अपनी बेमिसाल हुनरमंदी से सुपरस्टार बने काका
स्मृति दिवस पर विशेष
राजेश खन्ना का फिल्म उद्योग में प्रवेश असामान्य, लेकिन ग़ौरतलब था। उन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स फ़िल्मफेयर आयोजित 'ऑल इंडिया टैलेंट कांटेस्ट' में हजारों प्रतियोगियों को शिक़स्त दी थी। 1966 में 'आखिरी ख़त' के साथ डेब्यू किया, जिसका निर्देशन चेतन आनंद ने किया था। हालांकि फिल्म को तुरंत सफलता नहीं मिली, लेकिन यह उनके प्रतिभाशाली अभिनेता के रूप में संभावनाओं को उजागर करती है। उनके करियर का टर्निंग पॉइंट ‘आराधना’ (1969) के साथ आया, जहां उन्होंने शर्मिला टैगोर के साथ अभिनय किया। शक्ति सामंत निर्देशित इस फिल्म ने ब्लॉकबस्टर का दर्जा प्राप्त किया और राजेश खन्ना की रोमांटिक हीरो की भूमिका ने लाखों दिलों को जीत लिया। उनका आकर्षक व्यक्तित्व, भावनात्मक आंखें और संवाद देने की अनोखी शैली ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। 'मेरे सपनों की रानी' और 'रूप तेरा मस्ताना' जैसे गाने, जो किशोर कुमार ने गाये और जो सचिन देवबर्मन की धुनों पर सदाबहार हिट बन गए, जिसने उन्हें एक सुपरस्टार के रूप में और मजबूती से बतौर अंगद जमने दिया। 1969 और 1971 के बीच राजेश खन्ना ने 15 लगातार एकल हिट फ़िल्में दीं, जो एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ पाना नामुमकिन है। उनकी फ़िल्में जैसे ‘सफ़र,’ ‘कटी पतंग,’ ‘आनंद,’ ‘हाथी मेरे साथी,’ और ‘अमर प्रेम’ आइकॉनिक बन गईं। किशोर कुमार और आर. डी बर्मन जैसे संगीतकारों के साथ उनका सहयोग बॉलीवुड को कुछ सबसे यादगार धुनें दीं। राजेश खन्ना सिर्फ एक रोमांटिक हीरो ही नहीं, बतौर अभिनेता उनकी बहुमुखी प्रतिभा फ़िल्म ‘आनंद’ (1971) में जगज़ाहिर हो गयीं, जहां उन्होंने एक जानलेवा बीमार मरीज की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें व्यापक प्रशंसा मिली। उनकी फ़िल्म ‘अमर प्रेम’ में उनके अभिनय ने उनकी गहरी पैठ को दर्शाया, जहां ‘पुष्पा, मुझे आंसुओं से नफरत हैं’ जैसे संवाद सिनेमाई लोककथाओं का हिस्सा बन गए। हालांकि 1970 के मध्य तक उनकी स्टारडम उन अभिनेताओं के उदय के साथ फीकी पड़ने लगी, मसलन अमिताभ बच्चन, जिनकी 'गुस्सैल युवा शख़्स' की छवि बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य के साथ गूंजती थी। इसके बावजूद राजेश खन्ना ने 'आप की कसम', 'अवतार', और 'अमृत' जैसी फ़िल्मों में यादग़ार प्रदर्शन देना जारी रखा।अपने अभिनय कॅरियर के अलावा, राजेश खन्ना ने राजनीति में प्रवेश किया और 1992 से 1996 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए बतौर सांसद सेवाएं दीं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले, जिसमें 2005 में फ़िल्मफेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड शामिल है। राजेश खन्ना की निजी ज़िंदगी उतनी ही सुर्खियों में रही, जितनी उनकी पेशेवर कॅरियर। उन्होंने 1973 में अभिनेत्री डिंपल कपाडिया से शादी की और उनके दो बेटियां थीं, ट्विंकल और रिंक खन्ना। हालांकि उनके विवाह ने कई चुनौतियों का सामना किया, फिर भी वे उनके निधन तक जुड़े रहे। 18 जुलाई 2012 को राजेश खन्ना के अलविदा होने के बाद उनकी छोड़ी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उनकी बेमिसाल स्टारडम, करिश्माई स्क्रीन प्रेसेंस और अविस्मरणीय प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय सिनेमा का "पहला सुपरस्टार' बना दिया।
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