'सृष्टि करो'
@आनंद दास
‘सृष्टि करो’
एक आधुनिक समाज का।
जहां जाति की दुत्कार कम,
और सामाजिकता अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नई शिक्षा व्यवस्था का।
जहां अज्ञानता-असमानता कम,
और आचरण-नैतिकता अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए विज्ञान का।
जहां पुराने तौर तरीक़े कम,
और आधुनिकता के नए रंग अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए युग का।
जहां शोषण अत्याचार कम,
और मानवीय बोध अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए परिवेश का।
जहां जाति का गर्व,
धर्म का गुमान कम हो,
और भाई भाई का महौल अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए प्रकृति का।
जहां प्राकृतिक विध्वंश कम हो,
और पर्यावरणीय प्रेम अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए ए. आई. का।
जहां इंसान रोबोटिक कम हो,
और सिस्टेमेटिक अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए व्यक्तित्व का।
जहां निजी स्वार्थ कम हो,
और सबका हित अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए विचारों का।
जहां ख़ुद की सोच कम हो,
और महापुरुषों के बताए रास्ते अधिक हो।
‘सृष्टि करो’
एक नए दलित चरित्र का।
जहां सफलता की गूंज कम हो,
और स्वाभिमान आत्मसम्मान अधिक हो।
