देगंगा के स्कूल ने हटाई 'बैकबेंचर' की प्रणाली

अब यहां नहीं बैठेंगे पिछली बेंच में कोई छात्र

देगंगा के स्कूल ने हटाई 'बैकबेंचर' की प्रणाली

मलयालम फिल्म 'स्थानार्थी श्रीकुट्टन' के शिक्षक विनेश विश्वनाथ ने कक्षा में पिछली बेंच पर बैठे चार शरारती और लापरवाह छात्रों को सामने लाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। लेकिन, वह सिर्फ़ दिखावे के लिए ही था।

निज संवाददाता : मलयालम फिल्म 'स्थानार्थी श्रीकुट्टन'  के शिक्षक विनेश विश्वनाथ ने कक्षा में पिछली बेंच पर बैठे चार शरारती और लापरवाह छात्रों को सामने लाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। लेकिन, वह सिर्फ़ दिखावे के लिए ही था। सवाल यह है कि क्या ऐसा हकीकत में हो सकता है?  हां हो सकता है। पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाके के एक स्कूल शिक्षक ने दिखा दिया है कि कुछ भी असंभव नहीं है। मलयालम फिल्म की तरह ही उन्होंने उस अनोखी व्यवस्था को हकीकत में स्कूल की कक्षा में उतार दिया है। नतीजा, अब से कोई भी छात्र स्कूल में पिछली बेंच पर नहीं बैठेगा। सभी पहली बेंच पर बैठेंगे। इस तरह से  सभी पर शिक्षक का ध्यान समान रूप से रहेगा। 
यहां बात हो रही है देगंगा के श्वेतपुर अवैतनिक प्राथमिक विद्यालय की। एक मलयालम फिल्म में दिखाई गई 'नई बेंचिंग व्यवस्था'  से प्रेरित होकर  हाल ही में स्कूल में 'अब पीछे बैठने वालों की व्यवस्था नहीं' मॉडल शुरू किया गया है। इसी के आधार पर कक्षाएं शुरू हो गईं हैं। 
इससे पहले, स्कूल प्रशासन ने मालदा के बार्लो गर्ल्स स्कूल में इस नई पद्धति का पालन किया था और छात्राओं के बैठने की व्यवस्था की थी। फिर देगंगा के इस प्राथमिक विद्यालय में भी यही हुआ। लेकिन, यह नई बेंचिंग प्रणाली क्या है?  दरअसल, यह बेंच की स्थिति बदलने के अलावा और कुछ नहीं है। 'बैकबेंचर'  से मतलब होता है पिछली बेंच पर बैठा छात्र। आमतौर पर यह माना जाता है कि जो छात्र पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं, वे स्कूल में पिछली बेंच पर बैठते हैं। हालांकि यह विचार पूरी तरह से सही नहीं है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पिछली बेंच पर बैठने वाले छात्र अक्सर शिक्षकों का ध्यान आकर्षित करने से बचते हैं।
सहायक शिक्षक रुहुल अमीन, जो चार साल पहले स्कूल से जुड़े थे, इस विचार को बदलने की पहल करने वाले पहले व्यक्ति हैं। मलयालम फिल्म देखने के बाद  उन्होंने स्कूल में सभी के साथ चर्चा की और कक्षा की बेंचों की स्थिति को 'यू' आकार में बदलने का सुझाव दिया। परिणामस्वरूप, प्रत्येक कक्षा में बेंचों को ब्लैकबोर्ड के दाएं और बाएं समानांतर रखा जाएगा।
योजना के मुताबिक शिक्षक की मेज के सामने काफी खाली जगह होगी। शिक्षक के सामने एक और बेंच होगी। यानी यू-आकार की। चूंकि कक्षा में पीछे वाली बेंच नहीं है, इसलिए हर छात्र शिक्षक की नज़रों के सामने  पहली बेंच पर होगा। इससे शिक्षक हर छात्र पर बराबर ध्यान दे पाएंगे। मंगलवार से, देगंगा के एक स्कूल में पढ़ाने का यह तरीका शुरू किया गया है। स्कूल के सहायक शिक्षक रुहुल अमीन ने कहा-"मैं मलयालम फिल्म देखकर बहुत प्रभावित हुआ। इससे प्रेरित होकर, प्रधानाध्यापक ने हमारे स्कूल में भी इसे लागू करने का फैसला किया। छात्र भी बहुत उत्साहित हैं।"
स्कूल के प्रधानाध्यापक दिलीप पाल ने कहा-"पहले, पीछे वाली बेंच पर बैठने वाले छात्र शिक्षक को पढ़ते हुए पकड़े जाने के डर से अपना सिर नीचे झुका लेते थे। हम इस समस्या को नज़रअंदाज़ कर देते थे। लेकिन इस मॉडल के आने से कक्षा के सभी छात्र शिक्षक के सामने बैठ रहे हैं। इससे कक्षा में सभी पर ध्यान देना संभव हो गया है।" ब्लॉक के बीडीओ फहीम आलम ने कहा-"यह बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट है। ब्लॉक के 4-5 और प्राथमिक विद्यालयों में इस प्रणाली से कक्षाएं शुरू की जाएंगी। भविष्य में हाई स्कूलों में भी यह प्रणाली शुरू करने की योजना है।
पंचायत समिति के उपाध्यक्ष अनिसुर रहमान बिदेश ने कहा-"हम स्कूल की इस अभिनव पहल की सराहना करते हैं। पंचायत समिति भविष्य में ब्लॉक के अन्य विद्यालयों में भी इस प्रणाली को शुरू करने की पहल करेगी। अगर यह नई प्रणाली सफल हो जाती है  तो राज्य के सभी विद्यालयों से 'बैकबेंचर'  शब्द हमेशा के लिए मिट सकता है।"

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