दमदम एयरपोर्ट में बनी 136 साल पुरानी मस्जिद में नमाज बंद
निज संवाददाता : कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर बनी 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद पर पिछले चार दिनों से नमाज नहीं हो रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने शनिवार को तीन दिनों के लिए इस मस्जिद में एंट्री पर रोक लगाई थी। यह प्रतिबंध अभी भी नहीं हटाया गया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियां मस्जिद को शिफ्ट करने की मांग पिछले 28 साल से कर रही थी, मगर वाममोर्चा और टीएमसी सरकारों ने इसकी अनुमति नहीं दी। इस विवाद के कारण रनवे एक्सटेंशन का काम भी अटका रहा। पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल और स्थानीय विधायक सौरव सिकदर ने कहा कि अब रनवे विस्तार के लिए मस्जिद को हटाया जाएगा। उनके बयान से बंगाल में राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। टीएमसी और पश्चिम बंगाल जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने विरोध शुरू कर दिया है।
कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट के अंदर बनी बांकड़ा मस्जिद को दूसरी जगह ले जाने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। सिर्फ नमाजियों के आने-जाने पर रोक लगाई गई है। आम दिनों में 50 लोगों को सीआईएसएफ की चेकिंग के बाद नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाती थी, मगर उनका बायोमैट्रिक जांच नहीं होता था। शुक्रवार को नमाजियों का संख्या 80 तक होती थी। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) ने एयरपोर्ट परिसर में एंट्री पर चिंता जताई थी। अब पिछले 3 दिनों से नमाज नहीं पढ़ी जा रही है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद का कहना है कि मस्जिद 136 साल पुरानी है, जबकि एयरपोर्ट को 1924 में बनाया गया। यहां नमाजी दशकों से नमाज पढ़ रहे हैं।
एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक कोलकाता ( दमदम) का नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट व्यस्त हवाई अड्डों में छठे नंबर पर है। यहां से प्रतिदिन 60,000 से 70,000 यात्री आते-जाते हैं। दुर्गा पूजा में फुटफॉल 3 लाख से ज्यादा हो जाता है। बांकड़ा मस्जिद के पास ही कोलकाता एयरपोर्ट का दूसरा रनवे है और इसका विस्तार का काम दशकों से अटका है।
फिलहाल दूसरे रनवे की ऑपरेशनल लंबाई घटकर 2,832 मीटर रह गई। यह मस्जिद अब दूसरे रनवे से सिर्फ़ 165 मीटर दूर है। नियमों के मुताबिक, किसी भी रनवे और किसी कंस्ट्रक्शन के बीच कम से कम 240 मीटर की दूरी होना जरूरी है। इस मजबूरी के कारण बड़े आकार वाले एयरोप्लेन को मुख्य रनवे पर ही निर्भर रहना पड़ा।
विधायक सौरव सिकदर का कहना है कि 1998 में बीजेपी सांसद तपन सिकदर ने मस्जिद का मामला संसद में उठाया था। तब तत्कालीन एविएशन मिनिस्टर शहनवाज हुसैन ने सीएम बुद्धदेब भट्टाचार्य से बात की थी, मगर कोई नतीजा नहीं निकला। ममता बनर्जी के सरकार में भी केंद्र के प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि बांकरा मस्जिद ही नहीं, एयरपोर्ट के पास बने एक मंदिर को भी दूसरी जगह ले जाया जाएगा। बीजेपी के नेता दिलीप घोष ने भी कहा कि मस्जिद को अब एयरपोर्ट परिसर से हटाया जाएगा।
एयरपोर्ट के अंदर मौजूद बांकुड़ा मस्जिद को गौरीपुर जामा मस्जिद भी कहा जाता है। यह मस्जिद गांव का हिस्सा थी और इसे 1890 के दशक में बनाया गया था। अंग्रेजों ने 1924 में दमदम हवाई अड्डा बनाया और बाद में फ्लाइंग क्लब खोला। तब गांव और मस्जिद को शिफ्ट नहीं किया गया। 1950 के दशक में एयरपोर्ट विस्तार के दौरान गांवों को हटा दिया गया, मस्जिद वहीं बनी रही। 60 के दशक में एयरपोर्ट में दूसरा रनवे बना। इसके बाद मस्जिद की मौजूदगी पर सुरक्षा संबंधित सवाल खड़े हुए।
