सयानी घोष ने भी पकड़ी बगावत की राह
ताश के पत्तों की तरह बिखर रही टीएमसी
निज संवाददाता : ममता बनर्जी की बेहद करीबी और टीएमसी की फायरब्रांड चेहरा सयानी घोष के भी बागी होने की खबर है। सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट में कुल 20 लोकसभा सांसद शामिल हैं। इनमें सयानी घोष और सुदीप बंदोपाध्याय का भी नाम शामिल हैं। इसके अलावा दो राज्यसभा सांसदों (सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव) ने भी इस्तीफा दे दिया है। सयानी घोष बंगाल के जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी की सांसद हैं।
बंगाल में 15 साल की सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी इस समय सबसे कठिन या फिर यूं कहें कि सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं। उनके सामने पार्टी और संगठन दोनों के बचाने की चुनौती है। पार्टी में बगावत के बाद जो कभी उनके (ममता के) अपने थे, वो भी अब उनका साथ छोड़ रहे हैं। विरोधी सुरों ने ममता को बिल्कुल अकेला छोड़ दिया है। स्थिति पार्टी के अस्तित्व पर संकट जैसी हो गई है।
तृणमूल कांग्रेस में बगावत का दौर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के निष्कासन के बाद से चला। पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते ममता ने इन दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी बागी होकर अपने साथ 58 विधायक ले गए और विपक्ष के नेता बन गए। हालांकि, ये सभी विधायक टीएमसी में ही हैं। इसके बाद बारी आई सांसदों की।
बीते दिनों टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष की अगुवाई में तृणमूल के कई सासंदों ने भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक की थी। इस दौरान बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र दिया। इसमें 20 सांसदों के सिग्नेचर थे। काकोली ने अलग गुट बनाने का दावा किया। बता दें कि लोकसभा में तृणमूल के कुल 28 सांसद हैं।
सोमवार यानी 8 जून को टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने इस्तीफा दे दिया। ये इस्तीफा उस वक्त हुआ, जब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी दिल्ली में थीं। इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा ले रही थीं। उन्होंने इस्तीफे की एक कॉपी ममता को भी भेजी थी। यह ममता के लिए दिल्ली में एक बड़ा झटका था। इसके दो दिन बाद बुधवार 10 जून को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी टीएमसी छोड़ दी। सुष्मिता 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। इससे पहले वह कांग्रेस में थीं। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा से मुलाकात की। इन दोनों सासंदों का इस्तीफा यह दिखाता है कि ममता की टीएमसी लगातार कमजोर होती जा रही है।
