शोभा डे ने की बड़े सितारों की आलोचना
कहा-सीजेपी आंदोलन पर फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रिया जेन जी की सोच व भावनाओं से कोसों दूर
निज संवाददाता : लेखिका और कॉलमनिस्ट शोभा डे ने अपने ताजा लेख में बॉलीवुड के कई बड़े सितारों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सीजेपी आंदोलन को लेकर फिल्मी हस्तियों के रिएक्शंस यह दिखाती हैं कि वे आज की युवा पीढ़ी, खासकर जेन जी की सोच और भावनाओं से काफी दूर हो चुके हैं।
अपने लेख में शोभा डे ने सबसे पहले सलमान खान की उस सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की थी। इसके अलावा उन्होंने कंगना रनौत, हेमा मालिनी और अनुपम खेर के बयानों पर भी सवाल उठाए। डे का मानना है कि इन सितारों की बातें युवाओं के नजरिए से मेल नहीं खातीं।
नीट-यूजी पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुए सीजेपी आंदोलन के दौरान सलमान खान ने छात्रों के सपोर्ट में पोस्ट लिखी थी। उन्होंने सरकार के भरोसे का जिक्र करते हुए सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की थी। सलमान ने वांगचुक के लिए लिखा था-सोनम, हो गया भाई। इसे आगे मत बढ़ाइए। अगर जरूरत पड़ी तो इस भावना को किसी और दिन के लिए बचा कर रखिए, हालांकि मुझे इसकी संभावना कम ही लगती है और कुछ खा लीजिए। अगर आप चाहें तो मैं आपको घर से खाना भेज दूंगा। प्रधानमंत्री ने कहा है कि जिसने भी गलती की है उसे सजा मिलेगी।
हालांकि शोभा डे को सलमान का यह अंदाज पसंद नहीं आया। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक को 'भाई' कहकर संबोधित करना और घर का खाना भेजने की बात कहना लोगों को इम्प्रेस करने के बजाय सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बन गया। इस पोस्ट पर रिएक्ट करते हुए शोभा डे ने कहा कि यह कोशिश जेन जी के साथ जुड़ने में विफल रहा।
उन्होंने कहा, 'सलमान खान के साथ भी यही हुआ। सोनम वांगचुक को भाई कहकर पुकारना और खान परिवार के किचन से उनके अनशन तोड़ने के लिए घर का बना खाना पेश करना मजाक का कारण बना।'
उन्होंने कहा, 'सलमान शायद इसे फ्रेंडली और कूल समझ रहे थे लेकिन आज की जेन जी की नजर में यह बिल्कुल भी इम्प्रेसिव नहीं था और यह शर्मनाक संदेश बिल्कुल भी कूल नहीं था।
डे ने आगे लिखा कि बॉलीवुड पहले कभी इतना अनरिलेटेड और अप्रासंगिक नहीं लगा। उनका कहना है कि कई कलाकार तब सामने आए, जब उन्हें लगा कि जनता का रुख साफ हो चुका है। उन्होंने ऐसे पोस्ट को चैट जीपीटी से लिखा हुआ बताते हुए कहा कि उनमें व्यक्तिगत समझ और संवेदनशीलता की कमी नजर आई। उन्होंने यह भी कहा कि जिन सितारों की फिल्मों की सफलता युवा दर्शकों पर टिकी होती है, वही आज उस पीढ़ी को सही तरह से समझ नहीं पा रहे हैं।
कंगना रनौत के कॉमेंट पर भी शोभा डे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। आंदोलन के दौरान कंगना ने कुछ प्रदर्शनकारियों के वीडियो शेयर करते हुए उन्हें 'घिनौना' बताया था। उन्होंने कुछ युवाओं और खासकर लड़कियों के पहनावे और व्यवहार पर भी सवाल उठाए और 'गटर पीढ़ी' जैसे कॉमेंट किए थे। इस पर शोभा डे ने लिखा-कंगना रनौत जो अभी आंटी की कैटिगरी में आने ही वाली हैं, उन्होंने अपने टेस्टलेस कॉमेंट्स से अपने बचे हुए कुछ जेन जी फैन्स को भी खो दिया है।
उन्होंने हेमा मालिनी और अनुपम खेर का भी जिक्र किया। शोभा डे का कहना है कि इन सीनियर कलाकारों के रिएक्शंस भी ये दिखाती हैं कि स्थापित सेलिब्रिटीज और नई पीढ़ी के बीच सोच का बड़ा अंतर पैदा हो चुका है।
अपने लेख के अंत में शोभा डे ने कहा, 'समझने वाली बात यह है: जनरेशन जी को सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट या हीरो की जरूरत नहीं है। बल्कि इसके विपरीत, सेलिब्रिटीज को जेन जी की जरूरत है।
गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ सीजेपी आंदोलन धीरे-धीरे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग से जुड़ा बड़ा अभियान बन गया। इस दौरान मार्च, धरने और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने इस आंदोलन को देश के सबसे चर्चित युवा आंदोलनों में शामिल कर दिया।
