वंदे भारत स्लीपर के मेन्यू पर बवाल

नॉनवेज खाना नहीं मिलने पर टीएमसी ने जताई नाराजगी

वंदे भारत स्लीपर के मेन्यू पर बवाल


निज संवाददाता : कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने हावड़ा-गुवाहाटी के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। कल से ये ट्रेन नियमित रूप से चलनी शुरू हुई और कल ही विवाद शुरू हो गया। मामला यह है कि हावड़ा-गुवाहाटी के बीच जो वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलती है उसमें नॉनवेज खाने का ऑप्शन नहीं है। यह बात तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी)  को पसंद नहीं आई और इसने इसे बंगाली संस्कृति पर हमला माना।
टीएमसी ने रेलवे के इस फैसले की आलोचना की और कहा कि बंगाल से असम जाने वाली वंदे भारत ट्रेन में मछली और मांस हटा दिए गए हैं। ये ऐसी जगहों को जोड़ने वाली ट्रेन है जहां लोग नॉन-वेज खाना पसंद करते हैं। आज खाने पर पाबंदी, कल कपड़ों पर, प्यार पर और जीवनशैली पर भी पाबंदी होगी। टीएमसी के इस विरोध के बाद मामला राजनीतिक बनने लगा तो रेलवे ने सफाई दी।
रेलवे ने जवाब दिया, वंदे भारत स्लीपर दो धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली ट्रेन है। मां कामाख्या मंदिर असम में है और मां काली मंदिर पश्चिम बंगाल में है, ये दोनों को जोड़ती है। मेन्यू में स्वच्छ और शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध है। मेन्यू बंगाल और असम के पारंपरिक खाने पर आधारित है।
रेलवे ये भले ही कहे कि दो धार्मिक स्थलों को जोड़ा जा रहा है इसलिए इसमें नॉन वेज का ऑप्शन नहीं है लेकिन एक पक्ष यह भी है कि कोलकाता और कामाख्या वाले रेल रूट पर वंदे भारत स्लीपर की तरह कई और ट्रेन चलती हैं। जैसे- सिलचरकंचनजंघा एक्सप्रेस, कोलकातासैरांग एक्सप्रेस, साराईघाट एक्सप्रेस, कामरूप एक्सप्रेस और काजीरंगा एक्सप्रेस…इन सभी ट्रेनों में नॉन वेज खाना परोसा जाता है. तो वंदे भारत में ही सिर्फ शाकाहारी भोजन क्यों?
वैसे वंदे भारत का मेन्यू भले ही शाकाहारी हो लेकिन इस शाकाहारी भोजन में भी राजनीतिक मिर्च काफी है, जो विपक्ष को तीखी लग रही है और अलग-अलग एंगल से रेलवे और सरकार पर हमला किया जा रहा है। वंदे भारत के मेन्यू पर राजनीति भले ही तीखी मिर्च की तरह हो लेकिन इसके ‘शाकाहारी सफर’ का मेन्यू ये है।
इसमें बासंती पुलाव, छोले की दाल, मूंग दाल, चना सब्जी, जोहा चावल, मसूर दाल, मौसमी सब्जियां, संदेश और रसगुल्ला मिलता है। इस मेन्यू के आधार पर यह कहा जा सकता है कि शाकाहारी लोगों को ये भोजन पसंद आ सकता है लेकिन मंसाहारी भोजन करने वाले लोग इस पर क्या सोचते हैं, यह भी देखना होगा।

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