EMI नहीं भर पा रहे तो घबराएं नहीं तुरंत करें ये काम
Loan Recovery Agent का डर नहीं सताएगा
कई बार अचानक आय में कमी, नौकरी छूटना या मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में किस्त भरना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में बैंक या वित्तीय संस्थान से लोन रिस्ट्रक्चरिंग या मोराटोरियम का विकल्प लिया जा सकता है।
आज के समय में नौकरी में अस्थिरता, मेडिकल इमरजेंसी या अचानक इनकम कम हो जाने की वजह से कई लोग समय पर लोन EMI नहीं भर पाते।लोन की ईएमआई (EMI) न भर पाने पर जब रिकवरी एजेंट्स के फोन आने लगते हैं तो मानसिक तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय जानना जरूरी हो जाता है कि लोन लेने वाले व्यक्ति के पास भी कानूनी और बैंकिंग विकल्प मौजूद होते हैं। ठीक ऐसी स्थिति के लिए Restructuring और Moratorium आपके लिए 'कानूनी ढाल' का काम कर सकते हैं। Restructuring और Moratorium क्या है और ये दोनों उपाय कठिन समय में राहत कैसे दे सकते हैं आइए समझते हैं-
Moratorium क्या है
Moratorium का मतलब कुछ समय के लिए EMI भरने से अस्थायी छूट से होता है। ऐसे में बैंक आपको सीमित अवधि के लिए EMI टालने की अनुमति दे सकता है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि यह EMI माफ नहीं होती, बल्कि उस अवधि का ब्याज बाद में जुड़ जाता है। कोरोना काल में Reserve Bank of India ने बैंकों को मोरेटोरियम देने की अनुमति दी थी, जिससे लाखों लोगों को राहत मिली थी।
Loan Restructuring क्या है
यह अपेक्षाकृत लंबी अवधि का समाधान है। इसमें बैंक आपके लोन की शर्तों में बदलाव करता है। उदाहरण के लिए EMI कम करने के लिए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है या भुगतान की नई समय-सारणी बनाई जा सकती है। इससे आपकी मासिक किस्त का बोझ कम हो जाता है, लेकिन कुल ब्याज राशि बढ़ सकती है। यह विकल्प तब उपयोगी होता है जब आय में स्थायी या लंबी अवधि की कमी आ गई हो।
बैंक से बात करना सही विकल्प
ध्यान रखने वाली बात यह है कि बिना बैंक से बात किए EMI रोक देना एक सही कदम नहीं माना जाता। लगातार डिफॉल्ट होने से आपका सिबिल स्कोर खराब हो सकता है और भविष्य में लोन मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए जैसे ही परेशानी महसूस हो, तुरंत बैंक या NBFC से संपर्क करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की सलाह दी जाती है।
Restructuring और Moratorium दोनों राहत के साधन हैं, लेकिन समझदारी से निर्णय लेना जरूरी है। सही जानकारी और समय पर पहल आपको आर्थिक तनाव से बचा सकती है और भविष्य की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकती है।
