अंडा उत्पादन प्रोत्साहन योजना के तहत 20 हजार लोगों को मिला है रोजगार

एमसीसीआई के सम्मेलन में बोले मंत्री स्वपन देबनाथ

अंडा उत्पादन प्रोत्साहन योजना के तहत 20 हजार लोगों को मिला है रोजगार

मर्चेंट चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) ने ‘ग्रामीण आजीविका से वैश्विक बाजार तक : पश्चिम बंगाल के पशुधन और जलीय कृषि क्षमता का विस्तार’ विषय पर सम्मेलन का आयोजन किया।

निज संवाददाता : मर्चेंट चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) ने ‘ग्रामीण आजीविका से वैश्विक बाजार तक : पश्चिम बंगाल के पशुधन और जलीय कृषि क्षमता का विस्तार’  विषय पर सम्मेलन का आयोजन किया।
इस मौके पर राज्य के पशु संसाधन विकास मंत्री स्वपन देबनाथ ने पशुपालन और मत्स्यपालन पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए एमसीसीआई को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का भी मानना है कि इस क्षेत्र में संगठित उद्योग बनने की अपार संभावनाएं हैं। देबनाथ ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने मुर्गीपालन के लिए अंडा उत्पादन प्रोत्साहन योजना 2017 को 31 अगस्त 2025 तक बढ़ा दिया है। इस योजना के तहत अब तक अंडे का कुल उत्पादन बढ़कर 33.90 करोड़ रुपये हो गया है और 20,000 लोगों को रोजगार मिला है।
मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम बंगाल में अंडे की कुल मांग 1528 करोड़ है,  जबकि राज्य ने 1690 करोड़ अंडे का उत्पादन किया है। इसलिए, पश्चिम बंगाल अंडे के उत्पादन में आत्मनिर्भर है। देबनाथ ने बताया कि विभाग ने जलपाईगुड़ी में पोल्ट्री ब्रीडिंग फर्म की स्थापना की है। पश्चिम बंगाल सरकार ने फुटबॉल विश्व कप 2022 के लिए कतर को मांस निर्यात किया।
इस मौके पर राज्य के पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप मजूमदार ने कहा कि “अनंदधारा”  के तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने 12 लाख 10 हजार स्वयं सहायता समूहों का गठन किया है,  जहां आईआईएम के तहत गुणवत्तापूर्ण स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षित किया जाता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मछली की लोचदार मांग का उल्लेख किया। अन्य मुद्दों के अलावा, उन्होंने कहा कि राज्य एमएसपी से अधिक कीमत पर धान खरीदता है।
मजूमदार ने बताया कि पश्चिम बंगाल ने भारत में 3-4 फीसदी की तुलना में 18 फीसदी की दर से अंडा उत्पादन में वृद्धि दर्ज की है। पश्चिम बंगाल ने 2024 तक 76.5 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन किया और कॉर्पोरेट पश्चिम बंगाल में डेयरी व्यवसाय में प्रवेश कर सकते हैं।
मत्स्य पालन, जलीय कृषि, जलीय संसाधन और मछली पकड़ने के बंदरगाह राज्य मंत्री (आईसी) बिप्लब रॉय चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल भारत में मछली का सबसे बड़ा उत्पादक है। अब राज्य ने बिहार, ओडिशा, झारखंड को मछली निर्यात करना शुरू कर दिया है। मंत्री ने कहा कि अभय पुकुर योजना के तहत राज्य सरकार ने 33 दुर्लभ प्रजातियों की मछलियां खरीदी हैं। विभाग ने इस खरीद योजना के लिए पहले ही 20 तालाबों की पहचान कर ली है। राज्य अब बड़ी मछलियों के शिकार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और हिल्सा मछली पकड़ने पर भी विशेष जोर दे रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग ने मछुआरों के लिए क्यूआर पहचान पत्र जारी किया है, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करता है।
इस मौके पर विशेष सचिव, पशु संसाधन विकास विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार डॉ. अभिजीत शेवाले (आईएएस) ने कहा कि पुरुलिया के एक सुदूर ब्लॉक में किसान मुर्गे और बकरे का वजन नहीं करवा रहे थे। जब एफपीसी का गठन हुआ तो मुर्गे और काली बंगाल बकरी का वजन किया जाने लगा। डॉ. शेवाले ने बताया कि एफपीसी ने बकरी का चारा पेश किया है जो प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। उन्होंने कहा कि पशुधन से होने वाली आय महिलाओं को मिलती है जबकि फर्म से होने वाली आय पुरुषों को मिलती है। 
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल पशुधन विकास निगम लिमिटेड (डब्ल्यूबीएलडीसीएल) के प्रबंध निदेशक डॉ. उत्पल कुमार कर्मकार ने बताया कि पिछले साल पश्चिम बंगाल पशुधन विकास निगम लिमिटेड (डब्ल्यूबीएलडीसीएल) ने कुल 1600 करोड़ रुपये का कारोबार किया। हरिनघाटा मीट प्लान में 300 जीवित चिकन काउंटर हैं,  जहां प्रतिदिन 15000 मुर्गियों का वध किया जाता है और कुल 700 फ्रोजन मीट आउटलेट हैं। डॉ. कर्मकार ने बताया कि ब्रॉयलर इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट के तहत 2800 किसानों को चिकन फीड मिल रही है। डब्ल्यूबीएलडीसीएल ने 800 इनहाउस रोजगार का आश्वासन दिया है। कल्याणी में डीज़ डायग्नोस्टिक लैब की स्थापना की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में कुल मीट की बिक्री 34 करोड़ रुपये से बढ़कर 106 करोड़ रुपये हो गई है।
एमसीसीआई के अध्यक्ष अमित सरावगी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि पशुपालन और मत्स्य पालन क्षेत्र पारंपरिक प्रथाओं से आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित उद्योगों में विकसित हुए हैं, जो भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो खाद्य सुरक्षा, रोजगार और हमारे देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में। अंतर्देशीय मछली उत्पादन में राज्य पहले स्थान पर है, जो भारत के कुल मत्स्य उत्पादन में 18.5 फीसदी का योगदान देता है, और झींगा और सजावटी मछली उत्पादन में अग्रणी है। पशुधन में, पश्चिम बंगाल भारत के मांस उत्पादन में 12.62 फीसदी हिस्सेदारी रखता है, जिसमें मुर्गी और बकरी का मांस प्रमुख योगदानकर्ता हैं।
एमसीसीआई के पशुपालन और मत्स्य पालन परिषद के अध्यक्ष पार्थ सूर ने अपने थीम एड्रेस में कहा कि पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के ग्रामीण समुदायों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सत्र का समापन एमसीसीआई के सचिव और कृषि बागवानी व खाद्य प्रसंस्करण परिषद के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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