अपनी खुद की पार्टी बनाएंगे चंद्र कुमार बोस
जंतर-मंतर पर 'जेन ज़ी' के विरोध-प्रदर्शन से मिली प्रेरणा
निज संवाददाता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। वे हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'जेन ज़ी' के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों से प्रेरित हुए हैं। इससे पहले वे बीजेपी में थे और हाल ही में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। यह कदम चंद्र कुमार बोस के राजनीतिक सफर में एक नया मोड़ है। बीजेपी छोड़ने और टीएमसी पार्टी में शामिल होने के फैसले को गलती बताने के बाद उन्होंने बड़ा ऐलान किया है।
वे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी में शामिल हुए थे। बाद में, उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली इस पार्टी को भी छोड़ दिया था।, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र (भतीजे के पोते) हैं।
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि उनकी बनाई पार्टी युवाओं पर केंद्रित होगी और नेताजी की समावेशी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि आजादी के लगभग 80 साल बाद, युवा एक बार फिर आगे आ रहे हैं। हमने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में वह जज्बा देखा।
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि युवाओं की नाराजगी ने उन्हें इस कदम के लिए प्रेरित किया। नीट यूजी 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन जी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन मुख्य वजह बने। जून के आखिर में शुरू हुए इन प्रदर्शनों का नेतृत्व 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने किया था। ये विरोध प्रदर्शन जुलाई 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के साथ खत्म हुए, जो प्रदर्शनकारी छात्रों की एक मुख्य मांग थी।
चंद्र कुमार बोस ने जेन जी की निराशा की वजह बनने वाली व्यवस्थागत समस्याओं पर जोर दिया और आरोप लगाया कि राजनीति और संस्थानों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार ने युवा भारतीयों को मौजूदा व्यवस्था से निराश कर दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। सभी राजनीतिक दल इसमें शामिल हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और उद्योग में भ्रष्टाचार जीवन का एक हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा कि युवा सरकार, प्रशासन और दूसरी संस्थाओं से तंग आ चुके हैं और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए राजनीतिक मंच की जरूरत है। नेताजी की आजाद हिंद फौज, यानी आजाद हिंद पार्टी के झंडे तले लड़ने से बेहतर क्या हो सकता है।
