सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की ममता व राहुल ने की कड़ी आलोचना

कहा यह बर्दाश्त नहीं

सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की ममता व राहुल ने की कड़ी आलोचना

निज संवाददाता : दिल्ली के जंतर-मंतर में जबरन घुसने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)  के 2 नेताओं (सौरव दास और आशुतोष रांका) को हिरासत में लिए जाने को लेकर विपक्षी दल केंद्र पर लगातार हमला कर रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए गिरफ्तारी कायरतापूर्ण कदम करार दिया तो ममता बनर्जी ने कहा कि यह पूरी एक पीढ़ी को डराने और चुप कराने की कोशिश है। यह मंजूर नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने युवा नेताओं को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए कहा-हमने और हमसे पहले की कई पीढ़ियों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए मजबूती से जंग लड़ी है। हमें ऐसा करना जारी रखना होगा।
उन्होंने कहा-मैं सीजेपी  के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करती हूं। यह दौर हम सबके लिए है कि हम अपनी महान लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लें और डटकर खड़े हों। यह पूरी एक पीढ़ी को डराने और चुप कराने की कोशिश है। लेकिन हमें यह मंजूर नहीं है। हमें अपने संवैधानिक अधिकारों के साथ कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा-देश के कई हिस्सों में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। इस समय, पश्चिम बंगाल में हमारे 14,000 लोग पुलिस और राजनीतिक अत्याचारों का सामना कर रहे हैं। जो सरकार यह भूल जाए कि ‘लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए होता है’, उसका अंत नजदीक है।
उन्होंने कहा-मैं लाखों युवाओं से यह कहना चाहती हूं कि आपकी दीदी आपके साथ है- आज भी और हमेशा! आइए, हम सब मिलकर अपनी ‘भारत माता’ को बचाएं।
इससे पहले सीजेपी  के नेताओं सौरव और आशुतोष को शांति बनाए रखने के बांड का कथित उल्लंघन करने और जंतर-मंतर में अनधिकृत रूप से घुसने के आरोप में बुधवार को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। राजधानी में जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर कर दिया गया है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि आशुतोष और सौरव को तिहाड़ जेल में रखा गया है। उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को 6 महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने के लिए 5000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर पाबंद कर रिहा कर दिया गया। इससे पहले तीनों को बुधवार सुबह विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
इन नेताओं को कल मंगलवार तड़के हिरासत में लिया गया था। उन पर बैरिकेड तोड़कर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में घुसने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाने और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आरोप है।
पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी  के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नाराजगी जताई और असहमति की आवाज दबाने के लिए केंद्र सरकार की इस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स  पर पोस्ट में कहा-आशु और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनका दोष क्या है? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना।
वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने को लेकर कहा कि यह स्थान भारत की जनता का है और इसे प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल किया जाएगा। उन्होंने एक्स  पर CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके के एक बयान से संबंधित पीटीआई की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है और ऐसा करने पर युवाओं को जेल भेजना कायरतापूर्ण कदम ह।

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