01 मई को बुद्ध पूर्णिमा
वैशाख पूर्णिमा, पीपल पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं
01 मई को बुद्ध पूर्णिमा है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। वैशाख माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा, पीपल पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। वैशाख पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दान, पूजा और जप करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और भगवान बुद्ध की पूजा करने का विधान होता है। वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध पूर्णिमा भी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर भगवान विष्णु ने नौवां अवतार भगवान बुद्ध के रूप में लिया था। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 01 मई को है। ऐसे में आइए जानते हैं वैखाख पूर्णिमा की तिथि और महत्व के बारे में।
वैशाख माह की बुद्ध पूर्णिमा को गौतम बुद्ध के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। गौतम बुद्ध का जन्म का नाम सिद्धार्थ गौतम था। गौतम बुद्ध एक आध्यात्मिक गुरु थे, जिनकी शिक्षाओं से बौद्ध धर्म की स्थापना हुई थी।
गौतम बुद्ध के जन्म तथा मृत्यु के समय के विषय में अनेक मतभेद हैं, अतः उनकी जन्मतिथि अनिश्चित है। हालाँकि, अधिकांश इतिहासकारों ने बुद्ध के जीवनकाल को 563-483 ई.पू. के मध्य माना है। अधिकांश लोग नेपाल के लुम्बिनी नामक स्थान को बुद्ध का जन्म स्थान मानते हैं। बुद्ध की मृत्यु, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में हुई थी।
बौद्धों के लिये, बोध गया नामक स्थान गौतम बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। बोधगया के अतिरिक्त, कुशीनगर, लुम्बिनी तथा सारनाथ भी अन्य तीन महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं। यह माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया तथा उन्होंने पहली बार सारनाथ में धर्म की शिक्षा दी।
यह माना जाता है कि, गौतम बुद्ध को इसी दिन आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था। बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जयन्ती तथा वैसाक के नाम से भी जाना जाता है।
