोम में स्वागत है मेरे मित्र।”<br />कोलोसियम में दोनों नेताओं की अनौपचारिक बातचीत और रोम की सड़कों पर साथ यात्रा करते दृश्य ने भारत और इटली के बीच बढ़ती निकटता को दर्शाया। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच नई “कार कूटनीति” के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर इटली के प्रसिद्ध चित्रकार जियामपाओलो टोमासेत्ती की भारतीय संस्कृति और वाराणसी से प्रेरित चित्रकृतियों की भी सराहना की। टोमासेत्ती चार दशकों से भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े रहे हैं।<br />रोम पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया। होटल के बाहर भारतीय प्रवासियों ने तिरंगे लहराए, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और प्रधानमंत्री के समर्थन में नारे लगाए। प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों से मुलाकात की, लोगों का अभिवादन स्वीकार किया तथा एक बाल प्रशंसक को हस्ताक्षरित चित्र भी भेंट किया। उन्होंने भारतीय समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि इटली में रहने वाले भारतीय भारत और इटली के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बाइटें।<br />गौरतलब है कि मोदी और मेलोनी ने संयुक्त रूप से एक लेख भी लिखा है, जिसमें भारत और इटली के संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के नए दौर में प्रवेश करने वाला बताया गया है। दोनों नेताओं ने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब केवल मित्रता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्रता, लोकतंत्र और साझा भविष्य की सोच पर आधारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। लेख में कहा गया कि तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत और इटली आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से आगे ले जाने का लक्ष्य रखा है। रक्षा, एयरोस्पेस, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, मशीनरी, दवाइयां, वस्त्र, कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है।<br />प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा कि “मेड इन इटली” और “मेक इन इंडिया” पहल के बीच स्वाभाविक तालमेल दोनों देशों की औद्योगिक क्षमताओं को नई दिशा देगा। इटली की डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, इंजीनियरिंग प्रतिभा और नवाचार आधारित उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने कहा कि यह केवल दो अर्थव्यवस्थाओं का मेल नहीं, बल्कि साझा मूल्य निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है।<br />तकनीकी सहयोग को साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए दोनों नेताओं ने कृत्रिम मेधा, क्वांटम कंप्यूटिंग, डिजिटल अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल क्षमता और इटली की नैतिक तथा औद्योगिक विशेषज्ञता मिलकर मानव केंद्रित तकनीकी विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि कृत्रिम मेधा का उपयोग मानव कल्याण और समावेशी विकास के लिए होना चाहिए, न कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए।<br />दोनों नेताओं ने अंतरिक्ष, रक्षा, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। आतंकवाद, मानव तस्करी, साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर जोर दिया गया। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य को भविष्य की आवश्यकता बताया गया।<br />भारत और इटली ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे को वैश्विक संपर्क और व्यापार का नया माध्यम बताते हुए इसे आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। दोनों नेताओं ने कहा है कि हिंद महासागर और भूमध्यसागरीय क्षेत्र अब परस्पर जुड़े आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” और इटली की मानवतावादी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी का उद्देश्य लोगों को केंद्र में रखकर भविष्य उन्मुख वैश्विक व्यवस्था तैयार करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:36:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान का दावा- सामान ले जा रही नौकाओं को अमेरिका ने बनाया निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><em><strong> ईरान </strong></em>: पश्चिम एशिया में 18 दिन के सीजफायर के बाद तनाव फिर बढ़ गया है। यूएई में ईरानी ड्रोन अटैक, बहरीन में रेड अलर्ट और होर्मुज संकट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरानी मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ओर सामान ले जा रही दो नागरिक नौकाओं को निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि ये आईआरजीसी की स्पीडबोट्स नहीं बल्कि आम मालवाहक नौकाएं थीं, जिनमें सवार पांच आम नागरिकों की मौत हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने इन दावों पर चुप्पी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/iran-claims-america-targeted-boats-carrying-goods-5-killed/article-2942"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-05/image-(11).png" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><em><strong> ईरान </strong></em>: पश्चिम एशिया में 18 दिन के सीजफायर के बाद तनाव फिर बढ़ गया है। यूएई में ईरानी ड्रोन अटैक, बहरीन में रेड अलर्ट और होर्मुज संकट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरानी मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ओर सामान ले जा रही दो नागरिक नौकाओं को निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि ये आईआरजीसी की स्पीडबोट्स नहीं बल्कि आम मालवाहक नौकाएं थीं, जिनमें सवार पांच आम नागरिकों की मौत हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने इन दावों पर चुप्पी साधते हुए होर्मुज के जरिए वाणिज्यिक जहाजों को निकालने का अभियान तेज कर दिया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक दो अमेरिकी फ्लैग वाले जहाजों ने सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार कर लिया है। अमेरिका ने ईरान के उस दावे को भी खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उसने एक अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हमला किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है। बहरीन ने सोमवार रात नेशनल इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने सोमवार को बताया कि एक ईरानी ड्रोन ने फुजैराह स्थित तेल सुविधा केंद्र में आग लगा दी। यह केंद्र होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने वाला एक अहम पाइपलाइन हब है। इसके तुरंत बाद ब्रिटिश सेना ने भी अमीरात तट के पास एक मालवाहक जहाज में आग लगने की जानकारी दी। इन हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में 6 फीसदी का भारी उछाल आया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन हमलों में हाथ होने से साफ इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका और यूएई को इस दलदल में वापस आने से बचना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सियासी संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और इसे सिर्फ कूटनीति से सुलझाया जा सकता है। अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- होर्मुज़ में हुई घटनाओं से यह साफ़ हो जाता है कि किसी भी राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं होता। पाकिस्तान की कोशिशों से बातचीत आगे बढ़ रही है, इसलिए अमेरिका को इस बात से सावधान रहना चाहिए कि कहीं कुछ दुर्भावना रखने वाले लोग उसे फिर से दलदल में न घसीट लें। उन्होंने कहा कि यूएई को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए। प्रोजेक्ट फ़्रीडम असल में प्रोजेक्ट डेडलॉक है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने होर्मुज के जरिए जहाजों को ले जा रहे अमेरिकी जहाजों पर हमला किया तो उसे मिटा दिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान ने दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज पर भी हमला किया है। इस बीच अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका, बहरीन और खाड़ी सहयोगियों के साथ मिलकर एक सुरक्षा परिषद प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिससे जलमार्ग को बाधित करने के लिए ईरान की जवाबदेही तय की जा सके। जर्मनी के चांसलर मैर्ज ने भी ईरान से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 16:26:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोवा के मुख्यमंत्री 1 मई को  श्रमिकों को 'श्रमिक मित्र' पुरस्कार से सम्मानित करेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 मई 1886 को शिकागो में 8 घंटे काम की मांग को लेकर हुए आंदोलन के बाद, 1889 से यह दिन श्रमिकों के अधिकारों को समर्पित किया गया।</p>
<p>यह दिन मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, बंगाल, केरल और असम जैसे राज्यों में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p><span>1 मई 2026 को भारत में </span><span>अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस</span> (Labour Day) मनाया जाएगा, जिसे 'मई दिवस' भी कहते हैं। इस वर्ष, गोवा के मुख्यमंत्री 1 मई को लोक भवन, पणजी में विशेष समारोह में 20 औद्योगिक श्रमिकों को 'श्रमिक मित्र' पुरस्कार से सम्मानित करेंगे, जो राज्य के विकास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/international-labor-day/article-2917"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/image-(9)2.png" alt=""></a><br /><p>1 मई 1886 को शिकागो में 8 घंटे काम की मांग को लेकर हुए आंदोलन के बाद, 1889 से यह दिन श्रमिकों के अधिकारों को समर्पित किया गया।</p>
<p>यह दिन मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, बंगाल, केरल और असम जैसे राज्यों में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p><span>1 मई 2026 को भारत में </span><span>अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस</span> (Labour Day) मनाया जाएगा, जिसे 'मई दिवस' भी कहते हैं। इस वर्ष, गोवा के मुख्यमंत्री 1 मई को लोक भवन, पणजी में विशेष समारोह में 20 औद्योगिक श्रमिकों को 'श्रमिक मित्र' पुरस्कार से सम्मानित करेंगे, जो राज्य के विकास में उनके योगदान को मान्यता देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/international/international-labor-day/article-2917</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो ट्रेनों की टक्कर में 14 की मौत, 2 दर्जन घायल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>जकार्ता </strong></em>: इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के निकट बेकासी तिमुर स्टेशन पर सोमवार को एक हृदयविदारक रेल दुर्घटना सामने आई है, जिसमें दो ट्रेनों की आपस में जोरदार टक्कर हो गई। इस भीषण हादसे में कम से कम 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 2 दर्जन यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक ट्रेन का डिब्बा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री घंटों तक मलबे के भीतर फंसे रहे। घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंच गया और युद्धस्तर पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/horrific-train-accident-in-indonesia-14-killed-2-dozen-injured/article-2909"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><em><strong>जकार्ता </strong></em>: इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के निकट बेकासी तिमुर स्टेशन पर सोमवार को एक हृदयविदारक रेल दुर्घटना सामने आई है, जिसमें दो ट्रेनों की आपस में जोरदार टक्कर हो गई। इस भीषण हादसे में कम से कम 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 2 दर्जन यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक ट्रेन का डिब्बा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री घंटों तक मलबे के भीतर फंसे रहे। घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंच गया और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।</p>
<p><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-04/download-(3).jpg" alt="download (3)" width="300" height="168"></img></p>
<p>शुरुआती जांच में पता चला है कि यह हादसा उस समय हुआ जब आर्गो ब्रोमो एंग्रैक नामक लंबी दूरी की ट्रेन ने स्टेशन पर पहले से खड़ी एक कम्यूटर ट्रेन के आखिरी डिब्बे को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। विशेष रूप से, जिस डिब्बे में टक्कर हुई वह महिलाओं के लिए आरक्षित था, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से अलग रखा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर के बाद स्टेशन परिसर में चीख-पुकार मच गई और हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। राज्य द्वारा संचालित रेलवे कंपनी पीटी केरेता आपी इंडोनेशिया ने अब तक 38 घायलों को अस्पताल पहुंचाए जाने की पुष्टि की है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है।</p>
<p><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-04/download-(2).jpg" alt="download (2)" width="275" height="183"></img></p>
<p>गनीमत यह रही कि आर्गो ब्रोमो एंग्रैक ट्रेन में सवार सभी 240 यात्री सुरक्षित हैं। पुलिस प्रमुख ने बताया कि हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद सरकारी रेलवे कंपनी ने सार्वजनिक रूप से ग्राहकों से माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्टेशन पर बदहवास यात्रियों और अपनों की तलाश में जुटे लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। इंडोनेशिया में पुरानी रेल नेटवर्क प्रणाली और तकनीकी कमियों के कारण इस तरह के हादसे सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। इससे पहले भी देश में कई बड़े रेल हादसे हो चुके हैं, जिनमें जनवरी 2024 और 2010 की घटनाएं प्रमुख हैं। यह ताजा हादसा एक बार फिर इंडोनेशियाई रेल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और सुरक्षा मानकों में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। वर्तमान में बचाव दल मलबे में फंसे अंतिम कुछ यात्रियों को निकालने का प्रयास कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस-यूक्रेन युद्ध फिर अत्यंत विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रूस-यूक्रेन युद्ध फिर अत्यंत विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। रूस ने यूक्रेन के विभिन्न शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों की भीषण बारिश कर दी है। इस ताजा हमले में कम से कम 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है, जबकि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यूक्रेन की वायुसेना द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रूस ने पिछले 24 घंटों के भीतर रिकॉर्ड 659 ड्रोन और 44 मिसाइलें दागीं। यह हमला मुख्य रूप से नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किया गया। कीव, खारकीव, ओडेसा, ड्निप्रो और जापोरिज्जिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/russia-ukraine-war-again-reaches-extremely-destructive-turn/article-2875"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/images.jpg" alt=""></a><br /><p>रूस-यूक्रेन युद्ध फिर अत्यंत विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। रूस ने यूक्रेन के विभिन्न शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों की भीषण बारिश कर दी है। इस ताजा हमले में कम से कम 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है, जबकि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यूक्रेन की वायुसेना द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रूस ने पिछले 24 घंटों के भीतर रिकॉर्ड 659 ड्रोन और 44 मिसाइलें दागीं। यह हमला मुख्य रूप से नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किया गया। कीव, खारकीव, ओडेसा, ड्निप्रो और जापोरिज्जिया जैसे प्रमुख शहर इस गोलाबारी से बुरी तरह दहल उठे। ओडेसा में नेशनल म्यूजिक अकादमी के हॉस्टल पर हमला होने से वहां रह रहे छात्रों में हड़कंप मच गया; पांच छात्र घायल हुए जिन्हें रात के समय सुरक्षित बाहर निकाला गया। ड्निप्रो में तीन और जापोरिज्जिया में एक व्यक्ति की जान जाने की पुष्टि हुई है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबीहा ने इस हमले को आतंकी कार्रवाई करार देते हुए कहा कि रूस जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बना रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को संदेश देते हुए कहा कि रूस केवल जंग के रास्ते पर चल रहा है और यह विनाशकारी रात साबित करती है कि रूस पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए। यह हमला उस समय हुआ है जब ईस्टर के अवसर पर घोषित किया गया 32 घंटे का युद्धविराम कुछ ही देर में टूट गया। इस भीषण गोलाबारी ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्धविराम की कोशिशें फिलहाल विफल साबित हो रही हैं। इसी बीच, जेलेंस्की अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए इटली के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। इस हमले के बाद अब पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:55:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजफायर के बाद भारतीय नागरिकों को ईरान छोड़ने की एडवाइजरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : ईरान में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय दूतावास, तेहरान ने बुधवार को नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी की। इसमें ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को जल्दी से जल्दी देश छोड़ने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही दूतावास ने आपातकालीन और समन्वय के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।</p>
<p>दूतावास की एडवाइजरी में कहा गया है-7 अप्रैल 2026 की एडवाइजरी के संदर्भ में और हाल की घटनाओं को देखते हुए, ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को दूतावास के मार्गदर्शन और सुझाए गए मार्गों का पालन करते हुए जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सख्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/indian-citizens-advised-to-leave-iran-after-ceasefire/article-2816"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/img-20260408-wa0004.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : ईरान में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय दूतावास, तेहरान ने बुधवार को नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी की। इसमें ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को जल्दी से जल्दी देश छोड़ने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही दूतावास ने आपातकालीन और समन्वय के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।</p>
<p>दूतावास की एडवाइजरी में कहा गया है-7 अप्रैल 2026 की एडवाइजरी के संदर्भ में और हाल की घटनाओं को देखते हुए, ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को दूतावास के मार्गदर्शन और सुझाए गए मार्गों का पालन करते हुए जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सख्त सलाह दी जाती है। इसके अलावा एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बिना दूतावास से पूर्व परामर्श किए जाने का कोई प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p>इससे एक दिन पहले भारतीय दूतावास ने नागरिकों को पहले भी एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि “ईरान में मौजूद भारतीय नागरिक अगले 48 घंटों तक अपने ठिकानों पर ही रहें। इस दौरान वे बिजली के उपकरणों, सैन्य प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों से दूर रहें। घर के अंदर ही रहें और राजमार्ग पर किसी भी तरह की यात्रा केवल दूतावास के सख्त निर्देश और समन्वय से ही करें।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद की निर्धारित की हुई समय-सीमा खत्म होने से करीब 90 मिनट पहले घोषणा की कि अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति जताई है। ट्रंप ने मंगलवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) ट्रुथ सोशल पर यह घोषणा की। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ईरानी सभ्यता को खत्म करने की ट्रंप की धमकी को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा-पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बातचीत कर अनुरोध किया कि मैं आज रात ईरान के खिलाफ होने वाली विनाशकारी कार्रवाई को रोक दूं लेकिन इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने पर सहमत हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 18:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी के मेयर पद की दौड़ में शामिल भारत की बेटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय मूल के लोगों का वैश्विक राजनीति में बढ़ता प्रभाव अब किसी से छिपा नहीं है. इसी कड़ी में अब एक नया नाम चर्चा में है रिनी संपत का. तमिलनाडु के छोटे से शहर थेनी में जन्मी यह युवा प्रोफेशनल आज अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी के मेयर पद की दौड़ में शामिल हो गई हैं. 31 साल की रिनी प्राइमरी बैलेट पर जगह बनाने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बनी हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ रहीं रिनी ने जीत के लिए एक सुपर प्लान बनाया है.</p>
<p>भारतीय मूल की रिनी संपत वाशिंगटन डीसी मेयर पद के चुनाव में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/involved-in-the-race-for-the-post-of-mayor-of/article-2801"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-04/image-(7).png" alt=""></a><br /><p>भारतीय मूल के लोगों का वैश्विक राजनीति में बढ़ता प्रभाव अब किसी से छिपा नहीं है. इसी कड़ी में अब एक नया नाम चर्चा में है रिनी संपत का. तमिलनाडु के छोटे से शहर थेनी में जन्मी यह युवा प्रोफेशनल आज अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी के मेयर पद की दौड़ में शामिल हो गई हैं. 31 साल की रिनी प्राइमरी बैलेट पर जगह बनाने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बनी हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ रहीं रिनी ने जीत के लिए एक सुपर प्लान बनाया है.</p>
<p>भारतीय मूल की रिनी संपत वाशिंगटन डीसी मेयर पद के चुनाव में लड़ रही हैं. रिनी संपत ने अपनी चुनावी वेबसाइट किए गए पोस्ट में कहा कि मैं कोई राजनेता नहीं हूं.</p>
<p>टेक्नोलॉजी से लेकर सत्ता के गलियारों तक, हर जगह भारतीय नाम तेजी से उभर रहे हैं. यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि उस बदलती दुनिया की कहानी है जहां भारतीय मूल के लोग न सिर्फ भागीदारी कर रहे हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभा रहे हैं. रिनी संपत का यह सफर इस बात का संकेत है.</p>
<p>मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार 31 साल की रिनी संपत डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ी हैं और वाशिंगटन डीसी मेयर चुनाव के प्राइमरी बैलेट में जगह बनाने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन चुकी हैं. उनका चुनावी नारा ‘Fix the Basics’ है. इसमें शहर की मूलभूत समस्याओं को हल करने का वादा किया गया है. </p>
<p>7 साल की उम्र में रिनी तमिलनाडु से अमेरिका चली गई थीं. उन्हें वाशिंगटन DC में रहते हुए एक दशक से भी ज्यादा समय हो गया है. अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में मेयर का चुनाव हो रहा है. ये चुनाव भारत के लिहाज से खास है, क्योंकि इस बार के चुनाव में भारतीय मूल की महिला रिनी संपत महिला चुनाव लड़ रही हैं. रिना का जन्म तमिलनाडु में हुआ है.</p>
<p>सबसे खास बात ये है कि रिनी प्राइमरी चुनाव के बैलेट पेपर पर जगह बनाने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन गई हैं. भारतीय महिला रिनी डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं. इनकी उम्र 31 साल है और ये सरकारी कॉन्ट्रैक्टर हैं. रिनी ने अपनी चुनावी अभियान के लिए बुनियादी चीजों को आधार बनाया है. उन्होंने चुनावी थीम <strong>‘बुनियादी चीजों को ठीक करो’</strong> <strong>(Fix the Basics)</strong> बनाया है.</p>
<p>वाशिंगटन DC में डेमोक्रेट्स का दबदबा जबरदस्त है. 1975 में इस पद के लिए चुनाव शुरू होने के बाद से शहर में कभी कोई रिपब्लिकन मेयर नहीं बना है.</p>
<p>रिनी संपत यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया (USC) से कम्युनिकेशन में डिग्री हासिल की. छात्र राजनीति में भी वह काफी सक्रिय रहीं और 2015 में अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट गवर्नमेंट की अध्यक्ष बनीं. उन्होंने नस्लवाद, छात्र अधिकार और कैंपस सुरक्षा जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. </p>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:40:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्री शांति योजना भेजी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के 26वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्री शांति योजना भेज दी है। इस प्लान का मकसद जंग को जल्द खत्म करना, हॉर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रोक लगाना है।<br />ट्रंप ने कहा कि पिछले दो दिनों में 'बहुत अच्छी और उपयोगी' बातचीत हुई है। उन्होंने ईरान पर पावर प्लांट पर हमला 5 दिन के लिए टाल दिया है ताकि 15 सूत्री समझौते पर आगे चर्चा हो सके। प्लान पाकिस्तान के जरिए ईरान को भेजा गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/donald-trump-sent-15-point-peace-plan-to-iran/article-2747"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/whatsapp-image-2026-03-25-at-3.20.57-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के 26वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्री शांति योजना भेज दी है। इस प्लान का मकसद जंग को जल्द खत्म करना, हॉर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रोक लगाना है।<br />ट्रंप ने कहा कि पिछले दो दिनों में 'बहुत अच्छी और उपयोगी' बातचीत हुई है। उन्होंने ईरान पर पावर प्लांट पर हमला 5 दिन के लिए टाल दिया है ताकि 15 सूत्री समझौते पर आगे चर्चा हो सके। प्लान पाकिस्तान के जरिए ईरान को भेजा गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद बातचीत होस्ट करने की पेशकश की है और ट्रंप ने उनकी पोस्ट को रीशेयर भी किया।<br />ट्रंप के 15 सूत्री प्लान की मुख्य बातें <br />1.    1 महीने का तुरंत सीजफायर: दोनों तरफ से हमले तुरंत बंद हों, ताकि बातचीत हो सके।<br />2.    परमाणु हथियार कभी नहीं: ईरान लिखित गारंटी दे कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।<br />3.    सभी परमाणु क्षमताएं खत्म: ईरान की मौजूदा परमाणु सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट या डिसेबल करना।<br />4.    यूरेनियम स्टॉक बाहर भेजना: ईरान में संवर्धित यूरेनियम का पूरा स्टॉक देश से बाहर (अमेरिका या तीसरे देश) भेजना होगा।<br />5.    यूरेनियम संवर्धन बंद: ईरानी धरती पर किसी भी स्तर का यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना।<br />6.    फ्यूल सुविधा ईरान के बाहर: अगर सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाना हो तो फ्यूल बनाने की सुविधा ईरान के बाहर रहेगी और यूएन  की निगरानी में होगी।<br />7.    बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम खत्म: ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों और संबंधित मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करना।<br />8.    प्रॉक्सी ग्रुप्स को सपोर्ट बंद: हिजबुल्लाह, हमास समेत सभी प्रॉक्सी गुटों को हथियार और फंडिंग देना बंद करना।<br />9.    इजरायल पर हमले बंद: हिजबुल्लाह समेत किसी भी गुट के जरिए इजरायल पर हमले रोकने की गारंटी।<br />10.    होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलना: गैर-दुश्मन जहाजों के लिए स्ट्रेट पूरी तरह खुला और सुरक्षित रखना। ईरान ट्रांजिट फीस ले सकता है।<br />11.    अमेरिकी और इजरायली जहाजों की सुरक्षा: होर्मुज में अमेरिकी और इजरायली जहाजों को सुरक्षित गुजरने की गारंटी।<br />12.    प्रतिबंधों में आंशिक राहत: कुछ आर्थिक प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं, लेकिन राहत का पैसा सिर्फ मानवीय कामों (दवाइयां, खाद्य सामग्री) के लिए इस्तेमाल हो।<br />13.    यूएन  की निगरानी: पूरे समझौते की निगरानी संयुक्त राष्ट्र या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां करेंगी।<br />14.    आर्थिक सहयोग की संभावना: अगर शर्तें पूरी हों तो ईरान की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए कुछ आर्थिक सहयोग की बात।<br />15.    स्थायी शांति और सत्यापन: लंबे समय तक कोई उल्लंघन न हो, इसके लिए सख्त सत्यापन तंत्र बने।<br />ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने तेल और गैस से जुड़ा 'बहुत बड़ा तोहफा' दिया है। बातचीत में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर शामिल हो सकते हैं।<br />ईरान ने कोई सीधी बातचीत होने से इनकार किया है। तेहरान ने अपनी निम्न मांगें दोहराई हैं...<br />•    अमेरिका के सभी गल्फ बेस बंद हों<br />•    सभी प्रतिबंध हटाएं जाएं<br />•    युद्ध का पूरा नुकसान भरपाई हो<br />•    इजरायल हिजबुल्लाह पर हमले बंद करे<br />•    होर्मुज पर ईरान का पूरा नियंत्रण रहे.<br />ईरान ने कहा कि ट्रंप ने पहले दो बार धोखा दिया, तीसरी बार नहीं फंसेंगे।<br />इजरायली अधिकारी ट्रंप के सीजफायर प्लान से चौंक गए हैं। वे ट्रंप से जंग जारी रखने की अपील कर रहे थे। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने आज ही कहा कि सेना लिटानी नदी तक दक्षिणी लेबनान पर कब्जा करेगी और वहां 'आतंकवाद वाले इलाके' में कोई घर या नागरिक नहीं रहेंगे।<br />•    हिजबुल्लाह ने हाइफा और नाहारिया पर 30 से ज्यादा रॉकेट दागे, एक महिला की मौत।<br />•    ईरान ने इजरायल की एयरोस्पेस फैक्टरियों पर ड्रोन हमले किए।<br />•    इजरायल ने शिराज एयरपोर्ट समेत ईरानी ठिकानों पर हमले जारी रखे।<br />•    बहरीन में अमेरिकी बेस पर फिर धमाके।<br />•    अमेरिका ने क्षेत्र में 3000 से ज्यादा अतिरिक्त सैनिक भेजे।<br />होर्मुज में तनाव के बावजूद ट्रंप के प्लान की खबर से तेल की कीमतें थोड़ी घटीं, लेकिन अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। रिलायंस ने ईरान से 5 मिलियन बैरल क्रूड खरीदा है, जो 30 दिन की अमेरिकी छूट का फायदा उठाते हुए हुआ। वहीं, प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  ने ट्रंप से फोन पर बात की और इलाके में शांति तथा हॉर्मुज को खुला-सुरक्षित रखने की अपील की है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 18:06:31 +0530</pubDate>
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                <title> टोंगा द्वीप समूह के पास भूकंप</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>नुकुअलोफा</strong></em> : दक्षिण प्रशांत महासागर स्थित टोंगा द्वीप समूह के पास मंगलवार तड़के 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार यह भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 4:37 बजे आया। भूकंप का केंद्र टोंगा के वावाउ द्वीप समूह में स्थित नेइआफू से लगभग 153 किलोमीटर पश्चिम में बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस भूकंप की गहराई पृथ्वी की सतह से करीब 237 से 238 किलोमीटर के बीच थी, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से गहरा भूकंप माना जाता है। इतनी अधिक गहराई पर आने वाले भूकंप सामान्यतः सतह पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/near-the-tonga-islands/article-2733"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/1200-675-23271489-thumbnail-16x9-akajkajk.jpg" alt=""></a><br /><p><em><strong>नुकुअलोफा</strong></em> : दक्षिण प्रशांत महासागर स्थित टोंगा द्वीप समूह के पास मंगलवार तड़के 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार यह भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 4:37 बजे आया। भूकंप का केंद्र टोंगा के वावाउ द्वीप समूह में स्थित नेइआफू से लगभग 153 किलोमीटर पश्चिम में बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस भूकंप की गहराई पृथ्वी की सतह से करीब 237 से 238 किलोमीटर के बीच थी, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से गहरा भूकंप माना जाता है। इतनी अधिक गहराई पर आने वाले भूकंप सामान्यतः सतह पर कम विनाशकारी प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई सूचना सामने नहीं आई है। भूकंप के झटकों के बाद संभावित खतरे को देखते हुए प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (पीटीडब्ल्यूसी) ने स्थिति का आकलन किया। केंद्र ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है, क्योंकि इसका केंद्र धरती के भीतर काफी गहराई में था। आमतौर पर उथले भूकंप ही समुद्र में बड़े स्तर पर हलचल पैदा कर सुनामी का कारण बनते हैं। एक दिन पहले हिहिफो में आया था भूकंप गौरतलब है कि इस घटना से एक दिन पहले भी टोंगा के हिहिफो क्षेत्र के पास 6.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। हालांकि उस भूकंप से भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई थी। लगातार आ रहे भूकंपों के कारण स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल जरूर बना हुआ है। वहीं, भूकंपीय गतिविधियों का असर अन्य क्षेत्रों में भी देखा गया। नेपाल में सोमवार को 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिनका केंद्र सुदूरपश्चिम प्रांत के बजहांग जिले के पास था। आसपास के इलाकों में भी लोगों ने हल्के झटके महसूस किए, हालांकि वहां भी किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/international/near-the-tonga-islands/article-2733</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:29:29 +0530</pubDate>
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                <title>प्रकृति की नन्ही दूत है चिड़िया - विश्व गौरैया दिवस पर विशेष</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>विश्व गौरैया दिवस नन्ही घरेलू गौरैया और अन्य पक्षियों को समर्पित है। गौरैया की संख्या में हो रही तीव्र गिरावट के बारे में जागरूकता पैदा करने और लोगों को इन परिचित पक्षियों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु यह दिवस प्रतिवर्ष 20 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनके लिए हमारे आस पास का माहौल बेहतर करना है। विश्व गौरैया दिवस 2026 एक बार फिर दुनिया को याद दिलाएगा कि आम पक्षियों को भी देखभाल और ध्यान की आवश्यकता है। कभी उपेक्षित समझी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/bird-is-the-little-messenger-of-nature/article-2712"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-03/sparrow.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>विश्व गौरैया दिवस नन्ही घरेलू गौरैया और अन्य पक्षियों को समर्पित है। गौरैया की संख्या में हो रही तीव्र गिरावट के बारे में जागरूकता पैदा करने और लोगों को इन परिचित पक्षियों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु यह दिवस प्रतिवर्ष 20 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनके लिए हमारे आस पास का माहौल बेहतर करना है। विश्व गौरैया दिवस 2026 एक बार फिर दुनिया को याद दिलाएगा कि आम पक्षियों को भी देखभाल और ध्यान की आवश्यकता है। कभी उपेक्षित समझी जाने वाली गौरैया अब कई कस्बों और शहरों से गायब हो रही हैं, जो इस दिन को रोजमर्रा की जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य के प्रति चिंता का प्रतीक बनाती है।</p>
<p>गौरैया मानव इतिहास के सबसे परिचित पक्षियों में से एक हैं। वे घरों, खेतों, बाजारों और शहरी सड़कों के पास पाई जाती हैं। उनकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि किसी क्षेत्र में अभी भी पर्याप्त भोजन, सुरक्षित घोंसले बनाने की जगह और बुनियादी पारिस्थितिक संतुलन मौजूद है। गौरैया की मधुर चहचहाहट कई देशों में सुबह और शाम के जीवन का अभिन्न अंग रही है। गौरैया छोटे, फुर्तीले पक्षी होते हैं जो 4 से 7 इंच तक लम्बे होते हैं। उनके गोल, मोटा शरीर और छोटी मजबूत चोंच होती हैं जो खुले बीजों को तोड़ने के लिए उपयुक्त होती हैं। उनके पंखों पर धारियां या गहरे रंग के धब्बे होते हैं। यह हल्की भूरे रंग या सफेद रंग में होती है। इसके शरीर पर छोटे-छोटे पंख और पीली चोंच व पैरों का रंग पीला होता है।</p>
<p>जब बच्चा कुछ समझने लगता है तो सर्वप्रथम उसको घर के आंगन में सबसे अधिक जो पक्षी देखने को मिलता है वह नन्ही चिड़िया यानी गौरैया होती है। यह चिड़िया बचपन से ही हमारी साथी बन जाती है जो बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है और अपनी मीठी आवाज से उन्हें आकर्षित करती रहती है। गौरैया बच्चों के हाथ से कई बार खाने की वस्तु भी झपटकर ले जाती है। छोटे बच्चे उन्हें पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़ते हैं और वह फुर्र से उड़कर ऊपर बैठ जाती है। गांव देहातों में यह आज भी देखने को मिल जाता है। मगर शहरों में अब ऐसा नजारा शायद ही कहीं देखने को मिलता होगा।</p>
<p>गौरैया मनुष्य के आसपास रहना पसंद करती है। यह लगभग हर तरह की जलवायु पसंद करती है पर पहाड़ी स्थानों में कम दिखाई देती है। शहरों, कस्बों, गांवों, और खेतों के आसपास यह बहुतयात से पाई जाती है। नर गौरैया के सिर का ऊपरी भाग नीचे का भाग और गालों पर पर भूरे रंग का होता है। गला चोंच और आंखों पर काला रंग होता है और पैर भूरे होते है। मादा के सिर और गले पर भूरा रंग नहीं होता है। नर गौरैया को चिड़ा और मादा चिड़ी या चिड़िया भी कहते हैं।</p>
<p>गौरैया पक्षियों के पैसर वंश की एक जीव वैज्ञानिक जाति है जो विश्व के अधिकांश भागों में पाई जाती है। आरम्भ में यह एशिया, यूरोप और भूमध्य सागर के तटवर्ती क्षेत्रों में पाई जाती थी। लेकिन मानवों ने इसे विश्वभर में फैला दिया है। यह मनुष्यों के समीप कई स्थानों में रहती हैं। पिछले कुछ सालों में शहरों में गौरैया की कम होती संख्या पर चिन्ता प्रकट की जा रही है। आधुनिक स्थापत्य की बहुमंजिली इमारतों में गौरैया को रहने के लिए जगह नहीं मिल पाती। कभी बड़ी संख्या में हमारे साथ रहने वाली गौरैया अब धीरे-धीरे बहुत कम होती जा रही है। मगर जीवन की भाग दौड़ में किसी का ध्यान इनकी घाटी संख्या की तरफ नहीं जा रहा है। बच्चों की सबसे नजदीकी मित्र गौरैया जिस तेजी से कम होती जा रही है उससे लगता है आने वाले समय में यह कहीं विलुप्त ना हो जाए। इसलिए हम सबको मिलकर गंभीरता से ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे गौरैया को संरक्षण मिल सके और उनकी संख्या में फिर से बढ़ोतरी प्रारंभ हो सके। </p>
<p>गौरैया चिड़िया को घरेलू चिड़िया भी कहा जाता है। क्योंकि यह घरों के अंदर भी घोसले बनकर रह लेती है। ये मानव और प्रकृति के लिए बहुत उपयोगी है। क्योंकि यह कीड़ों को खाती है जिससे कीड़े पौधों को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। गौरैया एक ऐसी चिड़िया है जो पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी है। इसके अलावा धर्मशास्त्र के मुताबिक गौरैया का आपकी छत पर आना आपके लिए शुभ होता है। जानकारो का कहना हैं कि यह चिड़िया शांति और सदभावना का संदेश लेकर आती है।</p>
<p>आंकड़े बताते हैं कि विश्व भर में घर-आंगन में चहकने-फुदकनेवाली छोटी सी प्यारी चिड़िया गौरैया की आबादी में 60 से 80 फीसदी तक की कमी आई है। ब्रिटेन की ‘रॉयल सोसाइटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स’ ने भारत से लेकर विश्व के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों के आधार पर गौरैया को ‘रेड लिस्ट’ में डाला था। वहीं आंध्र विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक गौरैया की आबादी में करीब 60 फीसदी की कमी आई है। यह कमी ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में हुई है। पश्चिमी देशों में हुए अध्ययनों के अनुसार गौरैया की आबादी घटकर खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। जबकि स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स (एसओआईबी) रिपोर्ट 2023 के मुताबिक पिछले 25 सालों में गौरैया की आबादी कुल मिलाकर काफी स्थिर रही है। हालांकि भारत में हाउस स्पैरो की संख्या कम होने की आम धारणा है। गौरैया के संरक्षण के प्रति जागरूकता को लेकर दिल्ली सरकार ने 2012 और बिहार सरकार ने 2013 से गौरैया को राजकीय पक्षी घोषित कर रखा है।</p>
<p>कभी हमारे घर-आंगन में गिरे अनाज को खाने गौरैया फुर्र से आती थी और दाना चुगकर उड़ जाती थी। हालांकि गांवों में आज भी कई घरों में गौरैया आ रही है। गौरैया की संख्या में कमी के पीछे कई कारण हैं जिन पर लगातार शोध हो रहे हैं। गौरैया की संख्या में कमी के पीछे के कारणों में आहार की कमी, बढ़ता आवासीय संकट, कीटनाशक का व्यापक प्रयोग, जीवन-शैली में बदलाव, प्रदूषण और मोबाइल फोन टावर से निकलने वाले रेडिएशन को दोषी बताया जाता रहा है।</p>
<p>गौरैया की संख्या में कमी के पीछे बेतहाशा कीटनाशक का प्रयोग को माना जा रहा है। गौरैया के प्रजनन के लिए अनुकूल आवास में कमी को भी इसकी संख्या में कमी का एक कारण माना जा रहा है। कच्चे घरों का तेजी से कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होने से शहरों में इनके प्रजनन के लिए अनुकूल आवास नहीं मिलते हैं। यही वजह है कि एक ही शहर के कुछ इलाकों में ये दिखती है तो कुछ में नहीं। गौरैया संरक्षण में जुड़े लोग कृत्रिम घर बनाकर गौरैया को प्रजनन के लिए आवास देने की पहल चला रहे हैं। इसमें गौरैया अंडे देने के लिए आ भी रही हैं।</p>
<p>जहां तक गौरैया का सवाल है यह इन्सानों की दोस्त तथा किसानों की मददगार है। गौरैया इन्सान के साथ रहते हुए उन्हें सुख-शांति प्रदान करती हैं। बच्चों का बचपन इसके साथ खेलते हुए गुजरता है। लेकिन हम इन्सानो ने ही इसे अपने से दूर कर दिया है। भारत में पक्षियों की कुल मिलाकर 1250 प्रजातियां हैं। जिनमें से 85 प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। जिसमें गौरैया का भी नाम शामिल है। गौरैया का सुरक्षित रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह खेतों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खा लेती है। जिससे किसान की फसल खराब होने से बच जाती हैं। गौरैया अपना घौंसला इंसानों के करीब बनाती है। इससे उनके घौंसले उजाड़ दिए जाते हैं। बढ़ता वायु प्रदूषण भी इन पक्षियों के लिए मुसीबत है। इसलिए जरूरी है कि हम अभी से यह समझने की कोशिश करें कि छोटी सी गौरैया हमारे जीवन के लिए कितनी अहम है। ऐसे में उसकी रक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p>आलेखः-</p>
<p>रमेश सर्राफ धमोरा</p>
<p>(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 15:50:18 +0530</pubDate>
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