वॉइस क्लोनिंग से लेकर ओटीपी स्कैम तक: एआई फ्रॉड से लोग हो रहे कंगाल
जानिए कैसे बचें इस बढ़ते साइबर खतरे से
भारत में साइबर अपराध अब नए रूप में सामने आ रहे हैं, जहां एआई आधारित तकनीक सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है। वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक वीडियो और ओटीपी ठगी जैसे स्कैम लोगों की मेहनत की कमाई मिनटों में गायब कर रहे हैं।
हैदराबाद की एक 72 वर्षीय महिला के साथ इसी तरह का मामला सामने आया, जब धोखेबाज़ों ने उनकी रिश्तेदार की आवाज़ क्लोन करके पैसों की मांग की और महिला ने लगभग 2 लाख रुपये गँवा दिए। पुलिस की मानें तो अपराधी आवाज़ और वीडियो बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बढ़ते खतरे और आंकड़े
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McAfee रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 83% लोग एआई वॉइस स्कैम में आर्थिक नुकसान झेल चुके हैं।
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48% ने 50,000 रुपये से अधिक गँवाए, जबकि 69% लोग असली और नकली आवाज़ में फर्क नहीं कर पाए।
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लगभग 47% भारतीय या तो इस धोखे का शिकार हुए हैं या उनके जान-पहचान वाले इसमें फँसे हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत से दोगुना है।
सबसे आम एआई स्कैम
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वॉइस क्लोनिंग कॉल
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ओटीपी फ्रॉड (फिशिंग व सिम स्वैपिंग)
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डीपफेक वीडियो व ईमेल
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नकली पुलिस द्वारा डिजिटल अरेस्ट
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फर्जी लोन ऐप्स और फोटो ब्लैकमेलिंग
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निवेश ठगी और नकली ट्रेडिंग साइट्स
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रोमांस व डीपफेक स्कैम
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अश्लील डीपफेक ब्लैकमेल
क्यों आसान शिकार बन रहे लोग?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ये ठगी मानव मनोविज्ञान—डर, भरोसा और जल्दबाज़ी—का फायदा उठाती है। धोखेबाज़ सार्वजनिक डेटा लेकर उसे वॉइस क्लोनिंग या डीपफेक वीडियो में बदल देते हैं और फिर कॉल, मैसेज या ईमेल के जरिए जाल बिछाते हैं।
सुरक्षा के उपाय
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ओटीपी और लॉगिन डिटेल किसी से साझा न करें।
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संदिग्ध कॉल/मैसेज की हमेशा वीडियो कॉल से पुष्टि करें।
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सोशल मीडिया पर निजी जानकारी और फोटो सीमित साझा करें।
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टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और भरोसेमंद ऐप्स का प्रयोग करें।
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ऑफर या पेमेंट रिक्वेस्ट पर तुरंत भरोसा न करें।
ठगी होने पर क्या करें
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तुरंत शिकायत दर्ज करें – cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
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सभी सबूत जैसे स्क्रीनशॉट, मैसेज, कॉल डिटेल्स सुरक्षित रखें।
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संदिग्ध नोटिस या कॉल की पुष्टि केवल आधिकारिक पोर्टल पर करें।
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फर्जी लोन व निवेश ऐप्स से दूर रहें।
