8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष
भारत में महिलाओं के प्रति बदलने लगा है नज़रिया
निज संवाददाता : अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने और लैंगिक समानता की वकालत करने के लिए मनाया जाता है। यह जागरूकता बढ़ाने, बाधाओं को तोड़ने और सभी के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देने का दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो समाज और राष्ट्र मजबूत होते है। यह समानता और अधिकारों के लिए एक वैश्विक आंदोलन है, जो महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रतीक है। यह एक ऐसा दिन है जो महिलाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च 1911 से पूरे विश्व में मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाना है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम है दान से लाभ है, जो उदारता, सहयोग और सामूहिक प्रगति के मूल्यों को बढ़ावा देता है। यह अभियान इस बात पर प्रकाश डालता है कि महिलाओं का समर्थन करना और लैंगिक समानता को आगे बढ़ाना सभी के लिए व्यापक सामाजिक और आर्थिक लाभ ला सकता है। इस अभियान का मूल विचार यह है कि जब महिलाएं शिक्षा, नेतृत्व, उद्यमिता, विज्ञान, कला और राजनीति जैसे क्षेत्रों में सशक्त होती हैं, तो इससे मजबूत समुदाय और साझा समृद्धि का निर्माण होता है। सहयोग और समान अवसरों को प्रोत्साहित करके, यह अभियान समाज में समावेशी विकास और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देना चाहता है।
भारत में महिलाओं की सुरक्षा और इज्जत का खास ख्याल रखा जाता है। अगर हम इक्कीसवीं सदी की बात करे तो यहां की महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला काम कर रही है। अब तो भारत की संसद ने भी महिलाओं के लिये लोकसभा व विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक पास कर दिया है। उससे आने वाले समय में भारत की राजनीति में महिलाओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जायेगी। देश में महिलाओं को अब सेना में भी महत्वपूर्ण पदो पर तैनात किया जाने लगा है। जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार है। महिलायें देश की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है तथा विकास में भी बराबर की भागीदार है। आज के युग में महिला पुरुषों के साथ ही नहीं बल्कि उनसे दो कदम आगे निकल चुकी है। महिलाओं के बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भारतीय संविधान के अनुसार महिलाओं को भी पुरुषों के समान जीवन जीने का हक है। भारत में नारी को देवी के रूप में देखा गया है। कहा जाता है कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं। प्राचीन काल से ही यहां महिलाओं को समाज में विशिष्ट आदर एवं सम्मान दिया जाता है।
भारत में वर्षो से महिला सुरक्षा से जुड़े कई कानून बने है। इसमें हिंदू विडो रीमैरिज एक्ट 1856, इंडियन पीनल कोड 1860, मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1861, क्रिस्चियन मैरिज एक्ट 1872, मैरिड वीमेन प्रॉपर्टी एक्ट 1874,चाइल्ड मैरिज एक्ट 1929, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, फॉरेन मैरिज एक्ट 1969, इंडियन डाइवोर्स एक्ट 1969, मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन एक्ट 1986, नेशनल कमीशन फॉर वुमन एक्ट 1990, सेक्सुअल हर्रास्मेंट ऑफ वुमन एट वर्किंग प्लेस एक्ट 2013 आदि। इसके अलावा 7 मई 2015 को लोक सभा ने और 22 दिसम्बर 2015 को राज्य सभा ने जुवेनाइल जस्टिस बिल में भी बदलाव किया है। इसके अन्तर्गत यदि कोई 16 से 18 साल का किशोर जघन्य अपराध में लिप्त पाया जाता है तो उसे भी कठोर सजा का प्रावधान है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक साल 2023 में भारत में महिलाओं के खिलाफ कुल 4,05,861 अपराध दर्ज किए गए। इन अपराधों में बलात्कार, छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, साइबर अपराध, और अपहरण जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न के सामने आए हैं।जो समाज में महिलाओं की सुरक्षा के प्रति हमारी उदासीनता को दर्शाते हैं। इससे पहले 2022 में 4,45,256 मामले, 2021 में 4,28,278मामले 2020 में 3,71,503 मामले दर्ज किए गए थे।
राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। राष्ट्रीय महिला आयोग की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक देश भर से पूरे साल में महि…
रमेश सर्राफ धमोरा...
