‘युवा मेरी नीतियों के केंद्र में’

चिन्मय अमृत महोत्सव में बोले पीएम मोदी

‘युवा मेरी नीतियों के केंद्र में’

निज संवाददाता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल कॉन्फ्रेंस'  का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने युवाओं को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा और एक मजबूत भारत के निर्माण में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने देश को 'संस्कृति की मातृभूमि'  बताया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उनके लिए एक बहुत ही भावुक अनुभव है। चिन्मय सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है, जिसकी शुरुआत एक 'चिन्मय'  ऋषि ने की थी। दशकों से, इसकी यात्रा दृढ़ संकल्पों से भरी रही है। और जो 'चिन्मय'  है, वह स्वभाव से ही शाश्वत और अमरता से परिपूर्ण है। इसलिए, भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम के लिए 'चिन्मय अमृत महोत्सव' नाम पूरी तरह से सार्थक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन संत चिन्मय जी के आध्यात्मिक योगदान,  देश के 'आजादी के अमृत महोत्सव'  काल और भारतीय संस्कृति के गौरव के अद्भुत संगम को दर्शाता है। यह उत्सव भारत की शाश्वत चेतना, ज्ञान और आधुनिक प्रगति के सामंजस्य का प्रतीक है,  जो विचारों के अमृत को जीना जानता है। इसीलिए मैंने इस उत्सव को 'अमृत महोत्सव' के रूप में मनाने का आह्वान किया था।
मालूम हो कि भारत मंडपम में 23 से 25 अक्टूबर, 2026 तक 'चिन्मय अमृत महोत्सव' का तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। यह 'चिन्मय मिशन' की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले समारोहों का समापन है। इन साल भर चलने वाले समारोहों की शुरुआत भी पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही की थी। 
इस दौरान, पीएम मोदी ने देश को आगे ले जाने में युवाओं की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के युवा मेरी नीतियों के केंद्र में हैं और 'सेवा संकल्प यात्रा'  में युवाओं की अहम भूमिका है। पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और संकल्प का इस्तेमाल देश को जागृत और उन्नत बनाने के लिए किया जाना चाहिए। आइए, नए भारत के अनुरूप एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करें।
पीएम मोदी ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह देश संस्कृति की जन्मभूमि है। उन्होंने भगवद गीता और वेदांत के ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। चिन्मय मिशन दशकों से आध्यात्मिक शिक्षा और भारतीय दर्शन के प्रसार के क्षेत्र में काम कर रहा है।
चिन्मय मिशन एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन है। इसकी स्थापना 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी, जिसका उद्देश्य वेदांत और भगवद गीता के ज्ञान को सर्वसुलभ बनाना था। पिछले कई दशकों में,  इस मिशन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा के क्षेत्रों में अपने कार्यों का विस्तार किया है।

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