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                <title>वो नटखट,मधुर, चितचोर ... सबका 'किशोर '</title>
                                    <description><![CDATA[पुण्य स्मरण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/entertainment/that-mischievous-and-mischievous-teenager/article-3589"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/images.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>हर्षवर्धन पान्डे</p>
<p>मध्यप्रदेश का खंडवा शहर मायानगरी किशोर दा की  खूबसूरत स्मृतियों से भी जुड़ा है। उनका जन्म खंडवा, मध्यप्रदेश में 4 अगस्त 1929 को हुआ था। उनका वास्तविक नाम आभास कुमार गांगुली था। उनके पिता कुंजलाल गांगुली, एक वकील थे और उनकी माँ गौरी देवी एक गृहिणी थी। किशोर कुमार के चार भाई अशोक कुमार, अनूप कुमार, कुणाल कुमार और रतन कुमार थे। अशोक कुमार भाइयों में सबसे बड़े थे और भारतीय फिल्म उद्योग के एक प्रसिद्ध अभिनेता भी थे। किशोर कुमार ने भारतीय सिनेमा उस स्वर्णिम दौर में संघर्ष शुरु किया था जब उनके भाई अशोक कुमार एक सफल सितारे के रूप में स्थापित हो चुके थे। उस दौर को याद करें तो सिनेमा में दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, बलराज साहनी, गुरुदत्त और रहमान जैसे कलाकारों के साथ ही पार्श्वगायन में मोहम्मद रफी, मुकेश, तलत महमूद और मन्ना डे जैसे दिग्गज गायकों का ही  बोलबाला था। किशोर कुमार ने अपने गानों में भावनाओं को इस तरह पिरोया कि श्रोता उनमें खो जाते थे। उनकी आवाज में एक सहजता और जीवंतता थी जो उन्हें समकालीन गायकों से अलग करती थी। उन्होंने आर.डी. बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, और कल्याणजी-आनंदजी जैसे संगीतकारों के साथ मिलकर कई यादगार गीत दिए।</p>
<p>किशोर कुमार की गायकी का सफर 1940 के दशक में शुरू हुआ। हालाँकि उनके पहले  गीत "मरने की दुआएँ क्यों माँगू" (फिल्म: जिद्दी, 1948) को ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली लेकिन धीरे-धीरे उनकी अनोखी शैली ने लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने विभिन्न शैलियों में गाने गाए जिनमें रोमांटिक, उदास, हास्य, और भक्ति गीत शामिल हैं। किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म शिकारी (1946) से हुई। इस फ़िल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। उन्हें पहली बार गाने का मौका 1948 में बनी फ़िल्म जिद्दी में मिला जिसमें उन्होंने देव आनन्द के लिए खूबसूरत  गाना गाया। किशोर कुमार के. एल. सहगल के बड़े प्रशंसक थे इसलिए उन्होंने यह गीत उनकी शैली में ही गाया। जिद्दी की सफलता के बावजूद उन्हें न तो पहचान मिली और न कोई खास काम मिला। उन्होंने 1951 में फणी मजूमदार द्वारा निर्मित फ़िल्म 'आन्दोलन' में हीरो के रूप में काम किया मगर फ़िल्म फ़्लॉप हो गई। 1954 में उन्होंने बिमल राय की 'नौकरी' में एक बेरोज़गार युवक की संवेदनशील भूमिका निभाकर अपनी प्रभावकारी अभिनय प्रतिभा से भी परिचित किया। इसके बाद 1955 में बनी "बाप रे बाप", 1956 में "नई दिल्ली", 1957 में "मि. मेरी" और "आशा" और 1958 में बनी "चलती का नाम गाड़ी" जिसमें किशोर कुमार ने अपने दोनों भाईयों अशोक कुमार और अनूप कुमार के साथ काम किया।</p>
<p>यह भी मजेदार बात है कि किशोर कुमार की शुरुआत की कई फ़िल्मों में मोहम्मद रफ़ी ने किशोर कुमार के लिए अपनी आवाज दी थी। मोहम्मद रफ़ी ने फ़िल्म ‘रागिनी’ तथा ‘शरारत’ में किशोर कुमार को अपनी आवाज उधार दी तो मेहनताना लिया सिर्फ एक रुपया। काम के लिए किशोर कुमार सबसे पहले एस. डी. बर्मन के पास गए थे जिन्होंने पहले भी उन्हें 1950 में बनी फ़िल्म "प्यार" में गाने का मौका दिया था। एस. डी. बर्मन ने उन्हें फिर "बहार" फ़िल्म में एक गाना गाने का मौका दिया और यह गाना बहुत हिट हुआ।</p>
<p>शुरू में किशोर कुमार को एस. डी. बर्मन और अन्य संगीतकारों ने अधिक गंभीरता से नहीं लिया और उनसे हल्के स्तर के गीत  गवाएं  लेकिन किशोर कुमार ने 1957 में बनी फ़िल्म "फंटूस" में दुखी मन मेरे गीत अपनी ऐसी धाक जमाई कि जाने माने संगीतकारों को किशोर कुमार की प्रतिभा का लोहा एक दिन मानने को मजबूर होना पड़ा। इसके बाद एस.डी.बर्मन ने किशोर कुमार को अपने संगीत निर्देशन में कई गीत गाने का मौका दिया। आर. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने 'मुनीम जी', 'टैक्सी ड्राइवर', 'फंटूश', 'नौ दो ग्यारह', 'पेइंग गेस्ट', 'गाईड', 'ज्वेल थीफ़', 'प्रेमपुजारी', 'तेरे मेरे सपने' जैसी फ़िल्मों में अपनी जादुई आवाज से फ़िल्मी संगीत के दीवानों को अपना दीवाना बना लिया।</p>
<p>किशोर कुमार ने वर्ष 1940 से वर्ष 1980 के बीच के अपने करियर के दौरान करीब 500 से अधिक गाने गाए।  हिन्दी के साथ ही किशोर कुमार ने तमिल, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उड़िया फ़िल्मों के लिए भी गीत गाए। किशोर कुमार को उनकी गायकी के लिए आठ फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिले। पहला फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार 1969 में अराधना फ़िल्म के गीत रूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवाना के लिए दिया गया था। किशोर कुमार की विशेषता यह थी कि उन्होंने देव आनंद से लेकर राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन के लिए अपनी आवाज दी और इन सभी अभिनेताओं पर उनकी आवाज ऐसी रची बसी मानो किशोर कुमार खुद उनके अंदर मौजूद हों। 1975 में आपातकाल के दौरान दिल्ली में एक सांस्कृतिक आयोजन में उन्हें गाने का न्यौता मिला। किशोर कुमार ने पारिश्रमिक मांगा तो आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनके गायन को प्रतिबंधित कर दिया गया। आपातकाल हटने के बाद 5 जनवरी 1977 को उनका पहला गाना बजा दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना।</p>
<p>किशोर कुमार केवल एक गायक ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट अभिनेता, संगीतकार और फिल्म निर्माता भी थे। उनकी फिल्में जैसे "चलती का नाम गाड़ी" (1958), "पड़ोसन" (1968), और "हाफ टिकट" (1962) में उनके हास्य और अभिनय की प्रतिभा का प्रदर्शन हुआ। उनकी कॉमिक टाइमिंग और अनोखा अंदाज दर्शकों को खूब हंसाता और गुदगुदाता भी था। उन्होंने कई फिल्मों में संगीत निर्देशन भी किया, जैसे "जमाना" (1957) और "दूर का राही" (1971)। इसके अलावा, उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी के तहत कई फिल्में बनाई, जो उनकी रचनात्मकता का प्रतीक थी। किशोर के गाये गाने संगीत प्रेमियों को झूमने के लिए मजबूर कर देते हैं।  किशोर कुमार ने 81 फ़िल्मों में अभिनय किया और 18 फ़िल्मों का निर्देशन भी किया। फ़िल्म 'पड़ोसन' में उन्होंने जिस मस्त मौला आदमी के किरदार को निभाया वही किरदार वे जिंदगी भर अपनी असली जिंदगी में निभाते रहे। किशोर कुमार ने एक गायक के रूप में अपना करियर शुरू किया और जल्द ही भारतीय फिल्म उद्योग में सबसे लोकप्रिय गायकों में एक अलहदा पहचान बनाने में सफल हुए। उनकी मधुर आवाज़  ने उन्हें घर -घर नई पहचान देने का काम किया। गायन के अलावा किशोर कुमार ने  अपनी खुद की कई फिल्मों के लिए संगीत भी तैयार किया। उनकी कुछ उल्लेखनीय जीत में फिल्म “चलती का नाम गाड़ी” (1959) से “एक लड़की भीगी भागी सी”, फिल्म “आराधना” (1970) से “रूप तेरा मस्ताना” और फिल्म “सफर” (1971) से “जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर ” शामिल हैं।</p>
<p>किशोर कुमार को कला और संगीत के क्षेत्र  में उनके योगदान के लिए 1983 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म श्री से सम्मानित किया गया। यही नहीं, 8 बार फिल्मफेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया। सही मायनों में किशोर कुमार भारतीय फिल्म उद्योग में एक बेहद सफल गायक और अभिनेता थे। उनकी विशिष्ट आवाज़ और शैली ने उन्हें शिखर पर पहुंचाया। किशोर कुमार ने “हाफ टिकट”, “पड़ोसन”, “चलती का नाम गाड़ी” और “गोल माल” सहित कई लोकप्रिय फिल्मों में अभिनय और निर्देशन भी किया। अपने अभिनय और गायन कौशल के अलावा किशोर कुमार ने अपनी खुद की कई फिल्मों के लिए संगीत भी तैयार किया और अपने काम में एक अनूठा और रचनात्मक स्पर्श लाने की क्षमता के लिए जाने जाते थे। भारतीय फिल्म उद्योग में उनके योगदान ने उन्हें एक स्थायी और प्रभावशाली व्यक्ति बना दिया है और उन्हें अभी भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे बड़ी प्रतिभाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है।</p>
<p>किशोर कुमार का निजी जीवन उतना ही रंगीन था जितना उनका पेशेवर जीवन। उन्होंने रुमा घोष, मधुबाला, योगिता बाली और लीना चंदावरकर के साथ कुल चार शादियाँ की। उनकी दूसरी पत्नी, मधुबाला के साथ उनकी प्रेम कहानी और उनके निधन ने किशोर को गहरा आघात पहुँचाया। फिर भी वे अपनी सिने और संगीत कला में डूबे रहे और जीवन से कभी हार नहीं मानी। किशोर कुमार को खंडवा से बेपनाह प्यार था। खंडवा तो मानो उनके दिल में बसता था  शायद तभी उस दौर में किशोर कुमार खंडवे वाला छोरा तो हिट हो गया था। वह मुंबई से लौटकर वापस खंडवा बसना चाहते थे लेकिन नियति को कुछ और मजबूर था। मात्र 58 साल की आयु में किशोर कुमार का निधन 13 अक्टूबर 1987 को  दिल का दौरा पड़ने से हुआ।</p>
<p>किशोर कुमार भारतीय फिल्म उद्योग में एक अत्यधिक सफल और प्रभावशाली व्यक्ति थे जो पार्श्व गायक के रूप में अपनी अनूठी आवाज और शैली के साथ-साथ अपने अभिनय और निर्देशन कौशल के लिए जाने जाते थे। किशोर कुमार भारतीय सिनेमा में एक सदाबहार गायक के तौर पर आज भी याद किये जाते हैं और उनके गीत लोगों को आज भी झूमने पर मजबूर कर देते हैं। फिल्म उद्योग में किशोर कुमार के योगदान को आज भी दिल से सराहा जाता है। सही मायनों में कहूँ तो किशोर कुमार भारतीय सिनेमा के एक ऐसे नायाब सितारे थे जिनकी चमक भारतीय सिनेमा जगत में कभी फीकी नहीं पड़ेगी। उनकी बहुमुखी प्रतिभा, दिलकश आवाज और बेफिक्र अंदाज ने उन्हें अमर बना दिया। वे एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने फिल्म- संगीत कला के हर रूप को जिया और उसे अपने अंदाज से नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।</p>
<p> </p>
<p>( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं )</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 21:39:46 +0530</pubDate>
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                <title>सातवें वेतन आयोग के बारे में अपनी मांगें बताने के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए लॉन्च की गई  वेबसाइट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : पश्चिम बंगाल सरकार ने एक खास वेबसाइट शुरू की है, जिस पर वे सातवें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें, विचार, राय और अलग-अलग प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि वेबसाइट के ज़रिए ज्ञापन और सुझाव जमा करने का मॉड्यूल पहले से ही काम कर रहा है। संगठन, संस्थाएं और विभाग 31 अक्टूबर तक वेबसाइट पर अपने विचार जमा कर सकते हैं। अलग-अलग कर्मचारी और रिटायर हो चुके कर्मचारी भी अपनी राय दे सकते हैं।<br />सातवें वेतन आयोग के बारे में राज्य सरकार के नोटिफिकेशन में कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/website-launched-for-government-employees-to-express-their-demands-regarding/article-3588"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-03-at-4.52.51-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : पश्चिम बंगाल सरकार ने एक खास वेबसाइट शुरू की है, जिस पर वे सातवें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें, विचार, राय और अलग-अलग प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि वेबसाइट के ज़रिए ज्ञापन और सुझाव जमा करने का मॉड्यूल पहले से ही काम कर रहा है। संगठन, संस्थाएं और विभाग 31 अक्टूबर तक वेबसाइट पर अपने विचार जमा कर सकते हैं। अलग-अलग कर्मचारी और रिटायर हो चुके कर्मचारी भी अपनी राय दे सकते हैं।<br />सातवें वेतन आयोग के बारे में राज्य सरकार के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जानकारी देने,  डेटा इकट्ठा करने, ज्ञापन लेने और अपॉइंटमेंट तय करने जैसे कई कामों के लिए एक अलग वेबसाइट बनाई गई है। 2 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, आयोग की वेबसाइट पर ज्ञापन और सुझाव जमा करने की सुविधा अब चालू हो गई है। आयोग ने सभी संबंधित पक्षों से कहा है कि वे तय मॉड्यूल का इस्तेमाल करके अपने विचार जमा करें।<br />नोटिफिकेशन में बताया गया है कि राज्य सरकार के मौजूदा और रिटायर हो चुके कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले अलग-अलग संगठन और एसोसिएशन—साथ ही वित्त विभाग के 22 जुलाई, 2026 के प्रस्ताव के साथ लगे अनुलग्नक में बताई गई संस्थाएं—इस मॉड्यूल के ज़रिए अपनी राय दे सकती हैं। ये संगठन वेतन,  भत्ते,  प्रमोशन,  रिटायरमेंट के फायदे और नौकरी से जुड़े दूसरे मामलों पर अपने विचार रख सकते हैं। संगठनों के अलावा,  अलग-अलग कर्मचारी और रिटायर हो चुके कर्मचारी भी सीधे आयोग को अपने सुझाव भेज सकते हैं।<br />आयोग ने साफ किया है कि ज्ञापन या सुझाव जमा करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर, 2026 है। ऑनलाइन मॉड्यूल उस तारीख तक खुला रहेगा। इसलिए, सरकारी कर्मचारियों के अलग-अलग यूनियन, रिटायर हो चुके कर्मचारियों के एसोसिएशन और दूसरी संबंधित संस्थाओं को तय समय के अंदर अपनी मांगें और प्रस्ताव जमा करने होंगे।<br />खास बात यह है कि आयोग सिर्फ़ वेबसाइट के ज़रिए मिले ज्ञापन और सुझावों पर ही विचार करेगा। यह कागज़,  हार्ड कॉपी, पीडीएफ  पर जमा किए गए ज्ञापन या ईमेल से भेजे गए विचारों को स्वीकार या उन पर विचार नहीं करेगा। इसलिए, जो लोग अपनी मांगें या विचार जमा करना चाहते हैं,  उन्हें आवेदन करने के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल का इस्तेमाल करना होगा। यह ध्यान देने वाली बात है कि सातवें वेतन आयोग का गठन राज्य सरकार के वित्त विभाग के एक प्रस्ताव के ज़रिए 22 जुलाई, 2026 को किया गया था। इसके बाद, राज्य सरकार ने आयोग का कामकाज शुरू किया। आयोग की कार्यवाही में एक अहम कदम के तौर पर,  अब कर्मचारियों और रिटायर हो चुके लोगों से फ़ीडबैक लेने के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की गई है। इससे अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से वेतन संरचना, भत्ते, प्रमोशन और रिटायरमेंट से जुड़े फ़ायदे जैसे प्रस्ताव सीधे आयोग तक पहुंच सकेंगे। इस वेबसाइट के लॉन्च होने से आयोग तक राय पहुंचाने की प्रक्रिया आसान और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। साथ ही, ऑनलाइन सबमिशन की सुविधा से अलग-अलग दस्तावेज़ भेजने या ईमेल पर निर्भर रहने की ज़रूरत खत्म हो जाएगी। चूंकि जानकारी और प्रस्ताव एक खास मॉड्यूल के ज़रिए जमा किए जाते हैं,  इसलिए आयोग के लिए उन्हें एक साथ करना और उनकी समीक्षा करना आसान होगा।<br />कर्मचारी संगठनों के इनपुट के साथ-साथ व्यक्तिगत कर्मचारियों के फ़ीडबैक का मौका देकर, अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों और रिटायर हो चुके लोगों के लिए सातवें वेतन आयोग के सामने अपनी उम्मीदें और चिंताएं रखने का एक प्लेटफ़ॉर्म बनाया गया है। ज़मीनी स्तर का फ़ीडबैक, खासकर नई वेतन संरचना को अंतिम रूप देने से पहले,  आयोग के काम को ज़्यादा डेटा-आधारित बना सकता है। इसी वजह से तय समय सीमा के भीतर राय जमा करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार सातवें वेतन आयोग के बारे में कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ व्यक्तिगत सरकारी कर्मचारियों की राय भी जानना चाहती है। इसलिए, सभी से कहा गया है कि वे 31 अक्टूबर तक अपने प्रस्ताव अलग-अलग जमा करें। एक बार जब पोर्टल पर सभी विवरण दर्ज हो जाएँगे, तो सरकार आसानी से वेतन आयोग के बारे में राज्य सरकार के कर्मचारियों की राय समझ सकेगी। इस पर टिप्पणी करते हुए, बंगिया शिक्षक ओ शिक्षकर्मी समिति के नेता स्वपन मंडल ने कहा-जब सरकार ने सातवें वेतन आयोग के लिए नोटिफ़िकेशन जारी किया था, तो उसने घोषणा की थी कि संगठनों, निकायों या विभागों को अपनी राय या माँगें जमा करने की सुविधा देने के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की जाएगी। वेबसाइट लॉन्च करने में कुछ देरी हुई। हालाँकि, कर्मचारियों को यह जानकर कुछ राहत मिलेगी कि वे अब समय पर अपनी माँगें जमा कर सकते हैं और अधिकारियों के साथ मामलों पर चर्चा कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>जैकी श्रॉफ ने संगीतकार प्यारेलाल और अभिनेता शक्ति कपूर को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने दिग्गज संगीतकार प्यारेलाल और जाने-माने अभिनेता शक्ति कपूर को उनके जन्मदिन पर खास अंदाज में शुभकामनाएं दीं। जैकी ने सोशल मीडिया पर दोनों कलाकारों की तस्वीरें शेयर करते हुए उनके लिए बेहद प्यारा मैसेज लिखा। उन्होंने संगीतकार प्यारेलाल के लिए जहां सम्मान जताया, वहीं शक्ति कपूर के लिए खुशियों से भरी जिंदगी की कामना की।<br />जैकी श्रॉफ ने सबसे पहले मशहूर संगीतकार प्यारे लाल को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने प्यारेलाल की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह वायलिन बजाते हुए नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ जैकी ने लता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/entertainment/jackie-shroff-wishes-musician-pyarelal-and-actor-shakti-kapoor-on/article-3587"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-03-at-4.02.14-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने दिग्गज संगीतकार प्यारेलाल और जाने-माने अभिनेता शक्ति कपूर को उनके जन्मदिन पर खास अंदाज में शुभकामनाएं दीं। जैकी ने सोशल मीडिया पर दोनों कलाकारों की तस्वीरें शेयर करते हुए उनके लिए बेहद प्यारा मैसेज लिखा। उन्होंने संगीतकार प्यारेलाल के लिए जहां सम्मान जताया, वहीं शक्ति कपूर के लिए खुशियों से भरी जिंदगी की कामना की।<br />जैकी श्रॉफ ने सबसे पहले मशहूर संगीतकार प्यारे लाल को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने प्यारेलाल की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह वायलिन बजाते हुए नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ जैकी ने लता मंगेशकर और मुकेश की आवाज में फिल्म 'शोर' का मशहूर गाना 'एक प्यार का नगमा है' भी जोड़ा। यह गाना लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी के सबसे यादगार गानों में शामिल है। तस्वीर के साथ जैकी ने लिखा-मेरे मन में प्यारेलाल के लिए हमेशा सम्मान रहेगा।<br />प्यारेलाल का जन्म 3 सितंबर 1940 को हुआ था। वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे मशहूर संगीतकारों में गिने जाते हैं। उनका नाम खास तौर पर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी की वजह से जाना जाता है। प्यारेलाल ने लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर के साथ मिलकर इस जोड़ी को बनाया था। दोनों ने लंबे समय तक साथ काम किया और हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक यादगार गाने दिए।<br />लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने कई बड़ी फिल्मों के लिए संगीत दिया। 'शोर' का 'एक प्यार का नगमा है', 'सरगम' का 'ढपली वाले ढपली बजा', 'सत्यम शिवम सुंदरम' का टाइटल सॉन्ग, 'कर्ज' का 'ओम शांति ओम' और 'अमर अकबर एंथनी' का 'पर्दा है पर्दा' आज भी लोगों की जुबान पर हैं। इसके अलावा 'क्रांति' का 'जिंदगी की ना टूटे लड़ी', 'एक दूजे के लिए' का 'तेरे मेरे बीच में', 'राम लखन' का 'माय नेम इज लखन' और 'तेजाब' का 'सो गया ये जहां'  भी इस जोड़ी के बेहद लोकप्रिय गानों में शामिल हैं।<br />प्यारेलाल के योगदान को देखते हुए उन्हें साल 2024 में देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। संगीत की दुनिया में उनके लंबे योगदान को देखते हुए यह सम्मान उनके लिए बेहद खास रहा।<br />इसके बाद जैकी श्रॉफ ने अभिनेता शक्ति कपूर को भी जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शक्ति कपूर की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह ब्लैक सूट में काफी स्टाइलिश नजर आ रहे हैं। जैकी ने तस्वीर के साथ लिखा-आपकी जिंदगी में हमेशा खुशियां बनी रहें।<br />शक्ति कपूर हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने चार दशक से ज्यादा समय तक फिल्मों में काम किया है। उनके करियर की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने एक ही तरह के किरदारों में खुद को सीमित नहीं रखा।<br />उन्होंने विलेन की भूमिका भी निभाई और कॉमेडी किरदारों से दर्शकों को खूब हंसाया। 'अंदाज अपना अपना', 'राजा बाबू', 'कुली नंबर 1' जैसी फिल्मों में शक्ति कपूर ने अपनी कॉमेडी से अलग पहचान बनाई। वहीं उनके निगेटिव किरदारों ने भी उन्हें खूब लोकप्रियता दिलाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:54:09 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी के विदेशी नागरिक होने का कोई सबूत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सिर्फ़ भारतीय नागरिक ही नहीं हैं;  उन पर ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप भी लगे हैं। इस दावे के आधार पर बीजेपी समर्थकों ने देश भर में कई मुकदमे दायर किए हैं। जहां कुछ मामले पहले ही खारिज हो चुके हैं,  वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अब एक और मामला खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इस दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दे पाए कि राहुल के पास विदेशी नागरिकता है।<br />याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि 2005 और 2006 में ब्रिटिश कंपनी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/there-is-no-evidence-of-rahul-gandhi-being-a-foreign/article-3586"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-03-at-3.40.48-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सिर्फ़ भारतीय नागरिक ही नहीं हैं;  उन पर ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप भी लगे हैं। इस दावे के आधार पर बीजेपी समर्थकों ने देश भर में कई मुकदमे दायर किए हैं। जहां कुछ मामले पहले ही खारिज हो चुके हैं,  वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अब एक और मामला खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इस दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दे पाए कि राहुल के पास विदेशी नागरिकता है।<br />याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि 2005 और 2006 में ब्रिटिश कंपनी 'बैकऑप्स लिमिटेड'  के ज़रिए राहुल द्वारा दाखिल सालाना रिटर्न से जुड़े दस्तावेज़ उनकी ब्रिटिश नागरिकता का सबूत हैं। इसके अलावा, यह आरोप भी लगाया गया था कि इंग्लैंड में उनके नाम पर रजिस्टर्ड एक कंपनी के लिए दिए गए घोषणा-पत्र में उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। ब्रिटिश नागरिकता के इन आरोपों के आधार पर कई बार उनका नामांकन रद्द करने की मांग की गई है। कानून के तहत, भारतीय नागरिकों के लिए दोहरी नागरिकता रखना दंडनीय अपराध है।<br />मुद्दा यह है कि भले ही बीजेपी नेताओं ने बार-बार राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाए हैं,  लेकिन वे कोई सबूत पेश करने में नाकाम रहे हैं। अशोक पांडे नाम के एक व्यक्ति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में राहुल के खिलाफ़ मामला दायर किया था। जस्टिस बी. शराफ़ और अवधेश कुमार चौधरी ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर सका। आखिरकार, उन्हें मामला वापस लेने का निर्देश दिया गया।<br />गौरतलब है कि राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाए जा चुके हैं। इससे पहले, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली हाई कोर्ट में इसी तरह का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। दिलचस्प बात यह है कि भले ही बीजेपी नेताओं ने पहले कई बार यह साबित करने की कोशिश की है कि राहुल गांधी विदेशी नागरिक हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे कोई बड़ा मुद्दा नहीं बनाया है। मोदी सरकार ने हमेशा किसी न किसी तरह राहुल की नागरिकता के सवाल को टाल दिया है। अब यह देखना बाकी है कि इस बार केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:52:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>परीक्षा में नकल की शिकायत करने की 'सज़ा' </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : एक स्कूल शिक्षक पर एक छात्रा की बेरहमी से पिटाई करने और उसका हाथ मरोड़ने का आरोप है। घटना के दस दिन बाद अस्पताल में इलाज के दौरान नाबालिग लड़की की मौत हो गई। यह चौंकाने वाली घटना हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुई। खबरों के मुताबिक, दो शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है।<br />पुलिस सूत्रों ने मृतका की पहचान हरदोई जिले के एक स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा क्षमा के तौर पर की है। वह 20 अगस्त को परीक्षा देने स्कूल गई थी। उसके पिता उमेश दीक्षित ने आरोप लगाया कि परीक्षा के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/punishment-for-complaining-about-cheating-in-exam/article-3585"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/d565324e-81b2-45eb-9d58-c733f61d5d08.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : एक स्कूल शिक्षक पर एक छात्रा की बेरहमी से पिटाई करने और उसका हाथ मरोड़ने का आरोप है। घटना के दस दिन बाद अस्पताल में इलाज के दौरान नाबालिग लड़की की मौत हो गई। यह चौंकाने वाली घटना हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुई। खबरों के मुताबिक, दो शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है।<br />पुलिस सूत्रों ने मृतका की पहचान हरदोई जिले के एक स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा क्षमा के तौर पर की है। वह 20 अगस्त को परीक्षा देने स्कूल गई थी। उसके पिता उमेश दीक्षित ने आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान उस पर अपनी आंसर शीट (उत्तर पुस्तिका) एक क्लासमेट को दिखाने का दबाव डाला गया। इसके बाद क्षमा और उस क्लासमेट के बीच झगड़ा हो गया। जब उसने शिक्षक से इस मामले की शिकायत करने की कोशिश की,  तो उसकी बात सुनने के बजाय कथित तौर पर उसकी बुरी तरह पिटाई की गई।  शिक्षक पर उसका हाथ मरोड़ने का भी आरोप है। उसके पिता ने दावा किया कि जब वह घर लौटी, तो उसका हाथ सूजा हुआ था और वह दर्द से तड़प रही थी। बाद में,  मेडिकल जांच में उसके हाथ में अंदरूनी टिश्यू डैमेज और खून का थक्का जमने का पता चला।<br />उमेश ने आगे दावा किया कि परिवार की आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी बेटी के इलाज के खर्च की चिंता थी। उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। हालांकि, जैसे-जैसे क्षमा की हालत बिगड़ी, उसे एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उमेश का दावा है कि उन्होंने क्षमा के इलाज का खर्च उठाने के लिए लोन लिया था। हालांकि, 30 अगस्त को नाबालिग लड़की की अचानक मौत हो गई। उसकी मौत की वजह अभी साफ़ नहीं है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।<br />हरदोई के एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस सुबोध गौतम ने बताया कि मृतका के पिता की शिकायत के आधार पर स्कूल के हेडमास्टर अक्षय सिंह यादव, मुख्य आरोपी राजेंद्र गंगवार और घटना में शामिल सहपाठी के ख़िलाफ़ एफआईआर  दर्ज की गई है। जांच करने वालों ने भरोसा दिलाया है कि घटना की पूरी जांच की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:49:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार बीसीआई  के पास नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> :  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई)  और राज्य बार काउंसिलों के पास लॉ के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों पर ऐसा नियंत्रण उनके वकील के रूप में पंजीकृत होने के बाद ही शुरू होता है।<br />इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। यह पीठ मिहिरा सूद और अभिषेक तिवारी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में बीसीआई अध्यक्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/bci-has-no-power-to-take-disciplinary-action-against-law/article-3584"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/1d0571df-389e-49ba-8ebb-564c30ca204f.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> :  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई)  और राज्य बार काउंसिलों के पास लॉ के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों पर ऐसा नियंत्रण उनके वकील के रूप में पंजीकृत होने के बाद ही शुरू होता है।<br />इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। यह पीठ मिहिरा सूद और अभिषेक तिवारी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा 13 अगस्त को जारी निर्देशों को चुनौती दी गई थी। हालांकि, बीसीआई अध्यक्ष ने कुछ ही घंटों के भीतर इन निर्देशों को वापस ले लिया था।<br />सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने तर्क दिया कि भले ही अध्यक्ष के निर्देश वापस ले लिए गए हों, लेकिन जिस तरह से इन्हें जारी किया गया था, उस तरीके की जांच होनी चाहिए। वकील ने कहा कि यह एक विश्वविद्यालय में बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है और यह सिर्फ एक छात्र से जुड़ा मुद्दा नहीं है।<br />वहीं, बीसीआई अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि इन निर्देशों को जारी होने के एक घंटे के भीतर ही वापस ले लिया गया था। हालांकि, परमेश्वर ने दलील दी कि बीसीआई अब कह रहा है कि पत्र वापस ले लिए गए हैं, लेकिन यह असल मुद्दा नहीं है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि बीसीआई ने शुरुआत में कहा था कि छात्रों के पूरे बैच को वकील के रूप में पंजीकृत नहीं किया जाएगा।<br />उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल बीसीआई से यह जानना चाहते हैं कि ये बैठकें कैसे आयोजित की गईं, यह निर्णय किसने लिया और कानून के किस प्रावधान के तहत ऐसा किया गया। वरिष्ठ वकील ने इस बात पर बल दिया कि लॉ के छात्रों पर बीसीआई का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, और वह केवल उनके वकील के रूप में पंजीकृत होने के बाद ही उनके आचरण को नियंत्रित कर सकती है।<br />मुख्य न्यायाधीश ने कहा-हमारा यह मानना है कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961, जिसके तहत बीसीआई (बीसीआई)  का कानूनी रूप से गठन किया गया है, बीसीआई या किसी भी राज्य बार काउंसिल को लॉ के छात्रों के खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अधिकार नहीं देता है। इस तरह का अधिकार किसी लॉ ग्रेजुएट के उक्त अधिनियम के तहत वकील के रूप में पंजीकृत होने के बाद ही मिलता है। जहां तक छात्रों का सवाल है, केवल उनका मूल संस्थान या उस संस्थान के नियमों/उप-नियमों के तहत तय की गई अथॉरिटी ही अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सक्षम है..."<br />पीठ ने सुनवाई का समापन करते हुए कहा-हम 13 अगस्त के सभी पत्रों या उसके बाद के संशोधित पत्रों को बिना किसी कानूनी अधिकार के (अवैध) घोषित करते हैं. अंतरिम निर्देशों को अंतिम माना जाए।<br />13 अगस्त को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के उस पुराने आदेश में बदलाव किया था, जिसने राज्य बार काउंसिलों को नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 के ग्रेजुएट्स को वकील के रूप में पंजीकृत करने से रोक दिया था।<br />बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह बदलाव यह पाए जाने के बाद किया कि ज्यादातर छात्र निर्दोष थे और विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की हिस्सेदारी का विरोध करने वाले अभियान में शामिल नहीं होना चाहते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:48:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शुभेंदु अधिकारी ने कम्युनिस्टों व तृणमूलियों पर लगाया बंगाल की शिक्षा-व्यवस्था नष्ट करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : 34 सालों तक कम्युनिस्टों ने बंगाली भाषा को बढ़ावा देने और फैलाने में रुकावट डाली। उन्होंने अंग्रेज़ी शिक्षा को भी दबाया। गुरुवार को गोलपार्क के रामकृष्ण मिशन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वामपंथियों पर इस तरह निशाना साधा। साथ ही,  उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत के लिए पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूली पाठ्यक्रम तृणमूल सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार हो गया। भाषा को बिगाड़ा गया और बच्चों के मन में बंटवारे के बीज बोए गए।<br />मुख्यमंत्री गोलपार्क के रामकृष्ण मिशन में आरएसएस  से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/subhendu-adhikari-accused-communists-and-trinamool-of-destroying-the-education/article-3583"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/0081c9fd-85f5-4b1a-a11c-e36169003736.jpeg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : 34 सालों तक कम्युनिस्टों ने बंगाली भाषा को बढ़ावा देने और फैलाने में रुकावट डाली। उन्होंने अंग्रेज़ी शिक्षा को भी दबाया। गुरुवार को गोलपार्क के रामकृष्ण मिशन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वामपंथियों पर इस तरह निशाना साधा। साथ ही,  उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत के लिए पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूली पाठ्यक्रम तृणमूल सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार हो गया। भाषा को बिगाड़ा गया और बच्चों के मन में बंटवारे के बीज बोए गए।<br />मुख्यमंत्री गोलपार्क के रामकृष्ण मिशन में आरएसएस  से जुड़ी संस्था 'विवेकानंद विद्या भारती विकास परिषद'  के सालाना कार्यक्रम में शामिल हुए। वहां बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली दो सरकारों के दौरान बंगाल की शिक्षा व्यवस्था खराब हो गई थी। कम्युनिस्ट दौर में बांग्ला भाषा को बढ़ावा देने और फैलाने में रुकावट डाली गई और अंग्रेज़ी शिक्षा को दबाया गया;  यहां तक कि कंप्यूटर शिक्षा पर भी पाबंदियां लगाई गईं। शुभेंदु ने तृणमूल के 15 साल के कार्यकाल में से पिछले एक दशक में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की खराब हालत के बारे में भी बात की। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि तृणमूल ने शिक्षा व्यवस्था को खराब कर दिया है। स्कूली पाठ्यक्रम में सिंगुर से टाटा को हटाने की जानकारी तो शामिल थी,  लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सर्वोच्च बलिदान का कोई ज़िक्र नहीं था। जेल में बंद पार्थ चटर्जी का नाम तो शामिल था, लेकिन खुदीराम बोस या मातंगिनी हाज़रा के नाम खोजने के लिए पन्ने पलटने पड़ते थे। मुख्यमंत्री का मानना था कि अगर यह शिक्षा व्यवस्था और लंबे समय तक चलती, तो बंगाल के सांस्कृतिक मूल्य,  देशभक्ति और राष्ट्रवाद खत्म हो जाते। उन्होंने 'आकाश' और 'मां'  जैसे बांग्ला शब्दों की जगह 'आसमान' और 'अम्मा' जैसे शब्दों के इस्तेमाल की भी कड़ी आलोचना की।<br />जादवपुर के मुद्दे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा-बंगाल नेताजी और श्यामा प्रसाद की धरती है। स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता में हुआ था। फिर भी, इसी धरती पर आप कश्मीर के लिए 'आज़ादी'  के नारे लगाते हैं। पहलगाम में रैलियां नहीं होतीं,  लेकिन जब 'ऑपरेशन सिंदूर'  होता है, तो आप युद्ध खत्म करने की मांग करते हैं। क्या हमें यह बर्दाश्त करना चाहिए?  आप जादवपुर की दीवारों पर 'फ़्री फ़िलिस्तीन'  लिखते हैं?  इसकी जगह 'फ़्री पीओके'  लिखिए। मैं उसका समर्थन करूंगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/local/subhendu-adhikari-accused-communists-and-trinamool-of-destroying-the-education/article-3583</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:46:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी दफ्तर में तोड़फोड़ का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि गुरुवार सुबह बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके कैमक स्ट्रीट पर पार्टी के ऑफिस पर हमला किया और तोड़-फोड़ की। बनर्जी ने दावा किया कि गुरुवार सुबह करीब 4.30 बजे हथियारों से लैस गुंडों ने कोलकाता के बीचों-बीच टीएमसी ऑफिस पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने कर्मचारियों के फोन छीन लिए, फर्नीचर तोड़ा और परिसर में तोड़-फोड़ की और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नष्ट कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार कॉल और ईमेल करने के बावजूद कोलकाता पुलिस ने लगभग दो घंटे तक कोई जवाब नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/abhishek-banerjee-accused-of-vandalizing-tmc-office/article-3582"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/2bf5eb42-59bf-4d7b-9cf8-bb436f6b0e25.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि गुरुवार सुबह बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके कैमक स्ट्रीट पर पार्टी के ऑफिस पर हमला किया और तोड़-फोड़ की। बनर्जी ने दावा किया कि गुरुवार सुबह करीब 4.30 बजे हथियारों से लैस गुंडों ने कोलकाता के बीचों-बीच टीएमसी ऑफिस पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने कर्मचारियों के फोन छीन लिए, फर्नीचर तोड़ा और परिसर में तोड़-फोड़ की और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नष्ट कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार कॉल और ईमेल करने के बावजूद कोलकाता पुलिस ने लगभग दो घंटे तक कोई जवाब नहीं दिया।<br />घटना के बाद की ऑफिस का एक वीडियो शेयर करते हुए बनर्जी ने एक्स पर लिखा कि आज सुबह-सुबह बीजेपी ने मेरे पार्टी ऑफिस का यह हाल किया है। उन्होंने इस तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की। इस घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने सीएम शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया। टीएमसी सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पश्चिम बंगाल के गवर्नर कार्रवाई करेंगे?  क्या केंद्रीय गृह मंत्री कार्रवाई करेंगे? क्या पीएमओ  कार्रवाई करेगा?  उन्होंने न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि कलकत्ता हाई कोर्ट गंभीरता से ध्यान दे और पश्चिम बंगाल में कानून का राज बनाए रखने के लिए कदम उठाए।<br />अभिषेक बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि सीएम तृणमूल कांग्रेस और मुझसे इतना क्यों डरते हैं कि आपको इस तरह की डराने-धमकाने की हरकतें करनी पड़ रही हैं?  अगर पश्चिम बंगाल में विपक्ष के साथ हिंसा, तोड़-फोड़ और डराने-धमकाने के जरिए ऐसा ही बर्ताव किया जाना है, तो मुख्यमंत्री के पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। यह लोकतंत्र नहीं है। यह राजनीतिक गुंडागर्दी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को शर्म आनी चाहिए। साथ ही, जो लोग चुप रहने का फैसला करते हैं, उन्हें भी शर्म आनी चाहिए। टीएमसी महासचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस घटना को भुलाया नहीं जाएगा। ऐसी हर हरकत याद रखी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/local/abhishek-banerjee-accused-of-vandalizing-tmc-office/article-3582</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:45:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने वाराणसी में बाढ़ के मद्देनजर राहत कार्यों में तेजी लाने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : उत्तर प्रदेश के कम से कम 32 शहर इन दिनों लगातार बारिश और बाढ़ की मार झेल रहे हैं। वाराणसी में भी बाढ़ की वजह से स्थिति लगातार भयावह बनी हुई है। ऐसे हालात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जिले के मेयर और जिलाधिकारी से बातचीत कर वहां के हालात का जायजा लिया और राहत कार्यों में तेजी लाने के साथ-साथ लोगों की तकलीफों को कम से कम करने का सुझाव भी दिया।<br />पीएम मोदी ने वाराणसी के मेयर अशोक कुमार तिवारी और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से बात कर शहर में बाढ़ के हालात का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/uttar-pradesh/pm-modi-directed-to-speed-up-relief-work-in-view/article-3581"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/eb9b9e47-cc1f-433c-8ddb-fec5f3de5129.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : उत्तर प्रदेश के कम से कम 32 शहर इन दिनों लगातार बारिश और बाढ़ की मार झेल रहे हैं। वाराणसी में भी बाढ़ की वजह से स्थिति लगातार भयावह बनी हुई है। ऐसे हालात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जिले के मेयर और जिलाधिकारी से बातचीत कर वहां के हालात का जायजा लिया और राहत कार्यों में तेजी लाने के साथ-साथ लोगों की तकलीफों को कम से कम करने का सुझाव भी दिया।<br />पीएम मोदी ने वाराणसी के मेयर अशोक कुमार तिवारी और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से बात कर शहर में बाढ़ के हालात का जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने जिलाधिकारी से फोन पर बात के दौरान बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को युद्धस्तर पर राहत पहुंचाने के निर्देश दिया। साथ ही प्रभावित लोगों को तत्काल सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा।<br />स्थानीय अधिकारियों से बात के दौरान पीएम मोदी ने यह निर्देश भी दिया कि लोगों का खास ख्याल रखा जाए और यह कोशिश की जाए कि लोगों को कम से कम परेशानी हो। जहां भी राहत सामग्री की जरूरत हो, तत्काल अतिरिक्त व्यवस्था कराते हुए पहुंचाई जाए। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने शहर में बाढ़ और राहत कार्यों पर लगातार सतर्क नजर रखने को कहा।<br />प्रधानमंत्री मोदी ने जिलाधिकारी और मेयर को निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ की वजह से राहत शिविरों में रह रहे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष जरूरतों का ध्यान रखा जाए। प्रभावित लोगों तक अविलंब राहत पहुंचाने का काम तेज किया जाए।<br />वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर कल बुधवार को चेतावनी स्तर को पार कर गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने नदी में सभी तरह के नावों के संचालन पर रोक लगा दी और बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।<br />नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से घाटों तथा तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि गंगा और वरुणा नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ-साथ जलभराव और वरुणा नदी के किनारे के इलाकों में बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है।<br />अधिकारियों के अनुसार जिले में 13 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां बुधवार तक प्रभावित 219 परिवारों के 935 लोग रह रहे थे।<br />दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के एक्टिव हो जाने से इस समय करीब 32 जिले बाढ़ के संकट का सामना कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर बुधवार को जारी बयान में बताया गया कि अब तक 32 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। लेकिन वाराणसी और अयोध्या के साथ-साथ 20 अन्य जिलों आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, चंदौली, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, गोरखपुर, बदायूं, गाजीपुर, हापुड़, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर और उन्नाव में हालात खराब हैं।<br />प्रशासन की ओर से लोगों को यह सलाह दी गई है कि बारिश के दौरान लोग बेवजह यात्रा से बचें। जर्जर इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों या तारों से दूर रहें और खराब मौसम के दौरान बच्चे और बुजुर्ग घर के अंदर ही रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/uttar-pradesh/pm-modi-directed-to-speed-up-relief-work-in-view/article-3581</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:44:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'राज्य में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं है’</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति और राज्यपाल को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराने के लिए मांगा समय ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/there-is-no-such-thing-as-law-and-order-in/article-3580"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/369ed5f9-2399-4adf-af4c-39c6d941f73b.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ी है। पिछले कुछ महीनों से 'कालीघाट तृणमूल'  (ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली) बार-बार यह आरोप लगा रही है। अब, वह  इस मामले की औपचारिक शिकायत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गवर्नर आरएन रवि से करने की योजना बना रही है। गुरुवार को पार्टी ने राष्ट्रपति और गवर्नर दोनों को पत्र भेजकर क्रमशः देश के संवैधानिक प्रमुख और राज्य के संवैधानिक प्रमुख से मिलने का अनुरोध किया।<br />कालीघाट तृणमूल के सूत्रों का कहना है कि वे राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस की शक्ति के कथित दुरुपयोग की ओर राष्ट्रपति और गवर्नर का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।<br />राज्य में कई घटनाओं के बाद कालीघाट तृणमूल कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर मुखर रही है। 30 मई को सोनारपुर में मारे गए तृणमूल कार्यकर्ता के घर जाते समय अभिषेक पर हमला किया गया था।  उस दिन उन्हें थप्पड़ मारा गया,  घूंसे मारे गए और उन पर अंडे फेंके गए। इसके बाद, कई मौजूदा और पूर्व तृणमूल जन प्रतिनिधियों पर अंडे फेंकने के आरोप लगे हैं, जिनमें महुआ मोइत्रा और सौगत रॉय भी शामिल हैं। कालीघाट तृणमूल ने इन सभी घटनाओं के मद्देनजर राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।<br />इसके साथ ही,  कालीघाट तृणमूल शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाले प्रशासन द्वारा पुलिस की शक्ति के कथित दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाने का इरादा रखती है। तृणमूल नेता और राज्य ककी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले आरोप लगाया था कि 21 जुलाई और 28 अगस्त की रैलियों के दौरान राजनीतिक हितों के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा था। 28 अगस्त की रैली में उन्होंने कहा-पुलिस हमें मीटिंग या जुलूस निकालने की इजाज़त नहीं दे रही है। मैं साफ़-साफ़ कह रही हूं : मैं इसके बाद ज़िलों का दौरा करूंगी। अगर पुलिस इजाज़त नहीं देती है, तो मैं लोगों की मंज़ूरी से कार्यक्रम करूंगी। ज़रूरत पड़ी तो मैं पैदल जाऊँगी। देखते हैं तब आप क्या करते हैं।<br />इसी माहौल में, कालीघाट तृणमूल ने आरोप लगाया है कि गुरुवार तड़के 'बीजेपी के गुंडों'  ने उनके कैमक स्ट्रीट ऑफ़िस पर हमला किया। इस मामले पर अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया है कि क्या राज्य में अभी भी कानून का राज है। उन्होंने कहा-अगर हथियारों से लैस कोई गुट सुबह 4:30 बजे किसी राजनीतिक पार्टी के ऑफ़िस में घुसकर कार्यकर्ताओं पर हमला कर सकता है, फ़ोन छीन सकता है और तोड़-फोड़ कर सकता है—और वह भी तब जब पुलिस बेपरवाह बनी रहे—तो पश्चिम बंगाल में कानून के राज का क्या मतलब रह जाता है?<br />कालीघाट स्थित तृणमूल नेतृत्व के सूत्रों के अनुसार, वे अपनी मुलाकातों के दौरान राष्ट्रपति और राज्यपाल को इन मामलों के बारे में विस्तार से जानकारी देने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, पार्टी राज्य में महिलाओं के उत्पीड़न और विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए सरकार द्वारा अपनाए जा रहे दमनकारी तरीकों के आरोपों के बारे में भी इन दोनों संवैधानिक प्रमुखों को अवगत कराने की योजना बना रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:43:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अक्षय कुमार के साथ दिखेंगी रुक्मिणी मैत्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: बांग्ला फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री रुक्मिणी मैत्रा ने विद्युत जामवाल के साथ फिल्म ‘सनक’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। यह एक्ट्रेस अब मुंबई में बस गई हैं और उनके करियर में एक बड़ा मोड़ आने वाला है।  खबरों के अनुसार, वे 'खिलाड़ी'  अक्षय कुमार के साथ काम करने वाली हैं।<br />चर्चा है कि रुक्मिणी को अक्षय कुमार स्टारर और कनिष्क वर्मा द्वारा निर्देशित हिंदी साइंस-फिक्शन एलियन सर्वाइवल-एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘समुक’ में एक रोल मिला है। अक्षय कुमार के साथ काम करना निश्चित रूप से उनके फिल्मी करियर में एक अहम पड़ाव होगा।<br />हालांकि एक्ट्रेस ने अभी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/entertainment/rukmini-maitra-will-be-seen-with-akshay-kumar/article-3579"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/11164bf7-1545-4dfc-9456-68c15049c9c9.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: बांग्ला फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री रुक्मिणी मैत्रा ने विद्युत जामवाल के साथ फिल्म ‘सनक’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। यह एक्ट्रेस अब मुंबई में बस गई हैं और उनके करियर में एक बड़ा मोड़ आने वाला है।  खबरों के अनुसार, वे 'खिलाड़ी'  अक्षय कुमार के साथ काम करने वाली हैं।<br />चर्चा है कि रुक्मिणी को अक्षय कुमार स्टारर और कनिष्क वर्मा द्वारा निर्देशित हिंदी साइंस-फिक्शन एलियन सर्वाइवल-एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘समुक’ में एक रोल मिला है। अक्षय कुमार के साथ काम करना निश्चित रूप से उनके फिल्मी करियर में एक अहम पड़ाव होगा।<br />हालांकि एक्ट्रेस ने अभी तक सोशल मीडिया पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इतनी बड़ी बजट वाली फिल्म में रोल मिलना उनके करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म को सनशाइन पिक्चर्स के विपुल शाह प्रोड्यूस कर रहे हैं और अशिम शाह इसके को-प्रोड्यूसर हैं। यह आने वाली फिल्म 'पैन-इंडिया'  थिएट्रिकल रिलीज़ के तौर पर बनाई जा रही है, जिसमें वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्शन वैल्यू और बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की तैयारी दो साल से ज़्यादा समय से चल रही है।<br />अकादमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हो चुके क्रिएचर इफेक्ट्स डिज़ाइनर एलेक गिलिस—जो ‘एलियन’ और ‘प्रिडेटर’ फ्रेंचाइजी के साथ-साथ ‘एलियन: रोमुलस’ पर अपने काम के लिए जाने जाते हैं—ने फिल्म के मुख्य ‘एलियन क्रिएचर’ को डिज़ाइन किया है। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट में एक इंटरनेशनल क्रू भी शामिल है, जिसमें ब्रिटिश एक्शन डायरेक्टर ल्यूक टैम्बर भी हैं,  जो फिल्म के ज़बरदस्त और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण एक्शन सीक्वेंस डिज़ाइन करेंगे। वहीं, मार्वल स्टूडियोज़ की फिल्म ‘एवेंजर्स: डूम्सडे’ में आर्ट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके क्रिस पीटर्स भी डायरेक्टर कनिष्क वर्मा की इस फिल्म से जुड़ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, वर्मा ने ब्रिटेन में फिल्म की शूटिंग शुरू भी कर दी है। ‘समुक’ को बड़े पैमाने पर प्रोड्यूस किया जा रहा है;  यह एक साइंस-फिक्शन फिल्म है जो सर्वाइवल (जीवित रहने) की लड़ाई को दिखाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:41:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>मां की बीमारी के कारण कलकत्ता हाई कोर्ट ने माकपा नेता लहेक अली को दी अंतरिम जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : कलकत्ता हाई कोर्ट ने  माकपा  नेता लहेक अली को अंतरिम ज़मानत दे दी है। उन्हें बारुईपुर रेप केस के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) से जुड़ी एक मौत के मामले में गिरफ़्तार किया गया था। लहेक अली की मां गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। वकीलों ने इन्हीं हालात का हवाला देते हुए उनके लिए ज़मानत की मांग की थी। बुधवार को जस्टिस तीर्थंकर घोष ने लहेक अली को 10 सितंबर तक ज़मानत दे दी। हालांकि,  इस दौरान उन्हें इलाका छोड़ने की इजाज़त नहीं है और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/calcutta-high-court-grants-interim-bail-to-cpim-leader-lahek/article-3578"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/7537810a-bd63-489c-9ee0-3ade6c6bdd0d.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : कलकत्ता हाई कोर्ट ने  माकपा  नेता लहेक अली को अंतरिम ज़मानत दे दी है। उन्हें बारुईपुर रेप केस के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) से जुड़ी एक मौत के मामले में गिरफ़्तार किया गया था। लहेक अली की मां गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। वकीलों ने इन्हीं हालात का हवाला देते हुए उनके लिए ज़मानत की मांग की थी। बुधवार को जस्टिस तीर्थंकर घोष ने लहेक अली को 10 सितंबर तक ज़मानत दे दी। हालांकि,  इस दौरान उन्हें इलाका छोड़ने की इजाज़त नहीं है और पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उन्हें बारुईपुर पुलिस स्टेशन में पेश होना होगा।<br />गौरतलब है कि पुलिस ने लहेक अली को 12 जुलाई को गिरफ़्तार किया था। बारुईपुर में एक लड़की के रेप और हत्या के बाद, मॉब लिंचिंग की एक घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।  अली को उस घटना के बारे में भड़काऊ बयान देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। वह पिछले 50 दिनों से जेल में हैं। इस बीच, उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हैं और वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। हालात को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें अंतरिम ज़मानत दे दी। पुलिस ने उनके खिलाफ़ कुल चार सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान लेकर) मामले दर्ज किए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होनी है और जज ने पुलिस को तब तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।<br />सरकारी वकील (पीपी)  कल्लोल मंडल ने कोर्ट में कहा-उन्हें भड़काऊ बयान देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। जस्टिस घोष ने पूछा-उन्होंने क्या बयान दिए थे?  मुझे वे बयान देखने दें,  क्योंकि सभी आरोपों का आधार वही है। अगर आप उन्हें नहीं दिखा सकते, तो मैं राज्य द्वारा की गई गिरफ़्तारी को सही नहीं ठहरा सकता। इस पर राज्य के वकील ने जवाब दिया-इस समय हमारे पास वे बयान मौजूद नहीं हैं।<br />इसके बाद जज ने पूछा-क्या वह रेप और मॉब लिंचिंग की घटनाओं में शामिल हैं? राज्य ने जवाब दिया-वह रेप केस में शामिल नहीं हैं। उन्हें हत्या के मामले में भड़काऊ शब्दों से लोगों को उकसाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। यह सुनकर जज ने टिप्पणी की-क्या इससे पहले उन पर कोई और आरोप लगे हैं?  उनकी मां बीमार हैं। कोर्ट फिलहाल उन्हें ज़मानत देना चाहता है। इसके बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने लहेक अली को 10 सितंबर तक अंतरिम ज़मानत दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:41:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1127 हुई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> :  नेपाल पुलिस ने बताया कि बुधवार को नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई। पुलिस के मुताबिक कुल 45 शव रासुवा से, 155 नुवाकोट से, 59 धाडिंग से, 348 चितवन से, 66 गोरखा से, 38 तनाहुन से, 217 नवलपरासी ईस्ट से और 190 नवलपरासी वेस्ट से बरामद किए गए हैं।<br />नेपाल पुलिस ने यह भी बताया कि भारत में नौ शव बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान के बाद उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है। इससे एक दिन पहले नेपाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/death-toll-in-nepal-floods-reaches-1127/article-3577"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/9b5dd29a-32c2-40a6-b83a-92746bc8bb92.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> :  नेपाल पुलिस ने बताया कि बुधवार को नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई। पुलिस के मुताबिक कुल 45 शव रासुवा से, 155 नुवाकोट से, 59 धाडिंग से, 348 चितवन से, 66 गोरखा से, 38 तनाहुन से, 217 नवलपरासी ईस्ट से और 190 नवलपरासी वेस्ट से बरामद किए गए हैं।<br />नेपाल पुलिस ने यह भी बताया कि भारत में नौ शव बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान के बाद उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है। इससे एक दिन पहले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह ने फेसबुक पोस्ट में कहा था कि बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों और जिनकी पहचान नहीं हो पाई है, उनके शवों का प्रबंधन कानून के अनुसार और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा रहा है।<br />उन्होंने कहा-सरकार सिर्फ उन शवों को संभाल रही है जिनकी पहचान नहीं हो पाई है, साथ ही वह डीएनए सैंपल और दूसरे सबूत भी सुरक्षित रख रही है जिनसे उनकी पहचान में मदद मिल सके।  नेपाली सेना,  नेपाल पुलिस और नेपाल की आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स की मदद से शवों को संभाला जा रहा है। पहचान हो चुके शव उनके परिवारों को सौंपे जा रहे हैं।<br />इसके अलावा, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि भोटे कोशी नदी में आई भयानक बाढ़ के बाद, अहम हाइड्रोपावर साइट्स पर नेपाली सेना के साथ-साथ भारत और चीन की खास इंटरनेशनल टनल रेस्क्यू टीम को भी तैनात किया गया है।<br />काठमांडू में मंत्रालय की चौथी आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता और पब्लिक डिप्लोमेसी डिवीजन के प्रमुख लोक बहादुर छेत्री ने बताया कि जमीन के नीचे जोखिम भरे ऑपरेशन को संभालने के लिए खास अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा रहा है।<br />छेत्री ने कहा-जैसा कि हमने पहले ही बताया है, हमारी तत्काल राष्ट्रीय प्राथमिकता स्पष्ट है, लोगों की जान बचाना, लापता लोगों का पता लगाना, बचे हुए लोगों को बचाना, तुरंत राहत पहुंचाना और यह सुनिश्चित करना कि प्रभावित सभी लोगों को चाहे वे नेपाली हों या विदेशी नागरिक उचित सहायता और समर्थन मिले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:39:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>31 बांग्लादेशियों को बेंगलुरु से मालदा लाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : वे काम की तलाश में बांग्लादेश से भारत आए थे और बाद में बेंगलुरु के अलग-अलग इलाकों में फैल गए। कर्नाटक पुलिस ने हाल ही में उनके खिलाफ एक ऑपरेशन चलाया था, और उस दौरान हिरासत में लिए गए 31 बांग्लादेशी नागरिकों को अब पश्चिम बंगाल के मालदा लाया गया है।<br />इन 31 लोगों को लेकर एक स्पेशल ट्रेन मंगलवार रात मालदा टाउन स्टेशन पहुंची। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टेशन पर पहले से ही पुलिस तैनात थी और कर्नाटक पुलिस की 20 सदस्यों की टीम इस ग्रुप के साथ आई थी। उसी रात बाद में, हिरासत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/31-bangladeshis-brought-to-malda-from-bengaluru/article-3576"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/0491b15e-14cf-4495-9bb3-97cb9b3443d4.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : वे काम की तलाश में बांग्लादेश से भारत आए थे और बाद में बेंगलुरु के अलग-अलग इलाकों में फैल गए। कर्नाटक पुलिस ने हाल ही में उनके खिलाफ एक ऑपरेशन चलाया था, और उस दौरान हिरासत में लिए गए 31 बांग्लादेशी नागरिकों को अब पश्चिम बंगाल के मालदा लाया गया है।<br />इन 31 लोगों को लेकर एक स्पेशल ट्रेन मंगलवार रात मालदा टाउन स्टेशन पहुंची। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टेशन पर पहले से ही पुलिस तैनात थी और कर्नाटक पुलिस की 20 सदस्यों की टीम इस ग्रुप के साथ आई थी। उसी रात बाद में, हिरासत में लिए गए लोगों को मालदा ज़िला पुलिस को सौंप दिया गया।<br />पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें अभी एक होल्डिंग सेंटर में रखा गया है। इसके बाद उन्हें वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।  उन्हें मालदा बॉर्डर के रास्ते बांग्लादेश वापस भेजने का इंतज़ाम किया जा सकता है।<br />मालूम हो कि बीते 9 अगस्त को कर्नाटक पुलिस ने बेंगलुरु के व्हाइटफ़ील्ड और इलेक्ट्रॉनिक सिटी इलाकों में 'ऑपरेशन मुक्ता'  नाम से एक स्पेशल ड्राइव चलाई थी। ऑपरेशन के दौरान, 2,944 लोगों के पहचान पत्र और ज़रूरी दस्तावेज़ों की जांच की गई।<br />पुलिस सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान 105 लोगों की पहचान बांग्लादेशी घुसपैठियों के तौर पर हुई। इनमें से 31 लोगों को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें बेंगलुरु से मालदा भेजने का फ़ैसला किया गया।<br />पुलिस का कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों के पास भारत में रहने के लिए वैध दस्तावेज़ नहीं थे। आरोप है कि वे अलग-अलग समय पर बॉर्डर पार करके भारत आए थे। भारत आने के बाद, वे बेंगलुरु चले गए और तरह-तरह के मज़दूरी के काम करने लगे—कुछ कंस्ट्रक्शन में तो कुछ दूसरे तरह के शारीरिक काम में—और लंबे समय तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में रहे। अब उनकी पहचान और भारत में घुसने के लिए अपनाए गए रास्तों की और बारीकी से जांच की जा रही है। जांच करने वाले यह भी देख सकते हैं कि क्या भारत में घुसने में किसी दलाल या तस्करी करने वाले गिरोह ने उनकी मदद की थी।<br />इन बांग्लादेशी नागरिकों को बेंगलुरु से मालदा भेजने से घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही घुसपैठ के खिलाफ़ कड़ा रुख अपना चुके हैं और केंद्र की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति पर ज़ोर दे चुके हैं।<br />यह भी दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठ रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। बॉर्डर के कई इलाकों में होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं और प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पकड़े गए घुसपैठियों को वहीं रखा जा रहा है। बांग्लादेशी नागरिकों को बॉर्डर पार वापस भेजने की पहल पहले भी की जा चुकी है। बेंगलुरु से मालदा भेजे गए 31 लोगों का मामला इसी चल रही प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।<br />मालदा बांग्लादेश सीमा के बहुत नजदीक  है,  इसलिए यह ज़िला लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, वापस भेजने से पहले उनकी पहचान की पुष्टि करना, ज़रूरी दस्तावेज़ों की जांच करना और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना ज़रूरी है।<br />इस मामले से जुड़ी एक और बात सामने आई है: घुसपैठिए सिर्फ़ सीमावर्ती राज्यों में ही नहीं रह रहे हैं,  बल्कि काम-धंधे के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भी जा रहे हैं। नतीजतन, एक राज्य में पकड़े जाने के बाद, उन्हें किसी दूसरे राज्य की सीमा से वापस भेजने की व्यवस्था की जा रही है। अब मालदा में बने होल्डिंग सेंटर पर ध्यान दिया जा रहा है।  प्रशासन इन 31 लोगों की जांच की प्रगति, उनकी असली पहचान की पुष्टि और उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की समय-सीमा पर बारीकी से नज़र रख रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:38:27 +0530</pubDate>
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                <title>सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की रहस्यमयी मौत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की रहस्यमयी मौत की जांच सीबीआई  को सौंप दी है। बुधवार को कोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर  दर्ज करने और मामले की गहन जांच करने का निर्देश दिया।<br />बॉम्बे हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीत सिंह मोरे शामिल थे, ने कहा कि जांच किसी वरिष्ठ और अनुभवी सीबीआई  अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने तक किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता। मुंबई पुलिस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/entertainment/mysterious-death-of-sushant-singh-rajputs-manager-disha-salian/article-3575"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/76c15d03-0129-4759-8719-41ad4843522e.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की रहस्यमयी मौत की जांच सीबीआई  को सौंप दी है। बुधवार को कोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर  दर्ज करने और मामले की गहन जांच करने का निर्देश दिया।<br />बॉम्बे हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीत सिंह मोरे शामिल थे, ने कहा कि जांच किसी वरिष्ठ और अनुभवी सीबीआई  अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने तक किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता। मुंबई पुलिस को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया गया है। बेंच ने कहा-अगर जांच में पता चलता है कि घटना के संबंध में कोई मामला नहीं बनता है,  तो सीबीआई  को निचली अदालत में एक समरी रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। यह भी कहा गया कि सतीश सालियन—दिशा के पिता और मामले में याचिकाकर्ता—को उस रिपोर्ट को चुनौती देने का मौका मिलेगा। सीबीआई  को जांच के हिस्से के तौर पर सतीश का बयान दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया है।<br />दिशा की मौत 8 जून, 2020 को हुई थी।  दावा किया गया था कि वह मलाड में एक ऊंची इमारत की 14वीं मंजिल से गिर गई थीं। छह दिन बाद, सुशांत अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए। दिशा की मौत के हालात को लेकर सवाल उठे। सतीश ने आरोप लगाया कि दिशा के साथ गैंग-रेप और हत्या की गई थी,  और ये आरोप उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे की ओर इशारा कर रहे थे।<br />हालांकि,  मुंबई पुलिस ने पहले बॉम्बे हाई कोर्ट को एक अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कहा गया था कि दिशा ने आत्महत्या की थी। पुलिस ने सतीश के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप या यौन उत्पीड़न का कोई संकेत नहीं मिला। पुलिस का दावा था कि दिशा पारिवारिक समस्याओं और काम के दबाव जैसे कारणों से मानसिक तनाव से जूझ रही थीं, जिसके चलते उन्होंने यह कठोर कदम उठाया। हालांकि, सतीश ने इस दावे को मानने से इनकार कर दिया और हाई कोर्ट का रुख किया; कोर्ट ने अब इस मामले की जांच सीबीआई  को सौंप दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:36:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>'जेन ज़ी'  को लुभाने के लिए मोदी की बड़ी पहल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: नीट  पेपर लीक के विरोध में देश के युवाओं का आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी)  के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन को ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, खासकर 'जेन ज़ी'  के बीच। इस आंदोलन का असर अब बीजेपी  और केंद्र सरकार की रणनीतियों में भी साफ़ दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवा पीढ़ी से सीधे जुड़ने की पहल कर रहे हैं। यह योजना सिर्फ़ भाषण देने तक सीमित नहीं है; कॉलेजों में जाकर छात्रों से सीधे बातचीत करने की भी कोशिश की जा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/modis-big-initiative-to-woo-gen-z/article-3574"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/655bf0c8-637a-4364-b9bd-8e4a982707d5.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: नीट  पेपर लीक के विरोध में देश के युवाओं का आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी)  के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन को ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, खासकर 'जेन ज़ी'  के बीच। इस आंदोलन का असर अब बीजेपी  और केंद्र सरकार की रणनीतियों में भी साफ़ दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवा पीढ़ी से सीधे जुड़ने की पहल कर रहे हैं। यह योजना सिर्फ़ भाषण देने तक सीमित नहीं है; कॉलेजों में जाकर छात्रों से सीधे बातचीत करने की भी कोशिश की जा रही है।<br />तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स का दौरा कर सकते हैं। वहां वे कॉलेज के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में भाषण देंगे। इसके बाद, वे छात्रों से सीधे बातचीत कर सकते हैं, उनके सवाल सुन सकते हैं और भविष्य को लेकर उनकी चिंताओं और आशंकाओं को समझ सकते हैं।<br />नीट  विरोध प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक हलकों में 'जेन ज़ी'  को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों से शुरू हुए इस आंदोलन ने देश भर के युवाओं को एकजुट कर दिया। इस आंदोलन की एक मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा थी।<br />शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद सीजेपी  ने आखिरकार अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया। हालांकि, संगठन और 'जेन ज़ी'  की शिकायतें राजनीतिक चर्चा से गायब नहीं हुई हैं। इसके बजाय, एक बड़ा सवाल सामने आया है: कौन सी राजनीतिक ताकत देश के युवाओं का दिल जीतने में सफल होगी?  यहीं पर बीजेपी  की नई रणनीति अहम हो जाती है। यह तरीका पारंपरिक राजनीतिक रैलियों से कहीं आगे है;  कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिशें बढ़ रही हैं।<br />सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग केंद्रीय मंत्रियों को भी विश्वविद्यालयों का दौरा करने और छात्रों से बातचीत करने की ज़िम्मेदारी सौंपी जा रही है। इस योजना में सरकार की शिक्षा से जुड़ी पहलों, रोज़गार अभियानों और युवाओं के लिए उठाए गए कदमों को उजागर करना शामिल है। साथ ही, सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्रियों की सक्रियता बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है।<br />ऐसा इसलिए है क्योंकि 'जेन ज़ी' का राजनीतिक व्यवहार पिछली पीढ़ियों से काफी अलग है। वे सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं, किसी खास मुद्दे पर तेज़ी से लोगों को एकजुट करने में सक्षम हैं और ऐसे आंदोलन खड़े कर सकते हैं जो पारंपरिक राजनीतिक पहचान से परे हों।<br />सीजेपी  आंदोलन ने इसी क्षमता को उजागर किया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संगठन के आंदोलन को देश के युवाओं के बीच तेज़ी से पहचान मिली। संगठन के नेताओं ने शुरू में संकेत दिया था कि वे तुरंत चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय एक बड़े युवा आंदोलन पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करेंगे। हालांकि, स्थिति पूरी तरह से रुकी नहीं। सीजेपी  ने पहले 5 सितंबर को दिल्ली में एक नई युवा रैली करने का आह्वान किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आंदोलन खत्म होने के समय केंद्र सरकार द्वारा किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए हैं।<br />हालांकि सीजेपी ने केंद्र सरकार के आश्वासन और एफआईआर  वापस लेने की प्रक्रिया में प्रगति के बाद 5 सितंबर की रैली रद्द कर दी, लेकिन 'जेन ज़ी'  में बीजेपी  की दिलचस्पी कम होती नहीं दिख रही है। इसके विपरीत, युवाओं से सीधे जुड़ने की पहल तेज़ हो रही है। इसलिए, मोदी का कॉलेज का दौरा सिर्फ़ भाषण देने तक सीमित नहीं है; इसका राजनीतिक महत्व भी है। नीट आंदोलन के बाद, केंद्र सरकार देश की युवा पीढ़ी तक एक नया संदेश पहुँचाने की इच्छुक है। सवाल यह है कि सरकार 'जेन ज़ी' की शिकायतों, आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनकी चिंताओं को किस हद तक समझ सकती है?  प्रधानमंत्री शिक्षक दिवस पर इसी सवाल को संबोधित करने का प्रयास कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:35:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>झाड़ग्राम की पहाड़ियों में मैंगनीज़ के भंडार मिल सकते हैं </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : झाड़ग्राम के पहाड़ी इलाकों में मैंगनीज़ के संभावित भंडार हो सकते हैं—यह विषय लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब, राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने इस संभावना का आकलन करने के लिए एक बड़ी पहल की है। झाड़ग्राम के कई इलाकों में 15 सितंबर से एक शुरुआती फ़ील्ड सर्वे शुरू होने वाला है जो 19 सितंबर तक चलेगा। इस सर्वे में सिमुलपाल,  लबानी और बांसपहाड़ी जैसी संभावित जगहों को शामिल किया जाएगा। यह काम पश्चिम बंगाल सरकार के खान और खनिज विभाग की मंज़ूरी से शुरू हो रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस सर्वे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/manganese-reserves-can-be-found-in-the-hills-of-jhargram/article-3573"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/c785295d-8905-4588-b98e-26d479a0668b.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : झाड़ग्राम के पहाड़ी इलाकों में मैंगनीज़ के संभावित भंडार हो सकते हैं—यह विषय लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब, राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने इस संभावना का आकलन करने के लिए एक बड़ी पहल की है। झाड़ग्राम के कई इलाकों में 15 सितंबर से एक शुरुआती फ़ील्ड सर्वे शुरू होने वाला है जो 19 सितंबर तक चलेगा। इस सर्वे में सिमुलपाल,  लबानी और बांसपहाड़ी जैसी संभावित जगहों को शामिल किया जाएगा। यह काम पश्चिम बंगाल सरकार के खान और खनिज विभाग की मंज़ूरी से शुरू हो रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस सर्वे का नेतृत्व एमओआईएल  लिमिटेड करेगा,  जो एक सरकारी कंपनी है और देश में मैंगनीज़ अयस्क के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। उनके साथ केंद्र और राज्य सरकारों की कई विशेषज्ञ एजेंसियां भी शामिल होंगी। सर्वे में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (जीएसआई)  और इंडियन ब्यूरो ऑफ़ माइन्स (आईबीएम)  भी पश्चिम बंगाल के खान और खनिज विभाग के साथ हिस्सा लेंगे। इसके अलावा, डब्ल्यूएमडीटीसीएल  के भी इस प्रक्रिया में शामिल होने की उम्मीद है।<br />इस सर्वे का मुख्य मकसद इलाके की भूवैज्ञानिक संरचना को समझना और अलग-अलग खनिजों की संभावना का आकलन करना है। खास तौर पर, ज़मीन के नीचे मैंगनीज़ की मौजूदगी और इसके संभावित भंडार की मात्रा के बारे में डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह सर्वे किसी खदान की खोज का पक्का सबूत नहीं है, यह असल में एक शुरुआती खोज है। अगर सर्वे से अच्छे नतीजे मिलते हैं,  तो आगे और विस्तृत खोज हो सकती है,  जिसमें खनिज की मात्रा,  गुणवत्ता और उसे निकालने की संभावना का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा।<br />झाड़ग्राम के पहाड़ी इलाकों में खनिज संसाधनों की संभावना के बारे में लंबे समय से बात होती रही है,  लेकिन अलग-अलग वजहों से इस दिशा में प्रगति रुकी हुई थी। अब इस मामले पर फिर से ध्यान दिया जा रहा है। झाड़ग्राम के विधायक लक्ष्मीकांत साव ने कहा कि ज़िले के पहाड़ी इलाकों में खनिज संसाधनों की संभावना लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा राज्य सरकार ने इस संभावना को प्राथमिकता दी है,  और केंद्र व राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर किए जा रहे सर्वे की पहल इस प्रतिबद्धता का सबूत है।<br />उन्होंने आगे कहा कि अगर झाड़ग्राम में मैंगनीज़ के बड़े भंडार मिलते हैं, तो इससे ज़िले की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। रोज़गार के नए मौके भी पैदा हो सकते हैं। मैंगनीज़ उद्योग के लिए एक ज़रूरी खनिज है;  इसका इस्तेमाल स्टील बनाने में होता है और कई दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी ज़रूरत होती है। इसलिए, अगर झाड़ग्राम में खनिजों का बड़ा भंडार मिलता है, तो इसका आर्थिक महत्व बहुत ज़्यादा हो सकता है।<br />हालांकि, माइनिंग से जुड़ी संभावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं भी बहुत ज़रूरी हैं। झाड़ग्राम के कई इलाके जंगलों और पहाड़ियों से घिरे हुए हैं। इसलिए, भविष्य में खनिज निकालने के बारे में कोई भी फ़ैसला लेते समय पर्यावरण के संतुलन, स्थानीय लोगों के जीवन और जंगल के इकोसिस्टम पर पड़ने वाले असर का ध्यान रखना होगा। अब सबकी नज़रें 15 सितंबर पर टिकी हैं, जिस दिन लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा सर्वे शुरू होने वाला है। यह पता लगाने का इंतज़ार है कि ज़मीन के नीचे असल में कितना मैंगनीज़ है। अगर सर्वे के नतीजे अच्छे रहे, तो इससे झाड़ग्राम के लिए नई संभावनाओं के दरवाज़े खुल सकते हैं, जिससे इंडस्ट्री, रेवेन्यू और रोज़गार में बदलाव आ सकता है। फिर भी, इस संभावना का असली दायरा तो सर्वे के बाद ही पता चलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/local/manganese-reserves-can-be-found-in-the-hills-of-jhargram/article-3573</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:33:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेख हसीना सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोगों के साथ खड़े होने के लिए बांग्लादेश लौटना चाहती हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: वे सत्ता में वापस आने के लिए नहीं, बल्कि देश के लोगों के साथ खड़ी होने के लिए बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वह अगले साल दिसंबर तक देश लौटने का इरादा रखती हैं, उन्होंने कहा कि सही तारीख, समय और एंट्री पॉइंट की घोषणा बाद में की जाएगी। हसीना ने कहा कि देश लौटने का फैसला उनका अपना है।<br />हसीना ने कहा कि वे अपनी वापसी की तारीख, समय और किस तरीके से बांग्लादेश पहुंचेंगी, इसकी जानकारी उचित समय पर देंगी। उन्होंने बांग्लादेश में जारी राजनीतिक संकट को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/sheikh-hasina-wants-to-return-to-bangladesh-not-for-power/article-3572"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-02-at-2.20.20-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता </strong></em>: वे सत्ता में वापस आने के लिए नहीं, बल्कि देश के लोगों के साथ खड़ी होने के लिए बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वह अगले साल दिसंबर तक देश लौटने का इरादा रखती हैं, उन्होंने कहा कि सही तारीख, समय और एंट्री पॉइंट की घोषणा बाद में की जाएगी। हसीना ने कहा कि देश लौटने का फैसला उनका अपना है।<br />हसीना ने कहा कि वे अपनी वापसी की तारीख, समय और किस तरीके से बांग्लादेश पहुंचेंगी, इसकी जानकारी उचित समय पर देंगी। उन्होंने बांग्लादेश में जारी राजनीतिक संकट को अनिश्चितकाल तक जारी रखने पर भी सवाल उठाया।<br />हिंदुस्तान टाइम्स को दिए अपने पहले टेलीफोनिक इंटरव्यू में हसीना से पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने भविष्य की योजना को लेकर भारत सरकार या ढाका की मौजूदा सरकार से कोई सलाह-मशविरा किया है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश लौटने का फैसला उनका अपना है। उन्होंने कहा-मेरा फैसला मेरा अपना है और यह मेरी पार्टी के भीतर राजनीतिक चर्चा का विषय है।<br />हसीना ने कहा कि ढाका में मौजूद बांग्लादेश सरकार के साथ उनका कोई राजनीतिक समझौता नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया और उसके नेताओं के खिलाफ हजारों मामले दर्ज किए, उनके साथ किसी गुप्त समझौते का हिस्सा बनने का सवाल ही नहीं उठता।<br />बांग्लादेश सरकार की ओर से उनके प्रत्यर्पण की मांग और प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित नई दिल्ली यात्रा के सवाल पर हसीना ने कहा कि प्रत्यर्पण के मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे खुद अपने देश लौटना चाहती हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि तारिक रहमान उनकी वापसी पर आपत्ति क्यों कर रहे हैं।<br />हसीना ने कहा-मैं अपने ही देश लौट रही हूं। क्या मैं पूरी जिंदगी विदेश में रह सकती हूं?  मुझे अपने देश और अपने लोगों के पास लौटना ही होगा।<br />भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर हसीना ने कहा कि ये रिश्ते केवल बातों से खराब नहीं होते। उनके मुताबिक, लोकतंत्र का खत्म होना, कट्टरपंथ को बढ़ने देना, अल्पसंख्यकों का असुरक्षित महसूस करना, क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा पैदा होना और राजनीतिक बदले के लिए सरकारी संस्थाओं के इस्तेमाल जैसी स्थितियां दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करती हैं।<br />हसीना ने कहा कि उन्होंने दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने की बात इसलिए कही है क्योंकि देश का राजनीतिक संकट अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकता। उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में आर्थिक प्रगति प्रभावित हो रही है। गरीबी तेजी से बढ़ रही है।<br />हसीना ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति सिर्फ अवामी लीग का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय संकट है। उन्होंने कहा कि जब विकास रुकता है तो रोजगार खत्म होते हैं और कानून-व्यवस्था कमजोर होने पर लोगों की सुरक्षा प्रभावित होती है।<br />बांग्लादेश में आर्थिक संकट के बीच हसीना ने चीन से लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सौदे की कीमत 2.3 अरब डॉलर है। जब देश आर्थिक जरूरतों से जूझ रहा है तो लड़ाकू विमान खरीदने पर इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:28:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>मुख्यमंत्री ने राज्य में 'अर्जुन वाहिनी' और अग्निवीरों के लिए विशेष आरक्षण की घोषणा की</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : राज्य सरकार ने रिटायर हो चुके सैनिकों को मिलाकर 'अर्जुन' नाम की एक खास आपदा प्रबंधन फ़ोर्स बनाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कोलकाता में एक कार्यक्रम में इस 'अर्जुन वाहिनी'  को बनाने की घोषणा की। अम्फान चक्रवात से लेकर तारातल्ला में इमारत गिरने जैसी घटनाओं का ज़िक्र करते हुए,  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के पास पहले सही ट्रेनिंग और उपकरण नहीं थे और इस सेक्टर पर पहले ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया था। उन्होंने आज 200 सदस्यों वाली 'अर्जुन वाहिनी'  को औपचारिक रूप से लॉन्च किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/chief-minister-announces-special-reservation-for-arjun-vahini-and-agniveer/article-3571"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-4.46.35-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : राज्य सरकार ने रिटायर हो चुके सैनिकों को मिलाकर 'अर्जुन' नाम की एक खास आपदा प्रबंधन फ़ोर्स बनाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कोलकाता में एक कार्यक्रम में इस 'अर्जुन वाहिनी'  को बनाने की घोषणा की। अम्फान चक्रवात से लेकर तारातल्ला में इमारत गिरने जैसी घटनाओं का ज़िक्र करते हुए,  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के पास पहले सही ट्रेनिंग और उपकरण नहीं थे और इस सेक्टर पर पहले ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया था। उन्होंने आज 200 सदस्यों वाली 'अर्जुन वाहिनी'  को औपचारिक रूप से लॉन्च किया और भविष्य में एनडीआरएफ  की तर्ज़ पर इस फ़ोर्स का विस्तार करने और इसे आधुनिक तकनीक से लैस करने की योजना की घोषणा की।<br />मुख्यमंत्री ने बताया कि फ़ोर्स में अभी 200 सदस्य हैं: 100 कोलकाता के लिए, 50 पहाड़ी इलाकों के लिए और 50 सुंदरबन इलाके के लिए, जो आपदा प्रबंधन का काम संभालेंगे। फ़ोर्स के प्रमुख,  जिन्हें 'वीर नायक'  (वीर नेता) कहा जाएगा,  उन्हें हर महीने 40,000 रुपए का मानदेय मिलेगा, जबकि सदस्यों—जिन्हें 'वीर' (वीर) कहा जाएगा—को हर महीने 25,000 रुपए मिलेंगे। उनके वेतन में हर साल 3 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। गंभीर चोट या मौत होने पर 10 लाख रुपए और विकलांगता होने पर 5 लाख रुपए का मुआवज़ा दिया जाएगा। 'अर्जुन वाहिनी'  रिटायर हो चुके सैनिकों और 'अग्निवीरों'  को मिलाकर बनाई जा रही है। फ़ोर्स ने 40 साल तक की उम्र के युवाओं और रिटायर हो चुके सैनिकों के साथ काम करना शुरू कर दिया है, और ये सभी राज्य सैनिक बोर्ड के तहत काम करेंगे।<br />जनवरी 2027 से, पुलिस, अग्निशमन, वन और आपदा प्रबंधन विभागों में भर्ती के लिए 'अग्निवीरों'  और रिटायर हो चुके सैनिकों के पहले बैच को प्राथमिकता दी जाएगी। इन अनुशासित सेवाओं में लगभग 20 फीसदी का आरक्षण कोटा तय किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा-हमने दूसरे राज्यों की तरह एनडीआरएफ की तर्ज़ पर एक आधुनिक फ़ोर्स बनाने का फ़ैसला किया। अभी के लिए, फ़ोर्स में 200 जवान शामिल किए गए हैं।<br />इसके अलावा, 'अर्जुन वाहिनी'  के सदस्यों ने तारातल्ला में गिरी इमारत के मलबे से लगभग 20 लोगों को ज़िंदा बचाया। इस बात पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा-पहले बचाव दलों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जाती थी। लेकिन अब फंड की कोई कमी नहीं है; भारत सरकार ने पर्याप्त आर्थिक मदद दी है। ज़्यादा पैसे कमाने की चाहत और संस्थागत भ्रष्टाचार के मौकों का फ़ायदा उठाने के कारण, अवैध रूप से इमारतें बनाई गई हैं, जलाशयों को भरकर घर बनाए गए हैं और बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए ही बिल्डिंग प्लान मंज़ूर कर दिए गए हैं। इस बीच, 'हिमालयन स्टडी'  का प्रस्ताव मुख्य सचिव को सौंप दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पहाड़ों की भौगोलिक स्थितियों का सर्वे करेंगी और उससे जुड़ी रिपोर्ट जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:04:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>अजय देवगन ने संभाली ‘क्राइम पेट्रोल’ शो की कमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : भारतीय टेलीविजन इतिहास में ‘क्राइम पेट्रोल’ केवल एक शो नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपे काले सच को सामने लाने वाला एक सशक्त आईना रहा है। 2026  के नए सीजन में जब बॉलीवुड के ‘सिंघम’  यानी अजय देवगन ने इस शो की कमान संभाली, तो उम्मीदों का आसमान छूना स्वाभाविक था। टीवी का ये नया सीजन न सिर्फ अपने होस्ट के बड़े स्टारडम को लेकर चर्चा में है, बल्कि उन विषयों को लेकर भी जिनमें अपराध की पुरानी, घिसी-पिटी और प्रेडिक्टेबल कहानियों को छोड़कर आज के दौर की कड़वी हकीकत को सामने रखा गया है। क्या अजय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/entertainment/ajay-devgan-takes-command-of-crime-patrol-show/article-3570"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-4.23.33-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : भारतीय टेलीविजन इतिहास में ‘क्राइम पेट्रोल’ केवल एक शो नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपे काले सच को सामने लाने वाला एक सशक्त आईना रहा है। 2026  के नए सीजन में जब बॉलीवुड के ‘सिंघम’  यानी अजय देवगन ने इस शो की कमान संभाली, तो उम्मीदों का आसमान छूना स्वाभाविक था। टीवी का ये नया सीजन न सिर्फ अपने होस्ट के बड़े स्टारडम को लेकर चर्चा में है, बल्कि उन विषयों को लेकर भी जिनमें अपराध की पुरानी, घिसी-पिटी और प्रेडिक्टेबल कहानियों को छोड़कर आज के दौर की कड़वी हकीकत को सामने रखा गया है। क्या अजय देवगन की मौजूदगी ने इस शो को नई ऊंचाई दी है या अनूप सोनी की छोड़ी हुई विरासत के सामने ये सीजन कहीं बिखरता दिखता है? <br />इस सीजन की सबसे बड़ी ताकत इसके विषय का चयन (टॉपिक सिलेक्शन) है। शो के मेकर्स ने इस बार ये समझदारी दिखाई है कि वो 90 के दशक या पुरानी रंजिशों के ट्रेडिशनल अपराधों में नहीं उलझे। पहले एपिसोड ‘बगावत’ से ही ये साफ हो जाता है कि फोकस आज की डिजिटल दुनिया पर है।<br />रील्स का नशा, एक स्वाइप पर बदलते इमोशंस और सोशल मीडिया से पैदा होने वाली असुरक्षा, ये ऐसे मुद्दे हैं जो सीधे तौर पर आज के हर घर और स्मार्टफोन स्क्रीन से जुड़े हैं। पहले एपिसोड की कहानी इतनी रिलेटेबल है कि दर्शक स्क्रीन देखते हुए यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि ये हादसा उसके अपने पड़ोस या परिवार में भी हो सकता था। विषय चयन के मामले में ये सीजन पूरे नंबर ले जाता है।<br />मेकर्स का  अजय देवगन  को बतौर होस्ट चुनना एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित होता है। स्क्रीन पर आते ही उनका वही ट्रेडमार्क ठहराव, आंखों की गंभीरता और भारी-भरकम आवाज समां बांध देती है। वो किसी उपदेशक की तरह भाषण नहीं देते, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक की तरह सवाल खड़े करते हैं। जब वो कहते हैं कि क्या हमारे इमोशंस भी अब स्क्रोल होने लगे हैं?  तो उनकी आवाज की गहराई सीधे दिल पर वार करती है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस में वो वजन है, जो एक क्राइम-अवेयरनेस शो के होस्ट में होनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 16:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए केंद्र सरकार की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अब चीनी डीलर 2,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी स्टॉक में नहीं रख पाएंगे। अभी यह सीमा 4,000 क्विंटल है जो 1 अगस्त 2026 से लागू है। नई सीमा 15 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। यह फैसला घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए लिया गया है।<br />15 सितंबर से कोई भी चीनी डीलर स्टॉक मिलने की तारीख से 30 दिन से ज्यादा समय तक चीनी रोककर नहीं रख</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/central-governments-initiative-to-stop-hoarding-and-betting/article-3569"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-4.12.46-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अब चीनी डीलर 2,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी स्टॉक में नहीं रख पाएंगे। अभी यह सीमा 4,000 क्विंटल है जो 1 अगस्त 2026 से लागू है। नई सीमा 15 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। यह फैसला घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए लिया गया है।<br />15 सितंबर से कोई भी चीनी डीलर स्टॉक मिलने की तारीख से 30 दिन से ज्यादा समय तक चीनी रोककर नहीं रख सकेगा। इसके अलावा देश में कहीं भी, किसी भी समय, 2,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी स्टॉक में रखने की इजाजत नहीं होगी।<br /> वहीं, दूसरी तरफ, कोलकाता और उससे लगे महानगरीय इलाकों के लिए स्टॉक लिमिट पहले की तरह 4,000 क्विंटल ही रहेगी। सरकार के मुताबिक, कोलकाता उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से चीनी मंगाता है। यहां से पूर्वी भारत के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों तक चीनी की सप्लाई होती है। इसी वजह से इस इलाके के लिए पुरानी सीमा बरकरार रखी गई है।<br />सरकार ने बताया कि देशभर में चीनी मिलों, डीलरों और कारोबारियों के स्टॉक की निगरानी और भौतिक जांच की जा रही है। इस जांच में तय सीमा से ज्यादा स्टॉक रखने, स्टॉक की जानकारी छिपाने और चीनी की आवाजाही व बिक्री में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं।<br />मंत्रालय के मुताबिक इन कदमों और बाजार में बेहतर उपलब्धता के चलते हाल के दिनों में एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है। रिटेल कीमतों में भी गिरावट का रुझान दिखने लगा है और आगे इनमें और कमी आने की उम्मीद जताई गई है।<br />खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर चीनी स्टॉक की नियमित घोषणा और अपडेट की व्यवस्था पहले से बनाई गई है। सरकार ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में मिलों, डीलरों और कारोबारियों के स्टॉक की भौतिक जांच जारी रहेगी। साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि असली कारोबार और वितरण का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 16:42:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>Gambheer Samachar</title>
                                    <description><![CDATA[<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-001.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-001.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-001" width="1200" height="1200" /></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-002.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-002.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-002" width="1200" height="1200" /></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-003.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-003.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-003" width="1200" height="1200" /></a></p>
<p>  </p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-004.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-004.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-004" width="1200" height="1200" /></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-005.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-005.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-005" width="1200" height="1200" /></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-006.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-006.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-006" width="1200" height="1200" /></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-007.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-007.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-007" width="1200" height="1200" /></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-008.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-008.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-008" width="1200" height="1200" /></a></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/e-paper/gambheer-news/article-3568"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-001.jpg" alt=""></a><br /><p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-001.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-001.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-001" width="2079" height="3130"/></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-002.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-002.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-002" width="2079" height="3130"/></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-003.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-003.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-003" width="2079" height="3130"/></a></p>
<p> </p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-004.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-004.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-004" width="2079" height="3130"/></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-005.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-005.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-005" width="2079" height="3130"/></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-006.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-006.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-006" width="2079" height="3130"/></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-007.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-007.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-007" width="2079" height="3130"/></a></p>
<p><a href="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-008.jpg"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/2026-09/gambheer-samachar--(31.08.2026)-page-008.jpg" alt="GAMBHEER SAMACHAR  (31.08.2026)-page-008" width="2079" height="3130"/></a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>E-Paper</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 16:35:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्र की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज 129 एफआईआर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : केंद्र सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कॉकरोच मूवमेंट के दौरान राजधानी दिल्ली और 4 राज्यों में प्रदर्शन को लेकर छात्रों के खिलाफ दर्ज 129 एफआईआर रद्द कर दी गई हैं। सरकार का कहना है प्रदर्शन खत्म होने के दौरान उसने छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा कर लिया है। मंगलवार को सरकार ने एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने की अपील की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।<br />चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने फैसला सुनाते हुए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/on-the-appeal-of-the-centre-the-supreme-court-canceled/article-3567"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-4.02.25-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : केंद्र सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कॉकरोच मूवमेंट के दौरान राजधानी दिल्ली और 4 राज्यों में प्रदर्शन को लेकर छात्रों के खिलाफ दर्ज 129 एफआईआर रद्द कर दी गई हैं। सरकार का कहना है प्रदर्शन खत्म होने के दौरान उसने छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा कर लिया है। मंगलवार को सरकार ने एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने की अपील की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।<br />चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अब यह एफआईआर इतिहास है। इस पर कोई एक्शन नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर कोई भी बड़ा फैसला ले सकता है, जिसे बाद में किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। वहीं एफआईआर रद्द होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर के मार्च को रद्द करने का फैसला किया है।<br />केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी से वादा किया था कि अगर आंदोलन वापस ले लिए जाते हैं, तो मामले वापस ले लिए जाएंगे। मैंने दिल्ली के लिए लिस्ट दे दी है।<br />इसके बाद बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल ने भी केस वापिस की याचिका दाखिल की। इन राज्यों ने भी कहा कि हम केस वापस ले रहे हैं। इन सभी राज्यों में कुल 129 एफआईआर दर्ज थे।<br />फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर किसी अन्य राज्यों में भी कोई मुकदमा दर्ज है तो हम चाहते हैं कि वे जांच को आगे न बढ़ाएं।<br />एसजी ने कहा कि 2873 लोगों के खिलाफ़ शारीरिक चोट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए एक नई एफआईआर  है। 4 राज्यों ने भी ऐसी ही अर्जियां दी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एसजी  से पैरा 5 पढ़ने को कहा, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में कोई नई एफआईआर  नहीं और 2873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर है। कई वकीलों ने इसका विरोध भी किया। इनका कहना था कि कोर्ट में उन सभी 2873 लोगों की डिटेल रखी जाए।<br />तीसरा आश्वासन उन छात्रों के मुआवज़े के बारे में था जिनकी मौत हो गई थी। मैं यह कहने के लिए अधिकृत हूं कि सरकार उस आश्वासन पर कायम है। समस्या सिर्फ़ तौर-तरीकों को लेकर है। कई परीक्षाएं हैं। यहां जो कुछ भी होता है, वह एक बेंचमार्क बन जाता है। मैं अनुरोध करता हूं कि केंद्र सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्ज करते हुए कि हम इस आश्वासन का पालन करेंगे, मुझे तौर-तरीकों पर काम करने के लिए 3 महीने का समय दिया जाए।<br />सीजेआई ने कहा कि अगर दोनों पक्ष तैयार हैं तो फिर कोई भी मामला हल हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 16:11:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे गंभीर रूप से बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। उन्हें सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। खबरों के मुताबिक, 89 वर्षीय कार्यकर्ता किडनी इन्फेक्शन और डिहाइड्रेशन से जूझ रहे हैं।<br />सूत्रों के अनुसार, अन्ना का इलाज महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि के एक अस्पताल में चल रहा था, जहां उनकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद,  उन्हें सोमवार को मुंबई के एक प्राइवेट अस्पताल में तुरंत भर्ती कराया गया।<br />अस्पताल ने अभी तक अन्ना की सेहत के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अभी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/social-activist-anna-hazare-seriously-ill/article-3566"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-3.46.47-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। उन्हें सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। खबरों के मुताबिक, 89 वर्षीय कार्यकर्ता किडनी इन्फेक्शन और डिहाइड्रेशन से जूझ रहे हैं।<br />सूत्रों के अनुसार, अन्ना का इलाज महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि के एक अस्पताल में चल रहा था, जहां उनकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद,  उन्हें सोमवार को मुंबई के एक प्राइवेट अस्पताल में तुरंत भर्ती कराया गया।<br />अस्पताल ने अभी तक अन्ना की सेहत के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अभी वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं। गौरतलब है कि यूपीए  सरकार के कार्यकाल के दौरान अन्ना के 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी। कई लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल कानून लागू करने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर की गई उनकी भूख हड़ताल ने तत्कालीन यूपीए  सरकार की नींव हिला दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.gambheersamachar.in/national/social-activist-anna-hazare-seriously-ill/article-3566</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:50:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नोएडा में चलती बस में छात्रा के साथ गैंगरेप</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की एक स्कूल की छात्रा अपनी मां से झगड़े के बाद घर से निकल गई थी। उसने नोएडा के सेक्टर 63 में अपने चाचा के घर जाने का फैसला किया। वह 4 अगस्त की रात थी। क्लास 11 की छात्रा मैनपुरी से ग्रेटर नोएडा के परी चौक तक 300  किमी  का सफर तय करके आई थी। लेकिन उसे नोएडा जाना था। वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई थी। रात हो चुकी थी, और तेज बारिश हो रही थी। सड़क पर लाइट भी नहीं थी। ऐसे में छात्रा बहुत डरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/uttar-pradesh/gang-rape-of-student-in-moving-bus-in-noida/article-3565"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-3.12.21-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की एक स्कूल की छात्रा अपनी मां से झगड़े के बाद घर से निकल गई थी। उसने नोएडा के सेक्टर 63 में अपने चाचा के घर जाने का फैसला किया। वह 4 अगस्त की रात थी। क्लास 11 की छात्रा मैनपुरी से ग्रेटर नोएडा के परी चौक तक 300  किमी  का सफर तय करके आई थी। लेकिन उसे नोएडा जाना था। वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई थी। रात हो चुकी थी, और तेज बारिश हो रही थी। सड़क पर लाइट भी नहीं थी। ऐसे में छात्रा बहुत डरी हुई थी।<br />पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छात्रा रात में सड़क पर अकेले इंतजार करने से डरी हुई थी। कुछ देर इंतजार करने के बाद, जब उसने एक बस देखी, तो उसे थोड़ा भरोसा हुआ और उसने उसे रुकने के लिए कहा। इत्तेफाक से, बस कोई रेगुलर बस नहीं थी। यह एक स्लीपर बस थी। बस को ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में एक गैरेज में रिपेयर होने के बाद पेंटिंग के लिए दिल्ली के कश्मीरी गेट ले जाया जा रहा था। ड्राइवर और कंडक्टर बस में थे। लड़की को देखकर उन्होंने बस रोक दी। डरी हुई लड़की ने उनसे कहा कि उसे नोएडा के सेक्टर 63 जाना है। फिर ड्राइवर और कंडक्टर दोनों ने कहा-हम उस तरफ जा रहे हैं। चलो तुम्हें उतार देते हैं।<br />दोनों से मदद का भरोसा मिलने के बाद लड़की को विश्वास हो गया और उसी विश्वास और दोनों की बातों पर यकीन करके वह बस में चढ़ गई। कहा जा रहा है कि लड़की के चढ़ते ही बस चलने लगी। यह एक एसी स्लीपर बस थी। हर खिड़की के शीशे पर पर्दे लगे थे। बस की स्पीड बढ़ गई। कहा जा रहा है कि इसके बाद लड़की को गंदी-गंदी बातें बताई गईं। जब लड़की ने विरोध किया तो कंडक्टर ने चलती बस में उसके साथ रेप किया। फिर बस ड्राइवर ने। वे इसी तरह लड़की को टॉर्चर करते रहे। नोएडा पहुंचने के बाद बस दिल्ली की तरफ मुड़ गई। 43 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद बस दिल्ली के कश्मीरी गेट पहुंची। आरोपियों ने लड़की को रिंग रोड के पास छोड़ दिया। वहां से लड़की पास के पुलिस स्टेशन पहुंची। वहां उसने पूरी घटना की रिपोर्ट दी। लड़की से शिकायत मिलने और घटना का ब्यौरा सुनने के बाद पुलिस ने बस की तलाश शुरू कर दी। जिस रास्ते से बस कश्मीरी गेट पहुंची, वहां के सीसीटीवी  फुटेज की जांच करने के बाद पुलिस ने बस की पहचान कर ली। इसके बाद पुलिस की एक टीम को बस की लोकेशन तिमारपुर में मिली। वहां दोनों आरोपी बस के अंदर आराम कर रहे थे। पुलिस ने वहां से दोनों को गिरफ्तार कर लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गौशाला में गायों के ठीक बगल में एक विशालकाय गैंडा!</title>
                                    <description><![CDATA[<p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : हर रात, वह बुज़ुर्ग महिला अपने मवेशियों को देखने के लिए गौशाला जाती हैं। रविवार की रात भी वह आदत के अनुसार वहां गईं,  लेकिन अंदर घुसते ही वह हैरान रह गईं। गाय के पास वह क्या था?  एक विशाल ग्रे शरीर, जिसके थूथन से एक नुकीला सींग निकला हुआ था—एक जीव जो अपनी छोटी-छोटी आंखों से उन्हें घूर रहा था। महिला डर गईं;  उनकी गौशाला के अंदर ही एक विशाल गैंडा आ गया था। <br />पैंसठ साल की धनबाला रॉय ने कभी सोचा भी नहीं था कि गायों की देखभाल करते समय उनका सामना गैंडे से होगा।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/a-giant-rhinoceros-right-next-to-the-cows-in-the/article-3564"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-3.01.04-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : हर रात, वह बुज़ुर्ग महिला अपने मवेशियों को देखने के लिए गौशाला जाती हैं। रविवार की रात भी वह आदत के अनुसार वहां गईं,  लेकिन अंदर घुसते ही वह हैरान रह गईं। गाय के पास वह क्या था?  एक विशाल ग्रे शरीर, जिसके थूथन से एक नुकीला सींग निकला हुआ था—एक जीव जो अपनी छोटी-छोटी आंखों से उन्हें घूर रहा था। महिला डर गईं;  उनकी गौशाला के अंदर ही एक विशाल गैंडा आ गया था। <br />पैंसठ साल की धनबाला रॉय ने कभी सोचा भी नहीं था कि गायों की देखभाल करते समय उनका सामना गैंडे से होगा। जलपाईगुड़ी के रामशाही बाज़ार इलाके की रहने वाली धनबाला जंगल के काफी करीब रहती हैं—यह जंगल हाथियों, तेंदुओं और एक सींग वाले गैंडों का घर है। हालांकि ये जानवर अक्सर आसपास के इलाकों में घूमते रहते हैं, लेकिन पहले कभी कोई जानवर सीधे गौशाला में नहीं घुसा था। धनबाला रोज़ रात में कम से कम एक बार अपने मवेशियों को देखने जाती हैं, और रविवार को भी वह ऐसा ही कर रही थीं। रात के करीब 8:45 बज रहे थे। जब वह गौशाला से अपने घर लौटने के लिए निकल रही थीं,  तभी अचानक एक जानवर ने ज़ोरदार टक्कर मारी और भाग गया। बुज़ुर्ग महिला कई फीट पीछे जा गिरीं। तब तक, पूरे रामशाही बाज़ार इलाके में "गैंडा! गैंडा!" का शोर मच चुका था।<br />जलपाईगुड़ी फॉरेस्ट डिवीज़न की रामशाही रेंज के अधिकारी बसीरुल इस्लाम ने बताया कि उनकी नाइट पेट्रोल वैन घटना स्थल से कुछ ही मीटर की दूरी पर तैनात थी। शोर सुनकर वे तुरंत वहां पहुंचे। महिला को बचाने के लिए एक और स्पेशल वैन भेजी गई।  उन्हें पहले मैनागुड़ी अस्पताल ले जाया गया और उसी रात जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।<br />वन विभाग के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, भटका हुआ गैंडा अंधेरे का फायदा उठाकर रामशाही जंगल—जो गोरुमारा नेशनल पार्क का हिस्सा है—से निकलकर रिहायशी इलाके में आ गया था। आसपास के माहौल से घबराकर जानवर इधर-उधर भागने लगा और गौशाला में छिप गया। फिर इंसान को देखकर चौंकने के बाद वह तेज़ी से बाहर भाग गया। गैंडे के हमले में धनबाला देवी घायल हो गईं। उसी रात, वन विभाग के अधिकारियों ने उस जानवर को जलढाका नदी के रेतीले किनारों की ओर खदेड़ दिया। वन विभाग ने बताया कि सोमवार तड़के वह गैंडा गोरुमारा जंगल में घुस गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:20:29 +0530</pubDate>
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                <title>ममता की भतीजी ने की आत्महत्या </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भतीजी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। मंगलवार दोपहर रामपुरहाट स्थित घर पर वृष्टि मुखर्जी का शव फंदे से लटका हुआ मिला। परिवार का दावा है कि उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या की। बताया जा रहा है कि वह पिछले चार-पांच साल से क्लिनिकल डिप्रेशन से जूझ रही थीं और उनका इलाज चल रहा था। शिक्षक भर्ती घोटाले में नाम आने के बाद वृष्टि की 'ग्रुप-सी' की नौकरी चली गई थी। हाल ही में तलाक की कार्यवाही के कारण वह और भी गहरे अवसाद में चली गई थीं। स्वाभाविक रूप से,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/mamtas-niece-committed-suicide/article-3563"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-2.51.22-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भतीजी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। मंगलवार दोपहर रामपुरहाट स्थित घर पर वृष्टि मुखर्जी का शव फंदे से लटका हुआ मिला। परिवार का दावा है कि उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या की। बताया जा रहा है कि वह पिछले चार-पांच साल से क्लिनिकल डिप्रेशन से जूझ रही थीं और उनका इलाज चल रहा था। शिक्षक भर्ती घोटाले में नाम आने के बाद वृष्टि की 'ग्रुप-सी' की नौकरी चली गई थी। हाल ही में तलाक की कार्यवाही के कारण वह और भी गहरे अवसाद में चली गई थीं। स्वाभाविक रूप से, इस असामान्य मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।<br />ममता बनर्जी का ननिहाल रामपुरहाट के कुसुम्बा गांव में है। वृष्टि मुखर्जी, रामपुरहाट ब्लॉक-1 के तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष निहार मुखर्जी की बेटी थीं। वृष्टि एक स्थानीय स्कूल में ग्रुप-सी कर्मचारी के तौर पर काम करती थीं। भर्ती घोटाले की जांच शुरू होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री की भतीजी जांच के दायरे में आ गई थीं। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए सबूतों से ग्रुप-सी परीक्षा की 90 फीसदी ओएमआर  शीट में गड़बड़ी का पता चला; इससे संकेत मिला कि नौकरियां हेरफेर और भाई-भतीजावाद के जरिए हासिल की गई थीं। शुरुआती जांच में वृष्टि की पहचान उन लोगों में से एक के तौर पर हुई जिन्होंने गलत तरीकों से नौकरी पाई थी। इसके बाद, कानूनी कार्यवाही के चलते उनकी नौकरी चली गई।<br />मंगलवार दोपहर, कुसुम्बा गांव स्थित उनके घर की दूसरी मंजिल की बालकनी में वृष्टि का शव फंदे से लटका हुआ मिला, और उनके गले में कपड़े का एक टुकड़ा बंधा हुआ था। खबर मिलने पर रामपुरहाट पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेजा गया। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है, हालांकि इस कदम के पीछे की वजह अभी पता नहीं चल पाई है। रामपुरहाट पुलिस ने मौत का सही कारण पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वृष्टि चार-पांच साल से डिप्रेशन से जूझ रही थीं और हाल के दिनों में ज्यादातर अपने कमरे में ही रहती थीं। एक रिश्तेदार ने बताया-वह डिप्रेशन से जूझ रही थी और उसका इलाज चल रहा था। वह अपने कमरे में अकेली रहती थी और हमसे ज़्यादा बात नहीं करती थी। आज सुबह भी वह अपने कमरे में ही थी; उसके बाद किसी ने उसे बाहर नहीं देखा। बाद में मुझे पता चला कि वह फंदे से लटकी हुई मिली। मुझे नहीं पता कि अचानक क्या हुआ।" एक अन्य सूत्र के अनुसार, वृष्टि का तलाक का मामला चल रहा था, जो उसके दिमाग पर बहुत भारी पड़ रहा था। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या आत्महत्या की वजह यही थी या कोई और दबाव था। इस घटना के बाद कुसुम्बा गांव में मातम छा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:17:19 +0530</pubDate>
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                <title>सीएम शुभेंदु का बड़ा ऐलान </title>
                                    <description><![CDATA[हेल्थ इंश्योरेंस भी मिलेगा ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/local/cm-shubhendus-big-announcement/article-3562"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-2.33.58-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। उन्होंने रिटायर हो चुके पत्रकारों की मासिक पेंशन बढ़ाकर 5,000 रुपए करने का ऐलान किया। साथ ही, काम कर रहे पत्रकारों के लिए पूजा से पहले मिलने वाले बोनस को बढ़ाकर 3,000 रुपए करने का फैसला किया गया। इसके अलावा,  मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्रेडिटेशन कार्ड की ज़रूरी शर्त को हटा दिया जाएगा, जिससे राज्य के सभी पत्रकार मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में आ जाएंगे।<br />शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को नवान्न में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि पहले रिटायर पत्रकारों के लिए 2,500 रुपए की मासिक पेंशन का प्रावधान था, लेकिन इसका लाभ उठाने के लिए एक्रेडिटेशन कार्ड होना ज़रूरी था। नतीजतन, कई मीडियाकर्मी—खासकर न्यूज़ डेस्क पर काम करने वाले—सालों की सेवा के बावजूद इस सरकारी लाभ से वंचित रह जाते थे।<br />एक्रेडिटेशन कार्ड आमतौर पर खास मानदंडों और वेरिफिकेशन प्रोसेस के बाद पत्रकारों को जारी किए जाते हैं। जहां कुछ फील्ड पत्रकारों के पास ये कार्ड होते हैं, वहीं बड़ी संख्या में डेस्क पत्रकारों के पास ये नहीं होते। इससे एक ही क्षेत्र के पेशेवरों के बीच सरकारी लाभ पाने में असमानता पैदा होती थी। पेंशन नियमों में ढील देने का फैसला इसी समस्या को दूर करने के मकसद से लिया गया है।<br />मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत, रिटायर पत्रकारों की मासिक पेंशन दोगुनी करके 5,000 रुपए कर दी गई है। इसके अलावा, योग्य रिटायर पत्रकारों को बिना एक्रेडिटेशन कार्ड के भी यह लाभ मिलेगा; उम्मीद है कि इस कदम से और अधिक मीडियाकर्मी इस योजना के दायरे में आएंगे।<br />पूजा त्योहार से पहले काम कर रहे पत्रकारों के लिए आर्थिक सहायता भी बढ़ाई गई है। पहले सरकार कोलकाता और ज़िलों में एक्रेडिटेशन प्राप्त पत्रकारों को कुछ आर्थिक मदद देती थी; अब इस राशि को बढ़ाकर 3,000 रुपए कर दिया गया है। यहां भी एक्रेडिटेशन कार्ड की शर्त हटा दी गई है, जिसका मतलब है कि राज्य का कोई भी पत्रकार जो इस लाभ के लिए आवेदन करेगा, उसे पूजा बोनस मिलेगा।<br />शुभेंदु अधिकारी ने हेल्थ कवरेज को लेकर भी एक अहम घोषणा की और कहा कि राज्य के सभी पत्रकारों को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाया जाएगा। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि न केवल काम कर रहे पत्रकार, बल्कि मीडिया क्षेत्र से जुड़े कई अन्य लोग भी इलाज के खर्च के लिए आर्थिक सुरक्षा पा सकेंगे।<br />पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया सरकार और उनकी व्यक्तिगत रूप से आलोचना करने के लिए स्वतंत्र है,  क्योंकि रचनात्मक चर्चा और विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत हो, तो पत्रकार अपनी बात कहने के लिए उनसे व्यक्तिगत रूप से मिल सकते हैं। साथ ही, शुभेंदु ने उनसे देशभक्ति और राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखने का आग्रह भी किया।<br />उन्होंने ज़ोर दिया कि ऐसा कोई काम नहीं किया जाना चाहिए जिससे देश की कमज़ोरियां उजागर हों या अस्थिरता पैदा हो। उन्होंने कहा कि हालांकि राजनीतिक आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन देश के हितों की बात आने पर सभी को—मीडिया सहित—ज़िम्मेदारी से काम करना चाहिए। उन्होंने ऐसी भाषा का इस्तेमाल न करने की भी सलाह दी जिससे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों।<br />कुल मिलाकर, बढ़ी हुई पेंशन, ज़्यादा पूजा बोनस और स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार के बारे में मुख्यमंत्री की घोषणाओं को पत्रकारों की वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदमों के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से, एक्रेडिटेशन कार्ड की अनिवार्य आवश्यकता को हटाने के फ़ैसले से राज्य भर के कई पत्रकारों को लाभ होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्थानीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:10:33 +0530</pubDate>
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                <title>नेपाल में 987 शव बरामद, 4,000 लोग लापता</title>
                                    <description><![CDATA[रसुआ में 350 स्कूली बच्चे लापता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/international/987-bodies-recovered-in-nepal-4000-people-missing/article-3561"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-2.07.39-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : नेपाल के नुवाकोट ज़िले के बेट्रावती इलाके में एक घर से 23 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। ज़िला पुलिस अधीक्षक बिपिन रेग्मी ने यह जानकारी दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घर का मालिक अभी तक नहीं मिला है। एक ही घर में इतने सारे शव मिलने से इस घटना का रहस्य और गहरा गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह साफ़ नहीं है कि मारे गए लोग उसी घर के रहने वाले थे या आपदा से बचने के लिए वहां शरण ली थी। इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि रसुवा ज़िले के उत्तरगया इलाके में लगभग 350 छात्र लापता हैं। स्थानीय अधिकारियों ने बिना पहचान वाले शवों को दफ़नाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।<br />आपदा के बाद से मरने वालों की संख्या रोज़ बढ़ रही है। नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को यह रिपोर्ट लिखे जाने तक मरने वालों की संख्या 987 तक पहुंच गई थी। 3,916 लोग लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। कुल 11,814 लोगों को बचाया गया है। बचावकर्मी कीचड़ और मलबे के नीचे जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। भारत सरकार ने घोषणा की कि नेपाल से 158 पर्यटकों को बचाया गया है।  विदेश मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी जारी की।<br />यूरोप की कोपरनिकस ऑब्ज़र्वेटरी के आंकड़ों का हवाला देते हुए, समाचार एजेंसी एएफपी  ने बताया कि त्रिशूली घाटी में 2,500 से ज़्यादा घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। त्रिशूली घाटी के तिमुरे, स्याब्रूबेसी और बिदुर इलाकों में 6,000 लोग रहते थे, लेकिन अब वहां सिर्फ़ मलबा बचा है। नेपाली प्रशासन के सूत्रों ने बताया है कि त्रिशूली में बन रहे एक पनबिजली संयंत्र में 42 इंजीनियर फंसे हुए हैं। इसके अलावा, इलाके में एक और पनबिजली परियोजना पर काम कर रहे 118 इंजीनियरों को अभी तक नहीं बचाया जा सका है। जहां बचाव अभियान जारी है,  वहीं नेपाली अधिकारियों ने महामारी फैलने के बढ़ते डर की भी बात कही है।<br />गौरतलब है कि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में एक बड़ी आपदा आई थी। अचानक आई बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। एक के बाद एक कई गांव पूरी तरह खत्म हो गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:08:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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                <title>खत्म हो आतंकवाद का इकोसिस्टिम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ  शिखर सम्मेलन के जरिए एक बार फिर आतंकवाद के लिए पड़ोसी देश पर हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर आतंकवाद पर लगाम कसने की बात करते हुए कहा कि हमें आतंकवाद के वित्त पोषण, भर्ती, कट्टरता और पनाहगाह के पूरे इको-सिस्टम को ही ध्वस्त करना होगा। शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) का 26वां शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया गया।<br />बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ  समिट के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। हालांकि फोटो सेशन के दौरान मंच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.gambheersamachar.in/national/end-the-ecosystem-of-terrorism/article-3560"><img src="https://www.gambheersamachar.in/media/400/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-1.56.46-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><br /><em><strong>निज संवाददाता</strong></em> : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ  शिखर सम्मेलन के जरिए एक बार फिर आतंकवाद के लिए पड़ोसी देश पर हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर आतंकवाद पर लगाम कसने की बात करते हुए कहा कि हमें आतंकवाद के वित्त पोषण, भर्ती, कट्टरता और पनाहगाह के पूरे इको-सिस्टम को ही ध्वस्त करना होगा। शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) का 26वां शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया गया।<br />बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ  समिट के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। हालांकि फोटो सेशन के दौरान मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी मौजूद थे, लेकिन पीएम मोदी की न तो उनसे नजरें मिली और न ही उन्होंने मुलाकात की।<br />सम्मेलन में प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने भाषण में कहा कि हमें आतंकवाद और उसे मिलने वाली फंडिंग के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना होगा। हमें एक सुर में यह कहना होगा कि आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग आतंकवाद को रणनीतिक हथियार बना रहे हैं। आतंकवाद को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।<br />दुनिया में कई जगहों पर जारी जंग और संघर्ष को खत्म करने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता। सभी युद्धों और विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।<br />प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत उन सभी कोशिशों का समर्थन करता है जो बाजारों को आपस में जोड़ते हैं, आपसी व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कनेक्टिविटी की कोशिशों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। एससीओ  को लेकर प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा कि भारत के लिए एससीओ  महान सभ्यता, संस्कृति और विचारों का संगम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:06:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gambheer Samachar ]]></dc:creator>
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