तस्लीमा नसरीन को मिला ‘उमा सम्मान’
निर्वासित लेखिका ने कोलकाता पुस्तक मेले में आने की इच्छा जताई
निज संवाददाता : बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन को कोलकाता के महाजाति सदन में ‘उमा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें ‘ले रिदम’ द्वारा आयोजित ‘शिकोल भांगार गोल्पो’ (बेड़ियां तोड़ने की कहानियां) कार्यक्रम के दौरान दिया गया। अपनी कविताएं सुनाने के साथ-साथ, उन्होंने महिलाओं के दर्द, प्यार और आज़ादी के बारे में भी बात की। कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान, तस्लीमा ने बंगाल में रहने और कोलकाता पुस्तक मेले में आने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की।
नई सरकार के कार्यकाल में राज्य के हालात की तारीफ़ करते हुए तस्लीमा ने कहा-नई सरकार के तहत राज्य अच्छा काम कर रहा है। कई लोगों ने मुझे ऐसा बताया है और मुझे भी यह अच्छा लगता है। एक सरकार ने मुझे बाहर निकाल दिया। दूसरी ने मेरे आने पर रोक लगा दी और एक और सरकार मुझे वापस ले आई। दोनों स्थितियों में बहुत बड़ा फ़र्क है। उन्होंने कोलकाता पुस्तक मेले में जाने, बंगाल में रहने और अलग-अलग जगहों की यात्रा करने की अपनी इच्छा फिर से दोहराई। लंबे समय से बंगाल से बाहर रह रहीं लेखिका की इस इच्छा का ज़िक्र कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा बन गया।
‘ले रिदम’ और ‘दिशाशक्ति न्यूज़’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में तस्लीमा ने अपनी कई कविताएं सुनाईं, जिनमें ‘मायेर काचेओ चिट्ठी’ (मां को एक पत्र) भी शामिल थी। सोमदत्ता बंद्योपाध्याय, मौसमी हुसैन और पियाली हलदर ने उनकी कविताओं और अन्य रचनाओं पर आधारित गीत प्रस्तुत किए, जिनका संगीत मौसमी हुसैन ने तैयार किया था। मैत्रेयी पहाड़ी ने देवी की आराधना (देवी वंदना) पर आधारित एक नृत्य प्रस्तुति की कोरियोग्राफी की।
कार्यक्रम का मुख्य विषय महिलाओं के संघर्ष, आत्म-अभिव्यक्ति और आज़ादी की चाहत पर केंद्रित था। इस पर बात करते हुए तस्लीमा ने कहा-आज का कार्यक्रम उन गीतों को समर्पित है जो महिलाओं के दर्द, प्यार और आज़ादी का जश्न मनाते हैं। उनकी कविताएं न केवल व्यक्तिगत भावनाओं को दर्शाती हैं, बल्कि महिलाओं की सामाजिक स्थिति और आज़ादी के लिए उनकी तड़प को भी उजागर करती हैं।
इस दिन, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अहम योगदान देने वाली महिलाओं को ‘उमा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, दिवंगत गायिका रिनी मुखोपाध्याय की याद में शुरू किया गया 'रिनी मुखोपाध्याय लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' कई जाने-माने नागरिकों को दिया गया। हाल ही में गुज़रीं गायिका विभा सेनगुप्ता को भी मरणोपरांत सम्मान दिया गया और यह अवॉर्ड उनके परिवार वालों को सौंपा गया। सम्मानित होने वालों में विधायक रत्ना देबनाथ, टेराकोटा कलाकार डोलन कुंडू मंडल, मैत्रेयी पहाड़ी और कई अन्य कामयाब महिलाएं शामिल थीं।
इस कार्यक्रम में उद्योग मंत्री तापस रॉय, शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल, स्वामी कृपाकरानंद महाराज, जादूगर पी.सी. सरकार जूनियर, पनिहाटी की विधायक रत्ना देबनाथ के साथ-साथ पी.सी. चंद्रा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुणकुमार चंद्रा और जॉइंट डायरेक्टर शुभ्रा चंद्रा भी शामिल हुए। तापस रॉय ने कहा-आज के कार्यक्रम में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं यहां कई माताओं और बहनों से मिला हूं; उनमें से हर एक देवी दुर्गा का जीता-जागता रूप है।
'ले रिदम' , दिल्ली में स्थित एक गैर-लाभकारी सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था है, जो भारतीय कला और संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। इसके सह-संस्थापक राजीव मुखोपाध्याय ने कहा, "रिनी मुखोपाध्याय ने 'ले रिदम' की स्थापना एक मज़बूत सांस्कृतिक आंदोलन बनाने के मकसद से की थी, जो परंपरा और आधुनिकता का मेल हो। आज भी हम उनकी विरासत को आगे बढ़ाने और सामाजिक बदलाव के लिए कला को एक सशक्त माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
