श्री रामकृष्ण बी. टी. कॉलेज में आनंद दास की पुस्तक
‘मणिकर्णिका : दृष्टि और विमर्श’ का लोकार्पण
दार्जिलिंग, श्री रामकृष्ण बी. टी. कॉलेज, दार्जिलिंग में साहित्यिक एवं अकादमिक वातावरण के बीच लेखक आनंद दास द्वारा रचित पुस्तक ‘मणिकर्णिका : दृष्टि और विमर्श’ का लोकार्पण समारोह गरिमापूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। जिसका प्रकाशन रासती प्रकाशन के पूरे समूह के जरिए संभव हो पाया है। पुस्तक का लोकार्पण महाविद्यालय के प्रभारी शिक्षक आदरणीय प्रो. लोचन थापा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में साउथ फील्ड कॉलेज से मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. रत्ना कुमारी मिश्रा तथा प्रो. ममता कुमारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके आगमन और सहभागिता ने समारोह को विशेष अकादमिक गरिमा प्रदान की है। कार्यक्रम का आयोजन श्री रामकृष्ण बी. टी. कॉलेज द्वारा किया गया।

‘मणिकर्णिका : दृष्टि और विमर्श’ पुस्तक हिंदी दलित आत्मकथा के महत्वपूर्ण विमर्श को केंद्र में रखती है। पुस्तक में दलित जीवन के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और मानवीय अनुभवों को आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टि से समझने का प्रयास किया गया है। लेखक आनंद दास ने आत्मकथात्मक साहित्य को केवल व्यक्तिगत जीवनानुभव के दस्तावेज के रूप में न देखकर उसे सामाजिक संरचना, जातिगत विषमता, अस्मिता और प्रतिरोध की व्यापक पृष्ठभूमि से जोड़ने का प्रयास किया है। इस दृष्टि से पुस्तक हिंदी दलित साहित्य और आत्मकथा-विमर्श के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखी जा सकती है। लोकार्पण समारोह में पुस्तक के विषय, उद्देश्य और समकालीन प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि दलित आत्मकथा भारतीय समाज की उन वास्तविकताओं को सामने लाती है, जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास और साहित्य में लंबे समय तक पर्याप्त स्थान नहीं मिला है। ऐसे साहित्य का अध्ययन सामाजिक संवेदना, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम की सफलता में महाविद्यालय के विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है। नीतेश और प्रसन्न के नेतृत्व में चतुर्थ सत्र के विद्यार्थियों ने कार्यक्रम के आयोजन एवं व्यवस्थापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी प्रकार अर्पण और सुरक्षा के साथ द्वितीय सत्र के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया है। विद्यार्थियों की सामूहिक सहभागिता ने समारोह को जीवंत और व्यवस्थित रूप प्रदान किया है। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों, अशिक्षक कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित अतिथियों के बीच साहित्य, समाज और शिक्षा के अंतर्संबंधों को लेकर सार्थक संवाद का वातावरण बना रहा। उपस्थित लोगों ने लेखक आनंद दास को पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देते हुए आशा व्यक्त की है कि ‘मणिकर्णिका : दृष्टि और विमर्श’ हिंदी दलित साहित्य के अध्ययन, अध्यापन और शोध के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होगी।
समारोह के अंत में आयोजन से जुड़े सभी शिक्षकों, अशिक्षक कर्मचारियों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं रासती प्रकाशन के पूरे समूह के प्रति आभार व्यक्त किया गया। विद्यार्थियों की प्रतिबद्धता, सहयोग और सामूहिक प्रयासों से लोकार्पण समारोह सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह आयोजन महाविद्यालय के शैक्षणिक परिवेश में साहित्य और सामाजिक विमर्श को केंद्र में लाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में स्मरणीय रहेगा।
