लव जिहाद और धर्मांतरण के खिलाफ राज्य में बनेगा सख्त कानून

सीएम शुभेंदु ने किया ऐलान

लव जिहाद और धर्मांतरण के खिलाफ राज्य में बनेगा सख्त कानून


निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कहा कि राज्य में जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार जल्द ही एक सख्त कानून लाएगी। मुख्यमंत्री ने भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के रचयिता ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श वाक्य को अपना मार्गदर्शक मानकर आगे बढ़ेगा। समान नागरिक संहिता के साथ-साथ राज्य सरकार भूमि जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाने जा रही है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब से  पश्चिम बंगाल  में राष्ट्रविरोधी ताकतों और व्यक्तियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल चैतन्य देव,  नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि है। भूमि जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाने के अलावा, हम अवैध घुसपैठियों को पहले हिरासत केंद्रों में भेजने और फिर वहां से उन्हें उनके मूल स्थान पर वापस भेजने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सीएम ने यह भी कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य सरकार पश्चिम बंगाल की धरती पर कभी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की जनता ने राज्य को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से बचाने का आधा काम कर दिया है। शेष कार्य हम पूरा करेंगे। पश्चिम बंगाल में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं होगी जो  ऑपरेशन सिंदूर  का मजाक उड़ाते हैं,  राष्ट्र का अपमान करते हैं और पहलगाम हमले के दौरान चुप रहते हैं।
हालांकि,  मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने वाले सभी शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता प्रदान की जाएगी। सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पांच नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें से दो सबसे महत्वपूर्ण विधेयक समान नागरिक संहिता और राज्य में असामाजिक गतिविधियों से निपटने के उपायों से संबंधित होंगे।
सोमवार को समान नागरिक संहिता विधेयक पेश होने के साथ ही पश्चिम बंगाल धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों को प्रतिस्थापित करने वाली एक एकीकृत नागरिक संहिता प्रणाली को अपनाने वाला चौथा भारतीय राज्य बन जाएगा। यह संहिता धर्म, जाति या जनजाति की परवाह किए बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगी। अन्य तीन राज्य जिन्होंने पहले ही समान नागरिक संहिता को अपना लिया है, वे हैं  उत्तराखंड,  गुजरात  और  असम।

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