सीएए के तहत जल्द ही शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता

केंद्रीय गृह मंत्री ने किया ऐलान

सीएए के तहत जल्द ही शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता


निज संवाददाता : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही नागरिकता संशोधन कानून (सीएए)  के तहत शरणार्थियों को नागरिकता देने का काम पूरा कर लेगी। वहीं घुसपैठियों को बाहर निकाल दिया जाएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने का अपना संकल्प दोहराया। अमित शाह मिलन मेला प्रांगण में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती समारोह में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि उनकी (मुखर्जी की) पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हिंदुओं को नागरिकता देने के लिए सीएए  लागू किया है। शुभेंदु भाई (शुभेंदु अधिकारी) मुझे रोज इसके बारे में याद दिलाते रहते हैं। हम जल्द ही नागरिकता देने का काम पूरा कर लेंगे।
अमित शाह ने कहा कि बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी)  लागू करने का रास्ता साफ करने के लिए एक कमिटी बनाई गई है। पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा संशोधन बिल यानी (पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव (संशोधन) विधेयक, 2026  पास हो गया है। हमने अपराधियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई का वादा किया था। यह क़ानून उस वादे को पूरा करने की दिशा में पहला कदम है।
अमित शाह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के बीच 1950 में हुए नेहरू-लियाकत समझौते का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि मुखर्जी को एहसास हो गया था कि यह समझौता पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने में नाकाम रहा।
अमित शाह ने कहा कि मैंने 1950 में पहली कैबिनेट से श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस्तीफे का पत्र पढ़ा है। उन्हें लगा कि समझौते के तहत भारत ने तो अपनी अल्पसंख्यक आबादी की रक्षा की,  लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा करने में नाकाम रहा। उन्होंने इस समझौते को एकतरफा बताते हुए इस्तीफा दे दिया था। साथ ही, उन्होंने घुसपैठियों को बाहर निकालने का अपना संकल्प भी दोहराया। उन्होंने कहा कि मैंने यह बार-बार कहा है। हम राज्य से हर घुसपैठिए को बाहर निकालेंगे।
अमित शाह ने बीजेपी को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जनसंघ का वैचारिक और संगठनात्मक विस्तार बताया। इसे उन्होंने नेहरू की कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद 1951 में बनाया था। अमित शाह ने कहा कि जनसंघ ने भारत में राष्ट्रवादी ताकतों को एकजुट किया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखी। जनसंघ बीजेपी में बदल गया और भारत के लगभग दो-तिहाई भौगोलिक क्षेत्र में फैल गया।
इससे पहले दिन में, शाह न्यू टाउन में उस शिलान्यास समारोह में शामिल हुए जहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फ़ीट ऊंची प्रतिमा बनाई जाएगी। अमत शाह ने कहा कि यह सिर्फ़ एक प्रतिमा का समारोह नहीं है, बल्कि 'सोनार बांग्ला' के संकल्प को पूरा करने का भी एक काम है। मैंने शुभेंदु जी से रक्षा अनुसंधान के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्थान स्थापित करने का अनुरोध किया है। इसके बाद उन्होंने भवानीपुर में मुखर्जी के पैतृक घर का दौरा किया। अमित शाह ने इतने कम समय में बीजेपी  के चुनावी घोषणापत्र पर काम शुरू करने के लिए राज्य की भूमिका की तारीफ की। अमित शाह ने कहा कि कोई दूसरी राज्य सरकार इतने कम समय में इतने सारे वादों पर काम शुरू नहीं कर सकती थी। वे चुनावी वादों पर तेजी से काम कर रहे हैं और अब पूरा देश बंगाल की ओर देख रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने उन वादों का ज़िक्र किया जिन पर काम शुरू हो चुका है, जैसे अन्नपूर्णा योजना, उज्ज्वला 3.0, महिलाओं के लिए मुफ़्त बस यात्रा, लखपति दीदी योजना, आयुष्मान भारत और महिलाओं के लिए कैंसर अस्पताल। अमित शाह ने कहा कि मुकदमा चलाने से जुड़ी कुछ मंजूरियां राज्य सरकार के पास रुकी हुई थीं। मैंने दोपहर में शुभेंदु को फोन किया और दोपहर 2.30 बजे तक हमें मंजूरियां मिल गईं।

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