श्रेणी:
साहित्य
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‘मेरी पहचान’
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By Gambheer Samachar
‘मेरी पहचान’ वह अंधेरी!तेज़ तूफ़ानी रात!रात के बारह बजे थे।बिजली की गड़गड़ाहट,हवा की आहट,सन्नाटे की सजावट में,'एक बच्चा'पैदा लेता है!!
संकरी पगडंडी में,सड़क किनारे,फर्श पर सटा,लेटे रहता है-'वह बच्चा'!...
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मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम
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By Gambheer Samachar
कविता
चैत्र शुक्ल की सुनहरी बेला में,अयोध्या के आँगन में उषा उतरी,जग ने देखा धर्म का सूर्योदय जब करुणा की किरण बन राम अवतरे।।
वन-वन में जिसकी गूँज पवित्र,न्याय की ज्योति जिसने जगाई,वाणी में मधुर सत्य...
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'समानता' (दलित कविता)
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By Gambheer Samachar
समानता
मैं बिस्तर पर लेटे था।
किसी ने यह पूछा दिया-
क्या भाई तुम्हारे यहां
असमानता है क्या?
तड़के ही उत्तर दिया,
नहीं भाई, नहीं तो !
हमारे पास संविधान है।
तो कैसे होंगे असमान?
घोड़ा और घास
साथ-साथ, पास-पास...
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शुक्रग़ुज़ार करो!
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By Gambheer Samachar
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
जिन्हें वसीयत में मिली,
अपमान, तिरस्कार और दुत्कार को,
ठुकरा रहे हैं।
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
अपमान की परिभाषा,
चूहड़ा-चमरा-भंगी कहने की,
मानसिकता बदल रहे हैं।
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
जिन्हें परंपरा में...
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एक दलित!
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By Gambheer Samachar
एक दलित! जब पढ़ लिखकर क़ाबिल बना, हमारे गाँव ने ख़ुशियाँ मनाईं. एक दलित! जब अफ़सर और सिपाही बना, पूरे मुहल्ले ने जश्न मनाया. एक दलित! जब ज़िला कलेक्टर व मुख्य सचिव बना, पूरे इलाक़े में भव्य कार्यक्रम हुआ. एक...
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