राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लांगू करने के लिए क्या कदम उठाया?
नीट पर सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से मांगा जवाब
निज संवाददाता : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि नीट परीक्षाओं में सुधारों को स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाने की जरूरत है। कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को निर्देश दिया कि वह बताए कि राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मामले में नया हलफनामा दाखिल करने को कहा।
पीठ ने कहा, 'राधाकृष्णन समिति ने सही कहा है कि यह एक ऐसी व्यवस्था से जुड़ी समस्या है, जिसे संस्थागत बनाने की जरूरत है और यह इसका सबसे अहम हिस्सा है। कागज पर यह पूरी प्रक्रिया अच्छी लगती है। लेकिन फिर एक परीक्षा होने के बाद जब तक दूसरी परीक्षा होती है, तब तक तस्वीर पूरी तरह अलग हो जाती है।'
शुरुआत में तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि नीट के प्रश्नपत्र छपने से लेकर छात्रों को मिलने तक सुरक्षा के कई इंतजाम किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षाओं के लिए बनाई गई व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना मुश्किल है।
उन्होंने बताया कि कई मॉडरेटर्स से प्रश्न बैंक तैयार कराया जाता है। उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि इनमें से कौन से सवाल प्रश्नपत्र का हिस्सा होंगे। मेहता ने कहा कि नीट के प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस लगा होता है और उनकी छोटी से छोटी गतिविधि भी दर्ज होती है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई हो रही थी। इनमें फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) की ओर से वकील तन्वी दुबे की ओर से दायर याचिका भी शामिल थी।
कथित तौर पर नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति बनाई थी। समिति को परीक्षा प्रक्रिया सुधारने, डाटा की सुरक्षा मजबूत करने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की व्यवस्था और कामकाज में सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
