शुक्रग़ुज़ार करो!
आनंद दास

शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
जिन्हें वसीयत में मिली,
अपमान, तिरस्कार और दुत्कार को,
ठुकरा रहे हैं।
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
अपमान की परिभाषा,
चूहड़ा-चमरा-भंगी कहने की,
मानसिकता बदल रहे हैं।
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
जिन्हें परंपरा में मिली गंदी गालियों को,
सिर्फ़ बताया है।
लौटाने की मानसिकता दर्शा नहीं रहे हैं।
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
जिन्होंने अपने इतिहास में,
बदला के बजाय,
बदलाव और बराबरी को चुना है।
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
जिन्होंने अपने समाज में,
हिंसा के बदले, हिंसा नहीं।
प्रेम, सद्भावना और भाईचारा को चुना है।
शुक्रग़ुज़ार करो!
उन वंचित-शोषित-दलितों को,
जिन्होंने भूखे-प्यासे सवर्णों को,
कभी जल तो कभी खाद्य मुहैया कराकर,
इंसानियत का रास्ता बताया है।
