बांग्लादेश का मुद्दा उठाकर राज्य में सांप्रदायिक आग भड़काने का आरोप

बीजेपी नेता अमित मालवीय के खिलाफ तृणमूल ने दर्ज कराई एफआईआर

बांग्लादेश का मुद्दा उठाकर राज्य में सांप्रदायिक आग भड़काने का आरोप

 

निज संवाददाता : बीजेपी बांग्लादेश में अशांति को हथियार बनाकर बंगाल में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी नेता अमित मालवीय देश की संप्रभुता को खत्म करने और सांप्रदायिक भड़काने के साथ-साथ बंगाल का अपमान करने की कोशिश कर रहे हैं। यह आरोप लगाते हुए तृणमूल प्रवक्ता तन्मय घोष ने बीजेपी नेता मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

तन्मय ने यह शिकायत बरुईपुर पुलिस जिले के नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई। जहां उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के आईटी सेल के हेड द्वारा एक्स हैंडल पर बांग्लादेश हिंसा को एक टूल के रूप में इस्तेमाल करते हुए शेयर किया गया बयान और वीडियो सांप्रदायिक सद्भाव को खत्म करने की कोशिश है। साथ ही, यह देश की संप्रभुता के लिए खतरनाक है। यह बंगाल, तृणमूल कांग्रेस और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपमान है। इसलिए, आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। तृणमूल के आरोपों के आधार पर नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन ने अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 

गौरतलब है कि इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में नई आग सुलग रही है। बांग्लादेश में मीडिया के साथ-साथ अल्पसंख्यक भी प्रभावित हैं। गुरुवार रात को, जैसे ही हादी की मौत की खबर फैली, ढाका और चटगांव समेत कई इलाकों में मातमी जुलूस निकाले गए। कई उच्च शिक्षण संस्थानों में भी छात्र बाहर निकल आए और मातमी जुलूस निकालने लगे। शाहबाग समेत कई जगहों पर प्रोटेस्ट हुए। जैसे-जैसे रात होती गई, प्रोटेस्ट के नाम पर अशांति और बढ़ती गई। कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों ने 'प्रोथोम आलो' के ऑफिस पर हमला किया। 'डेली स्टार' का ऑफिस जला दिया गया। ढाका के कल्चरल सेंटर छायांत में भी तोड़फोड़ की गई। एक हिंदू युवक को पीट-पीटकर मार डाला गया और उसकी लाश को पेड़ से लटकाकर जला दिया गया।

बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने उन भयानक घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि आज बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का जो कहर शुरू हुआ है, वही आगे चलकर बंगाल का भविष्य है। उन्होंने दावा किया-बांग्लादेश की यह घटना हमारे लिए एक चेतावनी है। जब कट्टरपंथ और उग्रवाद को बढ़ावा दिया जाता है, तो यही होता है। इसीलिए बंगाल में ममता बनर्जी का शासन चिंताजनक है। कई सालों की राजनीतिक शरण, स्वतंत्र संगठनों का पतन और कुछ इलाकों में चुप्पी बंगाल को एक खतरनाक रास्ते पर ले जा रही है। मालवीय ने दावा किया-अगर 2026 के बाद भी ममता बंगाल में शासन करती रहीं, तो बंगाल में हालात हाथ से निकल जाएंगे।

Tags:

About The Author

Advertisement

Latest News