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साहित्य

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम 

   कविता  चैत्र शुक्ल की सुनहरी बेला में,अयोध्या के आँगन में उषा उतरी,जग ने देखा धर्म का सूर्योदय जब करुणा की किरण बन राम अवतरे।। वन-वन में जिसकी गूँज पवित्र,न्याय की ज्योति जिसने जगाई,वाणी में मधुर सत्य...
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'समानता' (दलित कविता)

समानता मैं बिस्तर पर लेटे था।  किसी ने यह पूछा दिया-  क्या भाई तुम्हारे यहां  असमानता है क्या?    तड़के ही उत्तर दिया, नहीं भाई, नहीं तो ! हमारे पास संविधान है। तो कैसे होंगे असमान?    घोड़ा और घास  साथ-साथ, पास-पास...
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शुक्रग़ुज़ार करो!

                                   शुक्रग़ुज़ार करो!             उन वंचित-शोषित-दलितों को,                       जिन्हें वसीयत में मिली,        अपमान, तिरस्कार और दुत्कार को,                                        ठुकरा रहे हैं।                                शुक्रग़ुज़ार करो!           उन वंचित-शोषित-दलितों को,                         अपमान की परिभाषा,                  चूहड़ा-चमरा-भंगी कहने की,                        मानसिकता बदल रहे हैं।                                     शुक्रग़ुज़ार करो!             उन वंचित-शोषित-दलितों को, जिन्हें परंपरा में...
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एक दलित! 

                      एक दलित! जब पढ़ लिखकर क़ाबिल बना, हमारे गाँव ने ख़ुशियाँ मनाईं.  एक दलित! जब अफ़सर और सिपाही बना, पूरे मुहल्ले ने जश्न मनाया.  एक दलित! जब ज़िला कलेक्टर व मुख्य सचिव बना, पूरे इलाक़े में भव्य कार्यक्रम हुआ. एक...
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