बंगाल के सरकारी दफ्तरों में अनिवार्य हुई बांग्ला भाषा
नई नीति 1 सितंबर से होगी लागू
अमित शाह ने मुख्यमंत्री को दी थी सलाह
निज संवाददाता : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को विधानसभा में घोषणा की कि 1 सितंबर से राज्य के सभी सरकारी कामों के लिए बांग्ला भाषा को अनिवार्य होगी। यह फैसला राज्य के सरकारी कामों के लिए लिया गया है। वहीं केंद्र सरकार के साथ आधिकारिक बातचीत के लिए हिंदी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार 1 सितंबर से सभी तरह के पब्लिक कम्युनिकेशन चैनलों (सार्वजनिक संचार चैनल) पर बांग्ला भाषा का इस्तेमाल अनिवार्य कर देगी। इसमें नागरिकों के लिए सेवाएं, डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम, एप्लीकेशन फॉर्म, सर्टिफिकेट, पोर्टल, वेबसाइट, मोबाइल एप्लीकेशन, ट्रेनिंग का सामान, पब्लिक साइनबोर्ड, प्रेस रिलीज और दूसरी आधिकारिक बातचीत शामिल हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आज मैं आयोग की रिपोर्ट जारी कर रहा हूं, जिसे 2011 में टीएमसी सरकार के दौरान जस्टिस सुशांत चटर्जी की अध्यक्षता में बनाया गया था। 1 सितंबर 2026 से सरकारी कामकाज में बांग्ला भाषा का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि भूमि और भूमि सुधार विभाग से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक का कामकाज बांग्ला भाषा में होगा।
उन्होंने कहा कि नागरिकों की सेवाओं, हलफनामों, ऐप्स, नागरिक चार्टर, एफआईआर और नोटिफिकेशन के लिए बांग्ला का इस्तेमाल किया जाएगा। मंत्री और विधायकों को शुभेंदु अधिकारी को 1 हफ्ते के अंदर पत्र का जवाब देना होगा। एक लिस्ट सीएमओ को भेजनी होगी। उन्होंने कहा कि मैं एक हफ्ते के अंदर अनुपालन रिपोर्ट दूंगा।
शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें पत्र लिखकर प्रशासन में बांग्ला भाषा का ज्यादा इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था। मुख्यमंत्री ने शाह के पत्र को पढ़कर सुनाया-यह साल भारत के महान शिक्षाविद, राजनेता और गहरे विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का साल है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय भाषाओं के संरक्षण, विकास और व्यापक इस्तेमाल के जबरदस्त समर्थक थे। उनका पक्का मानना था कि भारतीय भाषाओं को प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में अपना सही स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था तभी असरदार और जन-केंद्रित हो सकती है जब वह लोगों की अपनी भाषा में काम करे।
मालूम हो कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में ‘वर्ड लाइब्रेरी’ का उद्घाटन किया था। उन्होंने उद्घाटन मंच से बांग्ला भाषा के रुतबे और इस्तेमाल को बढ़ाने का संदेश दिया था। शाह ने इस बारे में मुख्यमंत्री शुभेंदु को एक चिट्ठी भी दी। उस चिट्ठी के बारे में शाह ने कहा-मैंने शुभेंदु को चिट्ठी लिखकर अपने दिल की बात कही है। मुझे विश्वास है कि शुभेंदु मेरा वह सपना ज़रूर पूरा करेंगे।
चिट्ठी में केंद्रीय गृह मंत्री ने लिखा, भारतीय भाषाओं को प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनकी सही जगह मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि शासन तभी असरदार और लोगों को ध्यान में रखकर चल सकता है जब आम लोग अपनी भाषा में काम करें। ऐसे में उन्होंने शुभेंदु को प्रस्ताव दिया कि पश्चिम बंगाल में बंगाली भाषा के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन के हर स्तर पर ज़रूरी कदम उठाए जाने चाहिए। शाह ने भूमि एवं भूमि सुधार विभाग से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) तक, प्रशासन के हर स्तर पर बांग्ला भाषा को अहमियत देने का प्रस्ताव रखा। शाह ने मुख्यमंत्री को सरकारी फाइलों, नोट्स, लेटर या किसी भी सरकारी निर्देश में बांग्ला भाषा का इस्तेमाल करने की सलाह दी। एफआईआर फाइल करने में भी बांग्ला को प्राथमिकता देने को कहा गया है। शाह ने पत्र में यह भी कहा कि केंद्र या दूसरे राज्यों के साथ कम्युनिकेशन में विदेशी भाषाओं की जगह बांग्ला और हिंदी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री के इन प्रस्तावों को मानते हुए राज्य सरकार ने अब नई भाषा नीति का ऐलान किया है।
