पत्नी भी पति को बांध सकती है राखी
हैरान करने वाली है इसकी वजह
निज संवाददाता : रक्षाबंधन का नाम सुनते ही मिठाइयों की थाली, रेशमी धागे और भाइयों से तोहफ़े पाने के लिए बहन की प्यारी ज़िद याद आ जाती है। लेकिन, अगर आपकी पत्नी अचानक मिठाई की थाली और राखी लेकर आपके पास आए, तो हैरान होने की ज़रूरत नहीं है। आजकल पति को राखी बांधने का रिवाज़ काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है। पत्नियां अक्सर अपने पतियों को यह पवित्र धागा बांधती हुई देखी जाती हैं। बेशक, पति को सुरक्षा का धागा बांधने का यह चलन नया नहीं है—यह बहुत समय से चला आ रहा है।
हम अक्सर मानते हैं कि राखी सिर्फ़ भाई-बहन का त्योहार है। लेकिन हिंदू धर्मग्रंथ कुछ और ही कहते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार, रक्षा-सूत्र (सुरक्षा का धागा) सुरक्षा और स्नेह का एक शक्तिशाली प्रतीक है। इसका महत्व भाई-बहन के रिश्ते से कहीं ज़्यादा है। भविष्य पुराण की एक कहानी पर गौर करें: देवताओं और राक्षसों के बीच भीषण युद्ध के दौरान, देवताओं के राजा इंद्र मुश्किल में पड़ गए थे। अपने पति की जीत और सुरक्षा के लिए चिंतित, देवी इंद्राणी ने उनकी कलाई पर एक विशेष सुरक्षा धागा बांधा। उसी धागे की शक्ति और आशीर्वाद से इंद्र विजयी हुए। दूसरे शब्दों में, पौराणिक कथाओं से पता चलता है कि देवताओं के राजा ने ही सबसे पहले अपनी पत्नी से राखी बंधवाई थी!
शादी में सुरक्षा का संकल्प
शादी के बंधन में पति और पत्नी एक-दूसरे के पूरक होते हैं; वे एक-दूसरे के रक्षक होते हैं। इसलिए, पत्नी का अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करते हुए उन्हें राखी बांधने में धर्मग्रंथों के अनुसार कोई आपत्ति नहीं है। इस रिवाज़ को निभाने से पति-पत्नी के बीच सम्मान और प्यार का रिश्ता और गहरा हो सकता है।
साल 2026 में राखी पूर्णिमा का त्योहार शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल (अशुभ समय) सूर्योदय से पहले ही खत्म हो जाएगा; इसलिए, पूजा-पाठ और रस्मों के लिए शुभ समय सुबह से ही शुरू हो जाएगा।
तिथि (चंद्र दिवस) की शुरुआत: 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे।
तिथि की समाप्ति: 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे।
शुभ समय: 28 अगस्त, सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक (कुल समय: 3 घंटे 51 मिनट)।
मालूम हो कि , इसी दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। यह ग्रहण सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए, सूतक काल (धार्मिक नियमों और पाबंदियों का समय) का पालन करने की ज़रूरत नहीं होगी। आप पूरी निश्चिंतता के साथ अपने पति की कलाई पर पवित्र धागा (रक्षा सूत्र) बांध सकती हैं।
