भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया एक महत्वपूर्ण फैसला
अब अमृत भारत ट्रेनों और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में भी इमरजेंसी कोटा लागू
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब अमृत भारत ट्रेनों और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में भी इमरजेंसी कोटा लागू किया जाएगा। रेलवे बोर्ड की ओर से जारी आदेश के अनुसार, खास परिस्थितियों में यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ सीटें सुरक्षित रखी जाएंगी, जिससे अचानक यात्रा की जरूरत पड़ने पर राहत मिल सके।
अमृत भारत ट्रेनों में 24 बर्थ रिजर्व
रेलवे बोर्ड के निर्देश के अनुसार, जिन अमृत भारत ट्रेनों में सात या उससे अधिक स्लीपर क्लास के कोच होंगे, उनमें 24 बर्थ इमरजेंसी कोटा के तहत अलग रखी जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि जब ट्रेन पूरी तरह बुक हो चुकी हो, तब भी यात्रियों को अत्यावश्यक स्थिति में यात्रा करने का अवसर मिल सके।
वंदे भारत स्लीपर में अलग-अलग क्लास के लिए कोटा
वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा प्रथम एसी, द्वितीय एसी और तृतीय एसी में अलग-अलग सीटों के रूप में लागू होगा। सीटों का निर्धारण सप्ताह के दिनों और वीकेंड के आधार पर किया गया है, ताकि यात्रियों की मांग और जरूरत के अनुसार प्राथमिकता दी जा सके।
एडवांस रिजर्वेशन पीरियड से प्रभावी
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह इमरजेंसी कोटा एडवांस रिजर्वेशन पीरियड से ही लागू होगा। इसका मतलब है कि जैसे ही टिकट बुकिंग शुरू होगी, यह कोटा सिस्टम में शामिल रहेगा। इससे न केवल पारदर्शिता बनी रहेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर सीट आवंटन भी आसान होगा।
यात्रियों को होगा बड़ा फायदा
पहले अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा का प्रावधान नहीं था, जिससे अचानक यात्रा की स्थिति में यात्रियों को कठिनाई होती थी। नए आदेश के बाद, विशेष परिस्थितियों जैसे चिकित्सकीय आपातकाल, पारिवारिक कारण या सरकारी आवश्यकता में यात्रियों को राहत मिल सकेगी।
रेलवे के इस कदम को यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह व्यवस्था लंबी दूरी की यात्रा को और भी सुगम और आरामदायक बना सकती है। यात्रियों को अब यह सुनिश्चित रहेगा कि जरूरत पड़ने पर उन्हें ट्रेन में सीट मिल सकेगी और उनकी यात्रा बाधित नहीं होगी। यह कदम भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा और आकस्मिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
