माओवादी पोलित ब्यूरो के एकमात्र जीवित सदस्य मिसिर बेसरा गिरफ़्तार
उनके सिर पर था 1 करोड़ रुपए का इनाम
निज संवाददाता : माओवादी पोलित ब्यूरो के एकमात्र ज़िंदा सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे मंगलवार को झारखंड से पुलिस ने गिरफ्तार किया। मिसिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था। उसके साथ दो और कमांडर भी गिरफ्तार हुए हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मिसिर पिछले दो दशकों से पुलिस और सेंट्रल फोर्स से भाग रहा था। हाल ही में पुलिस को जानकारी मिली कि यह टॉप माओवादी लीडर झारखंड में पार्श्वनाथ हिल्स से सटे जंगल में कुछ साथियों के साथ छिपा हुआ है। इसके बाद सीआरपीएफ, गिरिडीह और धनबाद पुलिस थानों ने मिलकर तलाशी शुरू की। रात करीब 9 बजे धनबाद-गिरिडीह बॉर्डर पर जंगल में भागते समय उसे पकड़ लिया गया।
पुलिस के मुताबिक, मिसिर को 2007 में एक बार झारखंड में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, 2009 में पुलिस उसे एक केस में पेशी के लिए बिहार के लखीसराय डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ले गई थी। उस समय माओवादियों ने घात लगाकर कोर्ट परिसर पर हमला कर दिया था। माओवादी लीडर को पुलिस से छीन लिया गया।
झारखंड पुलिस के मुताबिक, मिसिर बेसरा का घर गिरिडीह जिले के हलराडीहिट में है। माओवादी संगठन का यह टॉप लीडर अभी अकेला ज़िंदा सदस्य है। बाकी पोलित ब्यूरो सदस्य या तो पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं या मुठभेड़ में मारे गए हैं। 66 साल के मिसिर बेसरा के सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था। मिसिर बेसरा, हालांकि उनका असली नाम भास्कर और सागर है, ग्रुप में उन्हें भास्कर और सागर के नाम से भी जाना जाता है। जानकारों का मानना है कि ऐसे लीडर की गिरफ्तारी देश में माओवादी संगठन के लिए आखिरी कील है।
