हिंसा के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलेगा चुनाव आयोग
किसी भी गड़बड़ी पर कराया जाएगा दोबारा मतदान
निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बड़ा प्लान बनाया है। चुनाव आयोग ने अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए बिना चारदीवारी वाले पोलिंग बूथों के चारों ओर अस्थायी बांस की बाड़ लगाने का निर्देश दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि जांच के दौरान आयोग के प्रतिनिधियों ने बिना उचित चारदीवारी वाले खुले स्कूल भवनों में कई मतदान केंद्रों की पहचान की है। इससे अनधिकृत व्यक्तियों के लिए मतदान केंद्रों के अंदर आसानी से प्रवेश करना और वहां मौजूद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों की निगरानी से बचना आसान हो जाता है। दरअसल पूरे पश्चिम बंगाल में बिना किसी डर-धमकी के वोटिंग सुनिश्चित करने के लिए 'सुपर-सेंसिटिव' (अत्यधिक संवेदनशील) बूथों की पहचान की गई है। इसमें अल्पसंख्यक-बहुल मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार भी शामिल हैं। इसके लिए जिला प्रशासन और केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने खास सुरक्षा योजनाएं तैयार की हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी, एसपी, सीएपीएफ के नोडल अधिकारी और केंद्रीय पर्यवेक्षक मिलकर हर बूथ के लिए खास रणनीतियां लागू करेंगे। इसमें कड़ी निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती शामिल होगी। स्पेशल रोल्स ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता ने हमारे सहयोगी इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि सुपर-सेंसिटिव बूथों की पहचान जिला प्रशासन और केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने मिलकर की है। इन बूथों की खास जरूरतों के हिसाब से बनाई गई अन्य रणनीतियों के साथ-साथ यहां अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बलों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी।
गुप्ता ने स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर एनके मिश्रा के साथ मिलकर पिछले कुछ दिनों में मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कूचबिहार में डीईओ, एडीएम, एसपी, बीडीओ और केंद्रीय और पुलिस ऑब्जर्वर्स के साथ कई बैठकें कीं। राजनीतिक पार्टियों के साथ भी अलग से बातचीत की गई ताकि उनकी शिकायतें सुनी जा सकें और उसके बाद केंद्रीय ऑब्जर्वर्स के साथ सलाह-मशविरा किया गया। ताकि संवेदनशील मुद्दों को उठाया जा सके। ये तीनों तरह की बैठकें हर जिले में आयोजित की गईं।
मालदा और मुर्शिदाबाद पर खास ध्यान दिया जा रहा है। जहां चुनाव से जुड़ी हिंसा का इतिहास रहा है और जहां अल्पसंख्यक आबादी काफी ज्यादा है। मालदा के मोथाबाड़ी और सुजापुर में हाल की घटनाओं की वजह से कई बूथों को 'सुपर-सेंसिटिव' (अति-संवेदनशील) घोषित किया गया है। इनमें एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर हुई अशांति और न्यायिक अधिकारियों का घेराव शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, मालदाहा और इंग्लिश बाजार के बूथ भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
कूचबिहार में कूचबिहार दक्षिण, सिताई, माथाभांगा के कुछ हिस्सों और दिनहाटा के बूथों को 'सुपर-सेंसिटिव' श्रेणी में रखा गया है। मुर्शिदाबाद में शमशेरगंज और बेलडांगा सहित कई बूथ 'सेंसिटिव' और 'सुपर-सेंसिटिव' श्रेणियों में आते हैं। पश्चिम बंगाल के सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने हिंसा की आशंका वाले इलाकों का दौरा किया है। जिनमें बेलडांगा भी शामिल है। गुप्ता ने कहा कि हिंसा और डराने-धमकाने के प्रति जीरो टॉलरेंस चुनाव आयोग का मार्गदर्शक सिद्धांत है और यह बात सभी संबंधित पक्षों को बता दी गई है।
उन्होंने आगे कहा कि जाने-माने उपद्रवियों को भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत भारी जमानत राशि पर पाबंद किया जाना चाहिए और उन्हें एक दिन छोड़कर पुलिस थानों में रिपोर्ट करने के लिए कहा जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों की ओर से मतदाताओं को डराने-धमकाने के संबंध में जताई गई चिंताओं को दूर किया जा रहा है। राजनीतिक दलों को चुनाव में सभी के लिए समान अवसर का आश्वासन दिया गया है। गुप्ता ने कहा कि दलों को आजादी से प्रचार करने की अनुमति होनी चाहिए। किसी भी तरह की रुकावट होने पर पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, जिसमें जरूरत पड़ने पर गिरफ़्तारी भी शामिल है।
सोमवार को इटाहार और रायगंज में, मंगलवार को सिलीगुड़ी में (जिसमें दार्जिलिंग और कलिम्पोंग के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया) और बुधवार को कूचबिहार में बैठकें आयोजित की गईं। इसके अलावा चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ज्ञानेश भारती और पवन शर्मा ने चुनाव की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए बांकुरा, पश्चिम और पूर्वी बर्धमान, उत्तरी 24 परगना और कोलकाता का दौरा किया।
सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने बूथ पर कब्जा करने, मतदान प्रक्रिया में रुकावट डालने और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी हरकतों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी होती है, तो दोबारा मतदान का आदेश दिया जाएगा। हम इससे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोबारा मतदान का आदेश ठोस आधार पर ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए अगर कुछ समय के लिए ईवीएम खराब हो जाती है, लेकिन मतदान 50 फीसदी से ज्यादा हो चुका होता है, तब भी परिस्थितियों को देखते हुए दोबारा मतदान पर विचार किया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने बताया कि नामांकन वापस लेने के बाद अब 2,926 उम्मीदवार चुनाव मैदान में बचे हैं। पहले चरण में 152 सीटों पर 1,478 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे, जबकि दूसरे चरण में 142 सीटों पर 1,448 उम्मीदवार आमने-सामने होंगे। पहले चरण में लगभग 2,400 सीएपीएफ कंपनियों को तैनात किया जाएगा।
