एसआईआर को लेकर टीएमसी व बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप
निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए एसआईआर प्रक्रिया चल रही है। एसआईआर के ड्राफ्ट रोल में 58.2 लाख नाम हटाए जाने के बाद सियासी बवाल मचा हुआ है। एक ओर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर के तरीके को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वहीं बीजेपी टीएमसी पर एसआईआर में दिक्कतें पैदा करने का आरोप लगा रही है।
बुधवार को टीएमसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में बीजेपी पर पहले से वोटर लिस्ट फॉर्म भरकर वोटर के नाम कटवाने के आरोप लगाए। वीडियो के कैप्शन में लिखा-जब पहले से भरे हुए नाम हटाने के फॉर्म कार्गो की तरह ले जाए जाते हैं, तो इससे बांग्ला विरोधी पार्टी की वह मानसिकता उजागर होती है जो मतदाताओं को नागरिक नहीं बल्कि समस्या मानती है।
इस वीडियो को बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और अमित मालवीय ने शेयर करते हुए टीएमसी पर पलटवार किया है। प्रदीप भंडारी ने कहा कि आपके दावे आपके ही फैक्ट पर धराशाई होते हैं। उन्होंने कहा यदि आपको एसआईआर की सही सूची पर भरोसा है तो मतदाता सूची अधिकारी बार-बार फॉर्म-7 भरने से क्यों रोक रहे हैं?
प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कुमारग्राम विधानसभा क्षेत्र में ईआरओ ने फॉर्म 7 को स्वीकार करने से मना कर दिया और कारण पूछे जाने पर कुछ नहीं बोला। जबकि भटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के आने से ठीक 10 मिनट पहले ईआरओ वहां से निकल गया, जिससे फॉर्म 7 नहीं जमा हो सका। बीजेपी नेता ने कहा कि टीएमसी को यह डर है कि फॉर्म 7 के स्वीकार और वेरिफाई होने के बाद उसकी चुनावी धांधली बंद हो जाएगी।
वहीं बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने आरोप लगाते हुए कहा, बेहाला पूर्व में ईआरओ रीना घोष ने हमारे मंडल अध्यक्ष और बीएलए-1 द्वारा किए गए फॉर्म 7 को स्वीकार करने से मना कर दिया, अधिकारी ने इसका कोई वैध कारण भी नहीं बताया।
मालवीय ने वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया कि रीना घोष ने 'अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन करने के बजाय वह निर्देश लेने के बहाने फोन कॉल करते हुए चली गई, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं के पास ईआरओ कार्यालय में धरना देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
गौरतलब है कि एसआईआर के पहले चरण के पूरा होने के बाद 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई, यानी पूरे राज्य में 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में नाम हटाने के कारणों में मृत्यु, स्थायी पलायन, दोहराव और गणना फॉर्म जमा न करना शामिल था।
एसआईआर का दूसरा चरण फिलहाल जारी है, जिसमें 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई हो रही है। इनमें 1.36 करोड़ मतदाता तार्किक विसंगतियों के कारण जांच के दायरे में हैं और लगभग 31 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनके रिकॉर्ड की सही ढंग से मैपिंग नहीं हो पाई है।
