दार्जिलिंग के जंगलों में प्रकृति का एक अनोखा नज़ारा

पर्यटकों ने कैमरे में एक दुर्लभ जीव को कैद किया

दार्जिलिंग के जंगलों में प्रकृति का एक अनोखा नज़ारा

निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और  कर्सियांग  के पहाड़ी इलाकों में नवरात्रि के दौरान प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने आए लोगों को यहां एक दुर्लभ नज़ारा देखने को मिला। कर्सियांग वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले 'डाउ हिल'  के जंगलों में एक बार फिर काला हिरण देखा गया है। इस दुर्लभ वन्यजीव को देखकर पर्यटकों के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों में भी काफी उत्सुकता बढ़ गई है।
पर्यटकों का एक समूह ऊंचे चीड़ के पेड़ों से घिरे डाउ हिल के जंगलों में ट्रेकिंग कर रहा था। इसी दौरान, समूह के एक सदस्य की नज़र एक पूरी तरह से काले हिरण पर पड़ी। पर्यटक ने बिना देर किए अपने कैमरे में इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीरें ले लीं। जंगल के सामने काले हिरण को देखकर पर्यटक बहुत खुश हुए।
डाउ हिल के जंगलों में काले हिरण के दिखने का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। इस साल की शुरुआत में, कर्सियांग के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) देबेश पांडे ने भी इसी जंगल में एक ऐसा ही हिरण देखा था और उसकी तस्वीरें ली थीं। अब उसी इलाके में फिर से काले हिरण के दिखने से, वहां मौजूद वन्यजीवों को लेकर चर्चा और तेज़ हो गई है।
एक ही इलाके में ऐसे दुर्लभ वन्यजीव का बार-बार दिखना वन विभाग के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे डाउ हिल के जंगलों में मौजूद वन्यजीवों की विविधता और उनके प्राकृतिक आवास के प्रति लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ी है।
जानवरों के शरीर में 'मेलानिन'  नाम का एक पिगमेंट (रंगद्रव्य) पाया जाता है, जो उनकी त्वचा और बालों का रंग तय करने में अहम भूमिका निभाता है। जब किसी जानवर के शरीर में मेलानिन का उत्पादन सामान्य से अधिक हो जाता है, तो उसका रंग गहरा या पूरी तरह से काला दिखाई दे सकता है। इस स्थिति को 'मेलानिज़्म' कहा जाता है। यह एक ऐसी विशेषता है जो आनुवंशिक बदलावों के कारण कुछ जानवरों में देखने को मिल सकती है। यह विशेषता काले तेंदुओं में भी पाई जाती है। कुछ हिरणों में भी 'मेलानिज्म'  हो सकता है।
डाउ हिल के जंगलों में देखे गए हिरणों को 'बार्किंग डियर'  प्रजाति का बताया जा रहा है। हालांकि, यह पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिक जांच ज़रूरी है कि क्या इन हिरणों के काले रंग के पीछे 'मेलानिज्म'  ही कारण है।
वन विभाग के अधिकारी इस बात से खुश हैं कि उसी इलाके में बार-बार काले हिरण देखे गए हैं। कर्सियांग के डीएफओ देबेश पांडे के अनुसार, इस इलाके में पहले भी दुर्लभ काले तेंदुए देखे जा चुके हैं। ऐसे में, यहां काले हिरणों का होना इस जंगल के लिए एक खास बात है।

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