मुर्शिदाबाद हिंसा 

मामले की एनआईए जांच के खिलाफ बंगाल सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनी

मुर्शिदाबाद हिंसा 


निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा की एनआईए जांच में दखल देने से  सुप्रीम कोर्ट  ने मना किया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए जांच के खिलाफ  राज्य सरकार  की याचिका को कलकत्ता हाई कोर्ट भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी तथ्यों को देखने के बाद हाई कोर्ट मामले पर फैसला ले।
गौरतलब है कि बेलडांगा के रहने वाले अलाउद्दीन शेख की 16 जनवरी को झारखंड के डाल्टनगंज में मौत हुई थी। प्रवासी मजदूर के तौर पर डाल्टनगंज में रह रहे अलाउद्दीन का शव बेलडांगा पहुंचने के बाद लोग उग्र हो गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अलाउद्दीन को बांग्लादेशी बताकर उसकी हत्या की गई है। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे 12 को कई घंटों तक जाम किया। मुर्शिदाबाद में बड़े पैमाने पर उपद्रव भी हुआ।
मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल हुईं। इनमें से एक याचिका राज्य में नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी की थी। याचिकाओं में इस हिंसा को देश को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की योजनाबद्ध कोशिश बताया गया। 20 जनवरी को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग करने पर विचार करे। बेंच ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राज्य की रिपोर्ट को देखे और यह तय करे कि क्या एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच करवाने की जरूरत है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को एनआईए  को जांच सौंपने का आदेश जारी किया। एनआईए  ने गैर कानूनी गतिविधि निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। उसका कहना था कि इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की कोई जरूरत नहीं है। केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंप कर राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में दखल दिया जा रहा है।
मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच के सामने सुनवाई के लिए लगा। केंद्र सरकार की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि मुर्शिदाबाद बांग्लादेश की सीमा से लगा इलाका है। वहां पर कई संदिग्ध गतिविधियां एजेंसी के संज्ञान में आई हैं। एएसजी राजू ने कहा कि राज्य सरकार जांच में सहयोग नहीं कर रही है।
सुनवाई के दौरान बेंच के सदस्य जस्टिस बागची ने कहा-इस मामले में यह देखने की जरूरत है कि यह वाकई संगठित तरीके से देश को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश थी या सिर्फ भावनाओं में बह कर लोगों की तरफ से की गई हिंसा थी।  जजों ने कहा कि जांच एनआईए  को सौंपने के औचित्य पर हाई कोर्ट फैसला ले। मामला कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में लंबित है। पश्चिम बंगाल सरकार अपनी आपत्तियों को वहीं रखे।

Tags:

About The Author

Advertisement

Latest News