पूरी तरह से प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की माताओं को नहीं मिलेंगे अन्नपूर्णा के 3,000 रुपये
सीएम शुभेंदु ने किया खुलासा
निज संवाददाता : राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई बीजेपी सरकार महिलाओं को अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत तीन हजार रुपए की सुविधा दे रही है। इसके लिए अन्नपूर्णा भंडार के फॉर्म में परिवार की सारी डिटेल्स देनी होती हैं। यहां तक कि बच्चा किस स्कूल में पढ़ रहा है, यह भी बताना होता है। ऐसे में इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट का फायदा किसे मिलेगा और किसे नहीं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को एक सरकारी कार्यक्रम में यह बात साफ कर दी। उन्होंने साफ कहा कि जिनके बच्चे सरकारी या सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उन्हें अन्नपूर्णा भंडार का पैसा मिलेगा। प्राइवेट स्कूलों के मामले में, अगर सरकारी मंजूरी है, तो उन्हें 3,000 रुपये मिलेंगे। नहीं तो नहीं। यानी सरकारी मंजूरी प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की माताओं को ही अन्नपूर्णा के 3,000 रुपये मिलेंगे। सत्ता में आने के बाद से ही बीजेपी की सरकार एक-एक करके अपने चुनावी वादे पूरे कर रहे हैं। जून में कई लोगों को अन्नपूर्णा भंडार का पैसा मिला। इस समय, पूरे राज्य में जन कल्याण शिविर चल रहे हैं। वहां, हर दिन लोग अन्नपूर्णा भंडार के लिए अप्लाई कर रहे हैं। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर सभी के मन में हजारों सवाल हैं। क्योंकि, आवेदन फॉर्म में घर के मुखिया समेत परिवार के सभी सदस्यों की सारी जानकारी देनी होती है। फॉर्म में ज़मीन की रकम, बच्चे के स्कूल का नाम और कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी। यानी सरकार परिवार की वित्तीय हालत समझना चाहती है। इसलिए, लोगों का मानना है कि एक तय आय से ऊपर अन्नपूर्णा भंडार का पैसा नहीं मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा-पिछली सरकार की इसी तरह की स्कीम (लक्खी भांर) में बड़े पैमाने पर करप्शन था। मुर्शिदाबाद में 4,500 से ज़्यादा पुरुषों को स्कीम का फायदा मिल रहा था। इसलिए हम थोड़ा ध्यान रखकर चल रहे हैं। 1 करोड़ से ज़्यादा आवेदन पहले ही जमा हो चुके हैं। इसके बाद सीएम ने कहा-जिनके बच्चे सरकारी या सरकार के स्कूलों में पढ़ते हैं, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। प्राइवेट स्कूलों को भी मिलेगा, लेकिन तभी जब सरकार इसे मंज़ूरी देगी। लेकिन जिन स्कूलों में धार्मिक शिक्षा दी जाती है, भारत विरोधी बातें सिखाई जाती हैं, उनके छात्रों के अभिभावकों को यह नहीं मिलेगा। क्योंकि वह शिक्षा मुख्यधारा में नहीं आती।
इसके साथ ही, शुभेंदु ने साफ किया कि जिन लोगों ने कोरोना काल में सरकारी वैक्सीन नहीं ली, उन्हें भी यह अलाउंस (भत्ता) नहीं मिलेगा।
