जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की बड़ी साजिश

पीओके  में 500 आतंकियों की मौजूदगी का दावा, सर्दियों से पहले घुसपैठ का अंदेशा

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की बड़ी साजिश

निज संवाददाता : सर्दियों की शुरुआत से पहले पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को घुसपैठ कराने की साजिश को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। खुफिया जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके)  में बने लॉन्चपैड पर लगभग 500 आतंकवादी मौजूद हैं। आशंका है कि बर्फबारी के कारण पहाड़ी दर्रे बंद होने से पहले, इन आतंकवादियों को भारतीय सीमा में भेजने की कोशिश की जा सकती है।
खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि पाकिस्तान, नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास स्थित लॉन्चपैड का इस्तेमाल करके आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर सकता है। सर्दियों के दौरान, ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण घुसपैठ के पारंपरिक रास्ते बंद हो जाते हैं; इसलिए, बर्फबारी शुरू होने से पहले आतंकवादियों को भारतीय क्षेत्र में भेजने की कोशिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती हैं।
पहले भी ऐसी रिपोर्टें आई हैं जिनसे पता चलता है कि आतंकवादी लगातार एलओसी  और अंतरराष्ट्रीय सीमा, दोनों के जरिए घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। एक बार बर्फबारी से पहाड़ी दर्रे बंद हो जाने पर, इस बात का खतरा बढ़ जाता है कि आतंकवादी घुसपैठ के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा को एक अपेक्षाकृत सुरक्षित रास्ते के रूप में चुन सकते हैं। इसके जवाब में, सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों मोर्चों पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है।
जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ को रोकने के लिए सुरक्षा बल नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। बर्फबारी की संभावना को देखते हुए, भारतीय सेना को एलओसी पर हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि लॉन्चपैड से आतंकवादियों की किसी भी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया जा सके। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा की पहली पंक्ति के रूप में तैनात सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ)  को घुसपैठ विरोधी अभियानों को तेज करने का निर्देश दिया गया है।
आतंकवादियों की घुसपैठ की संभावना को देखते हुए, सीमा पर कड़ी सतर्कता बरतना बहुत महत्वपूर्ण है। पीओके  में 500 आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद, सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सर्दियों से पहले घुसपैठ की कोशिशें बढ़ सकती हैं।
सुरक्षा के लिहाज से सर्दियों से ठीक पहले का समय काफी संवेदनशील माना जाता है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी शुरू होने से पहले होने वाली घुसपैठ की कोशिशें सुरक्षा बलों के लिए एक अतिरिक्त चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में, नियंत्रण रेखा (एलओसी)  पर निगरानी और गश्त के साथ-साथ खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करना बेहद अहम होगा। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ  की बढ़ी हुई सतर्कता और घुसपैठ-रोधी अभियानों को तेज करना भी सुरक्षा ढांचे के अहम हिस्से माने जाते हैं।

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