गिफ्ट डीड में प्रॉपर्टी मिलने के बाद बेटे ने मां को ठुकराया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुजुर्ग मां की देखभाल और सम्मान के साथ जीवन यापन की सुविधा देने का दिया निर्देश

गिफ्ट डीड में प्रॉपर्टी मिलने के बाद बेटे ने मां को ठुकराया



निज संवाददाता : कलकत्ता हाई कोर्ट ने बेटे को गिफ्ट डीड देने के बाद उपेक्षा की शिकार एक बुजुर्ग महिला की याचिका पर गजब का फैसला दिया है। अदालत ने बेटे के पक्ष में किए गए गिफ्ट डीड की वैधता को सही ठहराया मगर उसे बुजुर्ग मां की देखभाल और सम्मान के साथ जीवन यापन की सुविधा देने के निर्देश भी दिए। जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की बेंच ने स्थानीय पुलिस को बुजुर्ग महिला की एंट्री सुनिश्चित करने और बेटे को अपनी मां के लिए 2000 रुपये की पॉकेट मनी देने का आदेश भी दिया।
70 साल की विधवा नीवा बसु की याचिका सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिका में नीवा बसु ने बताया था कि उन्होंने गिफ्ट डीड के जरिये अपनी संपत्ति बेटे के नाम ट्रांसफर कर दी थी। गिफ्ट डीड में उन्होंने सेवा-सुश्रुषा का जिक्र नहीं किया था। बाद में बेटे ने भरण-पोषण से वंचित कर दिया। नीवा बसु ने पहले फैमिली ट्रिब्यूनल का दरवाज़ा खटखटाया। ट्रिब्यूनल ने उन्हें कुछ हद तक सुरक्षा दी । फिर वह 28 जुलाई 2025 को भरण पोषण की मांग को लेकर हाई कोर्ट पहुंची, जहां सिंगल बेंच ने गिफ्ट डीड के ट्रांसफर को सही माना और उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि इस केस में 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत कानूनी शर्तें पूरी नहीं हुई थीं, क्योंकि उस दस्तावेज में भरण-पोषण का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इस फैसले के खिलाफ नीवा बसु ने डिविजन बेंच में गुहार लगी। 
कलकत्ता हाई कोर्ट की डबल बेंच ने 18 मार्च को सिंगल बेंच के फैसले को सही माना। कोर्ट ने माना कि प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए किए गए गिफ्ट डीड में सेवा या भरण पोषण की शर्त नहीं रखी गई थी। इसमें मां के हिस्से के रूप में कोई संपत्ति निर्धारित नहीं थी। मां-पिता ने स्नेह और विश्वास के आधार पर सारी संपत्ति बेटे को दे दी। कोर्ट ने कहा कि एक मां को गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार है। उसे कागज़ी कार्रवाई में हुई किसी मामूली चूक के कारण खत्म नहीं किया जा सकता है। कानून के तहत और पारिवारिक जीवन के गहरे नैतिक ताने-बाने के अनुसार भी याचिकाकर्ता भरण-पोषण की हकदार बनी हुई है। 
कलकत्ता हाई कोर्ट ने नीवा बसु के बेटे को अपनी मां की देखभाल और उसे खाना, कपड़े, दवा और आराम का ध्यान रखने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि बेटा पूरे सम्मान और आदर के साथ उसका भरण-पोषण करेगा। इसके अलावा उसे छोटे-मोटे खर्चों के लिए हर महीने 2,000 रुपये की पॉकेट मनी भी देनी होगी। पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मां को आराम से रखा जाए। जिस दिन वह वापस घर आना चाहेंगी, वह स्थानीय पुलिस स्टेशन को सूचित करेंगी। पुलिस स्टेशन के इंचार्ज महिला को घर पर कब्जा दिलाना सुनिश्चित करेंगे।

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