सुबह की चाय से लेकर रात के डिनर तक... हर चीज पर मिल रहा जीएसटी का फायदा, मिडिल क्लास को बड़ी राहत

सुबह की चाय से लेकर रात के डिनर तक... हर चीज पर मिल रहा जीएसटी का फायदा, मिडिल क्लास को बड़ी राहत

रविवार को चेन्नई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि जीएसटी रिफॉर्म्स का असर लोगों के जागने से लेकर सोने तक देखा जा सकता है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि आज जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जीएसटी रिफॉर्म्स का असर अब लोगों की सुबह की पहली चाय से लेकर रात के खाने की थाली तक आसानी से महसूस किया जा सकता है। देश के आम नागरिकों को छोटे-छोटे रोजमर्रा के खर्चों में फायदा मिल रहा है, क्योंकि कर प्रणाली को पहले की तुलना में ज्यादा सरल और पारदर्शी बनाया गया है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि जब जीएसटी लागू नहीं था, तब देशभर में केवल लगभग 66 लाख व्यापारी ही टैक्स सिस्टम का हिस्सा बनते थे। लेकिन बीते आठ वर्षों में इस संख्या में दोगुने से भी ज्यादा का इज़ाफा हुआ है और अब 1.5 करोड़ से अधिक व्यवसाय जीएसटी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। इसका श्रेय उन्होंने केंद्र सरकार की सरलीकृत और पारदर्शी टैक्स नीतियों को दिया।

मिडिल क्लास को बड़ी राहत

सीतारमण ने कहा कि सरकार ने लगातार यह कोशिश की है कि टैक्स दरें सरल और स्पष्ट हों, ताकि आम लोगों को किसी प्रकार का भ्रम या उलझन न हो। पिछले आठ महीनों में सरकार ने कर वर्गीकरण को आसान बनाने के कई कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री का कहना था कि जीएसटी के तहत किए गए हालिया सुधारों के बाद इनपुट कॉस्ट में कमी आएगी, जिससे उत्पादन की लागत घटेगी। जब उत्पादन सस्ता होगा, तो इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को कम कीमतों के रूप में मिलेगा। उन्होंने एक बड़ी घोषणा का जिक्र करते हुए बताया कि "करीब 99 प्रतिशत सामान, जो पहले 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में आता था, अब उसे 5 प्रतिशत स्लैब में ला दिया गया है।" इसका मतलब है कि दैनिक इस्तेमाल की कई चीजें सस्ती हो जाएंगी और मिडिल क्लास परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।

जनता और सरकार दोनों को लाभ

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि टैक्स सिस्टम जितना आसान होगा, उतना ही ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स और निर्माता इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित होंगे। सरकार की इस पारदर्शी नीति का असर जीएसटी संग्रह (कलेक्शन) में साफ दिख रहा है। जहां 2018 में कुल जीएसटी कलेक्शन 7.18 लाख करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसका फायदा केवल जनता को ही नहीं बल्कि राज्य सरकारों को भी हुआ है, क्योंकि राज्यों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है और वे विकास कार्यों पर अधिक खर्च कर पा रहे हैं।

आलोचना और सामूहिक निर्णय

सीतारमण ने अपने भाषण में यह भी स्वीकार किया कि कुछ लोगों ने उनकी आलोचना की और आरोप लगाया कि वह जनता को मुश्किल में डाल रही हैं। लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार के फैसले केवल व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए किए जाते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जीएसटी की स्थापना उस समय की गई थी जब राज्य सरकारों के वित्त मंत्री भी इस प्रक्रिया का हिस्सा थे। यानी जीएसटी से जुड़े सभी फैसले एक सामूहिक निर्णय का हिस्सा हैं, जिनमें केंद्र और राज्य मिलकर शामिल रहे हैं।

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