बंगाल में दुर्गा पूजा पर विश्व हिंदू परिषद के सुझावों पर विवाद
निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से दिए गए कुछ सुझावों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विहिप की पश्चिम बंगाल शाखा ने दुर्गा पूजा के आयोजन को लेकर पारंपरिक धार्मिक स्वरूप बनाए रखने पर जोर दिया है। संगठन का कहना है कि पंडाल में थीम हो सकती है, लेकिन देवी दुर्गा की मूर्ति को थीम के हिसाब से बदलना उचित नहीं है।
विहिप के पश्चिम बंगाल के मुख्य प्रचारक रक्तिम दास ने कहा कि देवी दुर्गा को शास्त्रों और परंपरा के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंडाल की सजावट के लिए अलग-अलग थीम अपनाने पर किसी भी तरह की आपत्ति नहीं है। लेकिन मूर्ति के स्वरूप में मनमाने बदलाव नहीं किए जाने चाहिए।
विहिप से जुड़े स्वामी निर्गुणानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि संगठन सामान्य तौर पर थीम के खिलाफ नहीं है। थीम आधारित पंडाल को कला का बेहतर कहा जा सकता है। लेकिन सनातनी परंपरा में पूजा, स्नान, बलिदान और हवन महापूजा के महत्वपूर्ण अंग हैं। इन परंपराओं को बनाए रखना जरूरी है। उन्हें ऐसे विषयों पर आपत्ति जताई जो उनके मुताबिक पूजा की आध्यात्मिक भावना से मेल नहीं खाते हैं।
उन्होंने कहा कि देवी दुर्गा को दस भुजाओं वाली, रक्षा करने वाली मां के पारंपरिक स्वरूप में ही दिखाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक देवी की पारंपरिक वेशभूषा, हथियारों और स्वरूप में ऐसे बदलाव नहीं होने चाहिए जो धार्मिक परंपरा से अलग हों।
विहिप ने पूजा मंडप की पवित्रता बनाए रखने के लिए मांसाहारी भोजन को मंडप के अंदर नहीं रखने का सुझाव दिया है। साथ ही पंडालों के आसपास भी इसके बिक्री पर रोक होनी चाहिए। संगठन के मुताबिक, अगर लोग मांसाहारी भोजन करना चाहते हैं तो इसके लिए मंडप के बाहर, उससे दूर अलग जगह होनी चाहिए।
निर्गुणानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि पूजा स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए भोजन की व्यवस्था मंडप के बाहर तय स्थानों पर की जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चर्चा में देवी को दिए जाने वाले मांसाहारी भोग या पशु बलि को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया गया।
विहिप की ओर से यह भी कहा गया है कि दुर्गा पूजा को केवल धार्मिक पूजा के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि ऐसा सार्वभौमिक त्योहार जिसमें हर समुदाय की भागीदारी जरूरी हो। संगठन ने धर्म व्यक्तिगत है, त्योहार सार्वभौमिक है वाली धारणा का विरोध किया है।
विहिप का कहना है कि दुर्गा पूजा एक सामुदायिक धार्मिक आयोजन है। संगठन के इसी सुझाव को लेकर भी पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति बनी है। बंगाल में दुर्गा पूजा लंबे समय से धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में भी मनाई जाती रही है। विहिप का कहना है कि अगर पूजा समितियां उसके सुझाए गए धार्मिक मानकों का पालन नहीं करती हैं तो संगठन स्थानीय लोगों की राय लेकर ऐसे आयोजनों का विरोध करेगा।
पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा में थीम आधारित पंडाल और मूर्तियां इसकी खास पहचान बन चुके हैं। कलाकार अलग-अलग सामाजिक, सांस्कृतिक और समकालीन विषयों को पंडाल की डिजाइन और मूर्ति के जरिए पेश करते हैं। इससे बड़ी संख्या में कलाकारों, कारीगरों, सजावट करने वालों और छोटे कारोबारियों को काम मिलता है।
ऐसे में विहिप के सुझावों ने पूजा आयोजकों और कलाकारों के बीच भी चर्चा तेज कर दी है। खास तौर पर सवाल यह है कि अगर मूर्ति के स्वरूप और थीम पर सीमाएं लगाई जाती हैं तो इसका असर बंगाल की चर्चित थीम पूजा संस्कृति पर कितना पड़ेगा।
