मुकुल रॉय का निधन

पीएम मोदी व सीएम ममता ने जताया शोक

मुकुल रॉय का निधन


निज संवाददाता : वरिष्ठ राजनीतिज्ञ मुकुल रॉय का निधन हो गया। निधन के समय उनकी आयु 71 वर्ष थी। सोमवार, 23 फरवरी को रात लगभग 1:30 बजे कोलकाता के सॉल्टलेक स्थित एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पुत्र शुभ्रांशु रॉय ने मीडिया को इस खबर की पुष्टि की। उनके निधन से राजनीतिक जगत में शोक की लहर छा गई है।
मुकुल रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस के नेता के रूप में की थी। बाद में वे ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी बन गए। वर्ष 1998 में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का गठन हुआ, तब वे इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। वर्ष 2006 में उन्हें पार्टी का अखिल भारतीय महासचिव बनाया गया और संगठन को मजबूत करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 2001 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने जगद्दल सीट से चुनाव लड़ा,  हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। 2006 में वे राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। दूसरी यूपीए सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्होंने पहले जहाजरानी मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली और बाद में देश के रेल मंत्री भी बने। वर्ष 2012 में रेल किराया वृद्धि को लेकर विवाद के बाद उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
उनका राजनीतिक जीवन कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने कृष्णानगर उत्तर सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। हालांकि उसी वर्ष 11 जून को वे पुनः तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
उनके निधन पर ममता बनर्जी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस खबर से गहराई से आहत हैं। उन्होंने उन्हें अपना लंबे समय का राजनीतिक सहयोगी और संघर्ष का साथी बताया तथा उनके संगठनात्मक कौशल और योगदान को अविस्मरणीय कहा। उन्होंने शुभ्रांशु रॉय से कहा-हिम्मत बनाए रखो,  हम इस कठिन समय में तुम्हारे साथ हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा-पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय जी के निधन से हम दुखी हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और समाज सेवा के प्रति समर्पण सदैव याद रखा जाएगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम् शांति।
मुकुल रॉय अपने लंबे राजनीतिक जीवन में एक कुशल संगठनकर्ता,  अनुभवी संसदीय नेता और सक्षम प्रशासक के रूप में जाने जाते थे। उनके निधन से बंगाल की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदनाएं।

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