भूलकर भी ऐसे मत पका लेना अंडा, खुद को कैंसर का शिकार बना लेंगे आप
अंडा हमारी सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. हालांकि अगर ध्यान न दिया जाए, तो इससे हमको काफी नुकसान भी हो सकता है. चलिए आफको बताते हैं कि इससे कैसे कैंसर हो सकता है.
अंडा सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, अमीनो एसिड, कोलाइन और कोलेस्ट्रॉल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे वजन घटाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और दिल को स्वस्थ रखने के लिए एक बेहतरीन भोजन मानते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसे पकाने का तरीका ही कभी-कभी हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यानी अंडा पौष्टिक होने के बावजूद गलत तरीके से पकाने पर खतरनाक बन सकता है।
ज्यादा तापमान पर अंडा पकाने का खतरा
अगर अंडे को बहुत अधिक तापमान पर (लगभग 350°F यानी 176°C से ज्यादा) लंबे समय तक पकाया जाए, तो इसमें ऑक्सीस्ट्रॉल नामक हानिकारक यौगिक बनने लगते हैं। ये यौगिक तब बनते हैं जब अंडे में मौजूद कोलेस्ट्रॉल अत्यधिक गरम हो जाता है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि ऑक्सीस्ट्रॉल शरीर में सूजन (inflammation) को बढ़ा देते हैं और धमनियों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया को तेज करते हैं। ऐसा होने पर हृदय रोग और यहाँ तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
हार्ट डिज़ीज़ का बढ़ता जोखिम
2017 में Lipids in Health and Disease नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह पाया गया था कि ऑक्सीस्ट्रॉल खराब कोलेस्ट्रॉल से मिलकर धमनियों में जम जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि खून का बहाव बाधित हो जाता है और धीरे-धीरे दिल का दौरा (हार्ट अटैक) या स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है।
कैंसर का बढ़ता खतरा
Cancer Prevention Research और 2018 की एक अन्य समीक्षा के अनुसार, रक्त में ऑक्सीस्ट्रॉल का उच्च स्तर कई प्रकार के कैंसर, जैसे ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, कोलन कैंसर और बाइल डक्ट कैंसर का खतरा लगभग 22 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। ऑक्सीस्ट्रॉल शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं। यह वह स्थिति है जब फ्री रेडिकल्स नामक हानिकारक अणु कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके कारण शरीर की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता कमजोर हो जाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में असरदार नहीं रह पाती।
आंखों और दिमाग पर असर
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस केवल दिल या कैंसर तक सीमित नहीं रहता। यह आंखों और मस्तिष्क पर भी प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय में यह स्थिति याददाश्त कमजोर कर सकती है और उम्र बढ़ने के साथ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों, जैसे अल्जाइमर या डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ा सकती है।
सुरक्षित तरीके से अंडा पकाना
न्यूट्रिशन एक्सपर्ट Ms. Luk के अनुसार, अंडों को इस तरह पकाना चाहिए जिससे ऑक्सीस्ट्रॉल की मात्रा कम बने। उदाहरण के लिए – स्क्रैम्बल एग्स या ऑमलेट को कम तापमान पर पकाना ज्यादा सुरक्षित है। इस तरीके से अंडे का प्रोटीन भी आसानी से पचता है और अगर इसमें सब्जियां मिलाएं तो शरीर को फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिल जाते हैं।
कौन सा तेल है बेहतर?
अंडा तलने या पकाने के लिए तेल का चुनाव भी बहुत महत्वपूर्ण है। Ms. Luk का कहना है कि एवोकाडो ऑयल इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
किन अंडों से बचना चाहिए?
खासतौर पर ओवर-हार्ड एग्स खाने से बचना चाहिए, यानी वे अंडे जिन्हें बहुत अधिक तापमान और लंबे समय तक (5 मिनट से ज्यादा) तलकर पकाया जाता है। ऐसे अंडों में ऑक्सीस्ट्रॉल बनने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। यही समस्या प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज को बहुत अधिक तापमान पर पकाने से भी होती है।
निष्कर्ष
अंडा एक अत्यंत पौष्टिक और स्वस्थ आहार है, लेकिन इसे सही तरीके से पकाना बेहद जरूरी है। अधिक तापमान पर तला या लंबे समय तक पकाया गया अंडा शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए अंडे को अधिक तलने, भूनने या हाई फ्लेम पर पकाने से बचना चाहिए। कम तापमान पर हल्का स्क्रैम्बल एग या सब्जियों के साथ ऑमलेट खाना स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे उत्तम और सुरक्षित तरीका है।
