टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने दिया इस्तीफा
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद को बताया वजह
निज संवाददाता : विधानसभा चुनाव नतीजों की घोषणा और बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई भाजपा सरकार के गठन के बाद से ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में राजनीतिक उठा-पटक का दौर चल रहा है। यहां पहले 58 विधायक बागी हुए अब सांसदों की बारी है। अब टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा सभापति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उन्होंने इस्तीफे के पीछे की वजह भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद बताया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में, पश्चिम बंगाल की जनता ने 14 साल के शासन के बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में उसकी नाकामियों, साथ ही तुष्टिकरण की राजनीति को पूरी तरह से नकार दिया।
उन्होंने बताया कि इन सभी कमियों को दरकिनार करते हुए, जनता ने बंगाल के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को ऐतिहासिक और निर्णायक जीत दिलाई है। उन्होंने कहा कि नई चुनी गई बीजेपी सरकार ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र को लागू करने और बंगाल के सर्वांगीण विकास व पुनर्निर्माण के लिए कई पहल शुरू कर दी हैं। सुखेंदु शेखर ने कहा कि जनता के इस ऐतिहासिक जनादेश का सम्मान करते हुए, मैं तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा की अपनी सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।
दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई बागी सांसद और विधायक सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शुभेंदु अधिकारी से मिलने के लिए इकट्ठा हुए। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई। इस बैठक में शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक की अंदर की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें बागी नेताओं को बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत करते हुए देखा जा सकता है। यहां मौजूद लोगों में शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालीपदा सोरेन, असित मल, बापी हलदर, अबू ताहिर, खलीकुर रहमान और अरूप चक्रवर्ती शामिल थे।
वहीं पूर्व टीएमसी नेता ऋतब्रत बनर्जी बनर्जी ने पुष्टि की कि वे बागी सांसदों के संपर्क में हैं और उन्होंने कल ही उनसे बात की थी। इससे पहले दिन में शुभेंदु अधिकारी को दिल्ली हवाई अड्डे पर भी देखा गया था। यह बैठक टीएमसी में संभावित फूट की बढ़ती अटकलों के बीच हुई है, क्योंकि बागी नेता राष्ट्रीय राजधानी में बीजेपी नेतृत्व से संपर्क बढ़ाने की कोशिशें तेज कर रहे हैं।
