शुभांशु शुक्ला की 18 दिन बाद स्पेस से हुई सफल वापसी
अंतरिक्ष यात्रा के दौरान 60 से ज्यादा प्रयोगों में हिस्सा लिया
इस मिशन को सफल बनाने के लिए 60 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययन और 20 से अधिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए।
निज संवाददाता : भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला मंगलवार को अपना मिशन पूरा कर चार एस्ट्रोनॉट के साथ वापस पृथ्वी पर लौट आए। शुंभाशु ने अपने इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष में करीब 18 दिन का समय बिताया। इस दौरान उन्होंने कई प्रयोग भी किए। करीब 23 घंटे के सफर के बाद उनका ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया के तट पर स्प्लैशडाउन किया।
शुंभाशु शुक्ला अपने चार एस्ट्रोनॉट ने साथ 25 जून को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट से आईएसएस के लिए निकले थे। पृथ्वी से 28 घंटे की यात्रा कर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे थे। यहां उन्होंने 18 दिन का समय बिताया। ये नासा और स्पेसएक्स का संयुक्त मिशन है। इस स्पेस मिशन में 4 देशों के 4 एस्ट्रोनॉट शामिल हैं। ये देश हैं भारत, अमेरिका, पोलैंड, हंगरी जिनके एस्ट्रोनॉट मिशन में शामिल हैं।
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पिता शंभू दयाल शुक्ला ने कहा-'हम शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित लैंडिंग के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं... रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शुभांशु शुक्ला को आशीर्वाद दिया और हमें शुभकामनाएं दीं'।
शुंभाशु शुक्ला के साथ चारों एस्ट्रोनॉट 14 जुलाई को शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। ये सभी एस्ट्रोनॉट 15 जुलाई को पृथ्वी पर पहुंचे। आज यानी कि 15 जुलाई को दोपहर करीब 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर स्प्लैशडाउन हुआ। इसके बाद सभी एस्ट्रोनॉट को समुद्र से बाहर निकाला जाएगा।
इससे पहले स्पेसएक्स ने एक्स पर जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करने और सैन डिएगो के तट पर उतरने की रास्ते पर है। इस मिशन को सफल बनाने के लिए 60 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययन और 20 से अधिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए।
शुंभाशु का ये मिशन इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि साल 1984 के बाद अंतरिक्ष जाने वाले वे भारत के दूसरे एस्ट्रोनॉट हैं। इससे 41 साल पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी। शुंभाशु के इस मिशन के बाद भारत भविष्य में कमर्शियल स्पेस स्टेशन की स्थापना कर सकता है। इसके साथ ही स्पेस में नई तकनीकों का परीक्षण और विकास भी किया जा सकेगा। इस मिशन के जरिए 2027 में मानव अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने में मदद मिलेगी।
शुभांशु भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन कमांडर हैं। 2000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। शुभांशु ने अपनी इस अंतरिक्ष यात्रा के दौरान 60 से ज्यादा प्रयोगों में हिस्सा लिया है, जिसमें भारत के 7 प्रयोग शामिल हैं। शुभांशु ने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीजों को उगाया है। पिछले दिनों उसकी तस्वीरें भी सामने आईं थीं।
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