सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला
गृहणियों को बताया 'राष्ट्र निर्माता'
निज संवाददाता : सड़क हादसे के क्लेम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाली गृहणियों के लिए दिए जाने वाला मुआवजा तय करते समय उनके घरेलू काम के महत्व को समझा जाना चाहिए। उनकी इस महत्वपूर्ण सेवा का मूल्य कम से कम 30 हजार रुपए महीना माना जाना चाहिए। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा-गृहणियां परिवार और समाज के लिए अपनी भूमिका के चलते 'राष्ट्र निर्माता' का दर्जा पाने की हकदार हैं।
मामला पंजाब में 2001 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। घटना में रेशमा नाम की महिला की मौत हो गई थी। उनके पति और 3 बच्चों ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 2003 में वहां से अपर्याप्त मुआवजे का आदेश मिला। दिसंबर, 2024 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला आया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में हुई देरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों के जल्द निपटारे को जरूरी बताया। जजों ने अपने फैसले में सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से कहा है कि वह मोटर एक्सीडेंट क्लेम के मामलों की निगरानी करें। इस बात को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाए कि ऐसे मामलों का निपटारा एक साल के भीतर हो सके।
2021 के 'कीर्ति बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस' और 2010 के 'अरुण कुमार अग्रवाल बनाम नेशनल इंश्योरेंस' जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गृहणियों के काम का आर्थिक मूल्य है। उसे 'मुफ्त या शून्य' नहीं कहा जा सकता। इन फैसलों के बाद अब तक सड़क हादसों में मरने वाली गृहणियों का मुआवजा तय करने के लिए उनकी काल्पनिक आय को कुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी के बराबर माना जा रहा था। अब कोर्ट ने बीमा क्लेम के मामलों में गृहणियों की 'न्यूनतम काल्पनिक आय' तय कर दी है।
फैसला देते समय कोर्ट ने यह साफ किया है कि न्यूनतम 30 हजार रुपए की मासिक आय को ध्यान में रखते हुए की गई मुआवजे की गणना से 2017 के 'नेशनल इंश्योरेंस बनाम प्रणय सेठी' केस पर अंतर नहीं पड़ेगा। ध्यान रहे कि 'प्रणय सेठी' केस में सुप्रीम कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट का मुआवजा तय करते समय भविष्य में मृतक की संभावित आय, संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों की भी गणना की बात कही थी। अब दोनों फैसले एक साथ लागू होंगे। ऐसे में अब गृहणियों की मृत्यु पर मिलने वाली मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी होगी।
