आगामी लोकसभा चुनाव से पहले 21 एनडीए शासित राज्यों में लागू होगा यूसीसी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान से मची सियासी हलचल
निज संवाददाता : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से लोकसभा चुनाव 2029 से पहले देश के 21 बीजेपी-एनडीए शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) यानी समान नागरिक संहिता लागू करने के ऐलान के बाद सियासी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यह सिर्फ वोट बैंक के लिए है। वहीं बिहार में बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड के एक नेता ने कहा कि हमारे नेता नीतीश कुमार ने कहा था कि हम अपने यहां यूसीसी लागू नहीं होने देंगे, हम आज भी उसी स्टैंड पर हैं।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर गृह मंत्री के बयान पर सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेज (जदयू) के नेता श्याम रजक ने कहा-जब यह बिल संसद में आया था, तो हमारे नेता (नीतीश कुमार) ने साफ-साफ कहा था कि वह बिल का समर्थन तो करते हैं, लेकिन इसे अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे। हम आज भी अपनी उस बात पर कायम हैं।
अमित शाह के बयान की आलोचना करते हुए सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा-यूसीसी लागू हो या न हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। यह परंपराओं से जुड़ा देश है और लोग अपनी परंपराओं को मानेंगे। यह महज वोट बैंक के लिए है। आप महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात नहीं करेंगे बल्कि इन मुद्दों पर बात करेंगे जिनका कोई महत्व नहीं है।
वहीं कांग्रेस के एक अन्य नेता राशिद अल्वी ने भी कहा-पिछले 12 सालों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मुसलमानों के खिलाफ हर काम कर रही है। क्या यूसीसी से आर्थिक स्थिति सुधरेगी? क्या यूसीसी से बेरोजगारी खत्म हो जाएगी? क्या यूसीसी से पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी? आप इसे 21 राज्यों में लागू करना चाहते हैं।
अल्वी ने आगे कहा-यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब ही है सिविल कानूनों में एकरूपता। अभी हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। आप इन कानूनों को 21 राज्यों में लागू करने जा रहे हैं। यह बस मुसलमानों के खिलाफ जिद है। बेरोजगारी या आर्थिक स्थिति बीजेपी नेताओं की प्राथमिकता में नहीं है। ट्रिपल तलाक, यूनिफॉर्म सिविल कोड, मस्जिद-मंदिर और हिंदू-मुसलमान ही आपके एजेंडे हैं. बीजेपी ने इस देश को बर्बाद करने की पूरी ठान ली है.”
इससे पहले अमित शाह ने कल रविवार को यूसीसी को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में साल 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कई राज्यों में पहले से ही यूसीसी लागू किया जा चुका है। जबकि अगले 2-3 सालों में एनडीए शासित अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री शाह ने कहा कि कई राज्य सरकारें अपने यहां समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी हैं। सरकार की कोशिश है कि एनडीए की अगुवाई वाली सभी राज्यों में इसे लागू किया जाए। यूससीसी लागू करने का मकसद अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समान नागरिक नियमों को लागू करना है।
अभी बीजेपी की अगुवाई में एनडीए उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, असम, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश और असम सहित 19 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है। इसमें से सबसे पहले उत्तराखंड ने और फिर गुजरात और असम में यूसीसी लागू हो चुका है, जबकि मध्य प्रदेश ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।
