बिहार चुनाव में जमालपुर बनी हॉट सीट,
विश्वास और वफादारी की होगी अग्निपरीक्षा
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में जमालपुर सीट रोचक हो गई है। महागठबंधन में सीट बदलने और टिकट कटने से समीकरण उलट गए। कांग्रेस के मौजूदा विधायक डॉ. अजय सिंह का टिकट काटकर सीट इंडियन इंक्लूसिव पार्टी को दी गई, जिसने नरेंद्र तांती को उम्मीदवार बनाया। जेडीयू के बागी और पूर्व मंत्री शैलेश कुमार ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक दी, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया। डॉ. अजय सिंह का टिकट कटने से कांग्रेस समर्थकों में नाराजगी है। नगर कमेटी अध्यक्ष साईं शंकर समेत पूरी टीम ने इस्तीफा दे दिया। सवर्ण मतदाता इस फैसले से नाखुश हैं, जो वोटों का संतुलन बिगाड़ सकता है। शैलेश कुमार के निर्दलीय उतरने से मुकाबला और रोचक हो गया। उनका संगठनात्मक नेटवर्क और स्थानीय प्रभाव मजबूत है। यह सीट अब खुला मैदान बन गई है। नरेंद्र तांती पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे पूरे समाज के उम्मीदवार हैं और जनता विकास व ईमानदारी को चुनेगी। विरोधियों को आयातित बताकर उन्होंने जनता का भरोसा जीतने की बात कही। सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी वोटों को प्रभावित कर सकती है। डॉ. अजय सिंह का सवर्ण वोटबैंक अब किस ओर जाएगा, यह बड़ा सवाल है। जमालपुर अब राजनीतिक प्रयोगशाला बन गया है। बागी नेता भावनाओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं, जबकि नया चेहरा बदलाव की उम्मीद जगाता है। यह चुनाव विश्वास, वफादारी और नाराजगी की परीक्षा बन गया है।इसके आगे की कहानी भी है, क्योंकि हालात को और दिलचस्प बना दिया है जेडीयू के बागी और पूर्व मंत्री शैलेश कुमार ने। उन्होंने पार्टी से नाराज होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। शैलेश कुमार का संगठनात्मक नेटवर्क मजबूत है और उनका स्थानीय प्रभाव भी कम नहीं। उनके मैदान में आने से मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है। महागठबंधन बनाम एनडीए बनाम निर्दलीय बागी… अब जमालपुर चुनाव में तीन कोण पर खड़े हैं। राजनीति के जानकारों के मुताबिक, यह सीट अब सीधी लड़ाई नहीं रह गई, बल्कि हर वर्ग और हर जातीय समीकरण के लिए खुला मैदान बन गई है। जमालपुर का यह चुनाव अब महज एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रयोगशाला बन चुका है। जहां एक तरफ बागी नेता जनता की भावनाओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं, वहीं दूसरी ओर नया चेहरा बदलाव की उम्मीद के साथ मैदान में उतरा है। इस सीट का नतीजा यह तय कर सकता है कि बिहार की राजनीति में पुराना जनाधार ज्यादा असरदार है या नई सामाजिक इंजीनियरिंग1 इस बार जमालपुर में सिर्फ वोट नहीं पड़ने वाले- यहां विश्वास, वफादारी और नाराजगी, तीनों की परीक्षा एक साथ होने जा रही है। महागठबंधन के उम्मीदवार नरेंद्र तांती पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनके तेवर आत्मविश्वास से भरे हैं। एक साक्षात्कार में कहा- पार्टी ने सोच-समझकर मुझे टिकट दिया है। मैं सिर्फ तांती समाज का नहीं, बल्कि पूरे समाज का उम्मीदवार हूं। महागठबंधन का पूरा कैडर मेरे साथ है और जनता जनार्दन का आशीर्वाद भी मिल रहा है। नरेंद्र तांती का मानना है कि मतदाता इस बार जाति से ऊपर उठकर विकास और ईमानदारी को मुद्दा बनाएंगे। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, वे सब इंपोर्टेड उम्मीदवार हैं जो खुद इलाके के वोटर नहीं हैं। जनता ऐसे लोगों पर भरोसा नहीं करेगी। सवर्णो में असंतोष से बदल सकता है खेल हालांकि, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि कांग्रेस के टिकट कटने से सवर्ण मतदाता नाराज हैं। यह असंतोष वोटों के समीकरण को बदल सकता है। डॉ. अजय सिंह का जनाधार भले सीमित रहा हो, लेकिन उनके समर्थन में एक स्थायी सवर्ण वोटबैंक माना जाता था। अब यह वोट किस ओर जाएगा-यही इस चुनाव का सबसे बड़ा सवाल है। सवाल यह है कि सवर्ण असंतोष, बागी उम्मीदवार और नए चेहरे की तिकड़ी मिलकर चुनावी नतीजों की दिशा किस ओर मोड़ देगी?
