टीएमसी नेताओं व बाहुबलियों की ‘क्रिमिनल परेड’ पर

हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को लगाई फटकार

टीएमसी नेताओं व बाहुबलियों की ‘क्रिमिनल परेड’ पर


निज संवाददाता :  बंगाल में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर इन दिनों बवाल देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कई प्रभावशाली नेताओं और बाहुबलियों को गिरफ्तारी के बाद उनके इलाकों में सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में आरोपियों को कभी अंडरवियर में, कभी हथकड़ी और कमर में रस्सी बांधकर पुलिस के साथ चलते देखा गया। कई मामलों में आरोपियों को कान पकड़कर उठक-बैठक करते और लोगों से माफी मांगते भी देखा गया।
सबसे ज्यादा चर्चा टीएमसी  नेता जहांगीर खान की गिरफ्तारी को लेकर है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने के बाद उनके गढ़ फालता में तीन बार घुमाया। इस कार्रवाई से उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखी गई। आरोप है कि उनकी पत्नी के नेतृत्व में समर्थकों ने पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी की। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई जांच और क्राइम सीन के पुनर्निर्माण का हिस्सा थी।
इसी तरह हावड़ा के चर्चित आकाश सिंह, उत्तर 24 परगना के स्थानीय टीएमसी  नेता रॉय, कमरहाटी के गुड्डू अंसारी और शमीम अहमद उर्फ बोरे-गब्बर को भी इसी तरह सार्वजनिक तौर पर घुमाया गया। इन सभी पर जबरन वसूली, जमीन कब्जाने, मारपीट, धमकी और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर आरोप हैं। इन घटनाओं के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी आरोपी को गिरफ्तार करना और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना पुलिस का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक रूप से अपमानित करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमा के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से इन कार्रवाइयों के नियम और आधार पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को अपराध स्थलों पर ले जाकर घटनाक्रम को दोबारा समझने के लिए यह जरूरी था। हालांकि कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने ऑफ रिकॉर्ड माना कि इसका एक उद्देश्य इन बाहुबलियों के ‘अजेय’ होने की छवि तोड़ना भी है। वहीं टीएमसी  सांसद कल्याण बनर्जी ने पुलिस की इस कार्रवाई को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि पार्टी कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है। वहीं विपक्षी नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे कानून के राज की स्थापना करार दिया और कहा कि अब राज्य में माफिया संस्कृति को खत्म किया जाएगा।

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