ज्ञान, संस्कार और नवजीवन का पर्व है बसंत पंचमी
निज संवाददाता : भारत की सांस्कृतिक परंपरा में बसंत पंचमी का विशेष स्थान है। यह पर्व शीत ऋतु के अंत और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। जब ठंड की कठोरता धीरे-धीरे विदा लेने लगती है और प्रकृति नवजीवन से भर उठती है, तब बसंत पंचमी का मधुर संदेश चारों ओर फैल जाता है। पीले फूलों से सजी धरती, खिले हुए खेत और मंद-मंद बहती सुगंधित हवा मानो जीवन में नई आशा का संचार करती है।
बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, कला और विवेक की आराधना का पावन अवसर भी है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, संगीत और विद्या की देवी माना जाता है। मां सरस्वती हमें सिखाती हैं कि सच्चा बल बाहुबल में नहीं, बल्कि बुद्धिबल और सद्विचारों में निहित होता है। इसलिए यह दिन विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
बसंत पंचमी यह संदेश देती है कि जैसे बसंत सूखे वृक्षों में हरियाली भर देता है, वैसे ही परिश्रम, अनुशासन और लगन आपके जीवन को सफल बना सकते हैं। पढ़ाई केवल अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य चरित्र निर्माण और आत्मविकास होना चाहिए। जब हम पूरे मन से सीखने का प्रयास करते हैं, तब ज्ञान स्वयं आपके जीवन को प्रकाशमान करता है।
यह पर्व हमें आलस्य छोड़कर सक्रिय बनने की प्रेरणा देता है। जैसे प्रकृति इस ऋतु में थकान त्यागकर नई ऊर्जा से भर जाती है, वैसे ही हमें भी अपने लक्ष्य के प्रति सजग और समर्पित होना चाहिए। असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सच्ची सफलता की कुंजी है। हर प्रश्न पूछना, हर नई बात जानने की जिज्ञासा रखना और अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना एक अच्छे विद्यार्थी के गुण हैं।
बसंत पंचमी हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में सकारात्मक सोच का कितना बड़ा महत्व है। पीला रंग प्रसन्नता, उत्साह और आशा का प्रतीक है। यदि हम अपने विचारों को सकारात्मक रखें, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सरल लगने लगती हैं। अच्छे विचार, अच्छे कर्मों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह पर्व संदेश देता है कि किताबों से मित्रता करो, प्रश्न पूछने से कभी मत डरो, असफलताओं को सीख में बदलो और अपनी प्रतिभा को पहचानो। जैसे बसंत हर सूखी डाल में हरियाली भर देता है, वैसे ही परिश्रम और अनुशासन हमारे जीवन को उज्ज्वल बना सकते हैं। आज का एक छोटा-सा प्रयास कल की बड़ी सफलता बन सकता है।
