प्रवासी श्रमिकों के लिए खुशखबरी

आत्मनिर्भर बनने के लिए शुरू हुई विशेष ऋण योजना 

प्रवासी श्रमिकों के लिए खुशखबरी


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निज संवाददाता : बंगाल के प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्यों में काम करते समय उत्पीड़न, दुर्घटनाओं और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। हजारों श्रमिक दिल्ली,  गुजरात,  उत्तर प्रदेश या ओडिशा जैसे राज्यों में हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। हाल ही में, बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को बांग्लादेशी बताकर प्रताड़ित करने, उत्पीड़न करने और जान गंवाने की घटनाओं से पूरे राज्य में दहशत फैल गई है। इस संदर्भ में, राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले अपील की थी,  अपने जिले में काम करो,  आत्मनिर्भर बनो। अब उस संदेश को अमल में लाने के लिए  राज्य में प्रवासी श्रमिकों के लिए एक ऋण योजना शुरू की गई है।
'उभरते आत्मनिर्भर रोजगार योजना'  के तहत, प्रत्येक प्रवासी श्रमिक को अब 50 हजार रुपए तक का ऋण मिलेगा। इतना ही नहीं, इस ऋण पर 12 हजार 500 रुपए की विशेष छूट भी है। यानी, परियोजना के माध्यम से वे कम ब्याज दरों के साथ आसान शर्तों पर व्यवसाय शुरू कर सकेंगे। राज्य सरकार का दावा है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य दूसरे राज्यों में काम की तलाश में बेघर लोगों को उनके ही जिले में आय का साधन उपलब्ध कराना है, ताकि वे असुरक्षित स्थिति में बाहर जाने को मजबूर न हों।
पुरुलिया जिला रोजगार कार्यालय के उप निदेशक अहमद अली शाह ने बताया कि विभाग ने प्रवासी श्रमिकों से सीधा संवाद शुरू कर दिया है। परियोजना की शर्तें और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी फोन पर दी जा रही है। रोजगार कार्यालय में अपना नाम पंजीकृत कराने वाले लोग ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। अहमद अली शाह ने बताया कि इस ऋण के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिलेगा। ताकि उन्हें दोबारा दूसरे राज्यों में जाकर खतरे का सामना न करना पड़े।
विभाग के सूत्रों के अनुसार,  इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सितंबर में दिशानिर्देश जारी किए गए थे। उसके बाद,  जिला कार्यालयों से वास्तविक प्रवासी श्रमिकों की सूची एकत्र की जा रही है। उनका सत्यापन कर ऋण स्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उद्देश्य यह है कि वास्तविक लाभार्थियों को यह लाभ मिले,  ताकि कोई धोखाधड़ी या फर्जी नाम न आ सके।
पुरुलिया जैसे ज़िलों में, जहां हर साल बड़ी संख्या में मज़दूर रोज़ी-रोटी की तलाश में राज्य से बाहर पलायन करते हैं, यह परियोजना नई उम्मीद जगा रही है। कई परिवार जिनकी आय का एकमात्र स्रोत प्रवासी मज़दूर थे, अब राज्य की इस पहल को लेकर आशान्वित हैं। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी राज्य सरकार के इस फ़ैसले को मानवीय और दूरदर्शी कदम मान रहे हैं। उनके अनुसार, इससे एक ओर जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पहिया घूमेगा, वहीं दूसरी ओर प्रवासी मज़दूरों के परिवार भी धीरे-धीरे अपनी आर्थिक स्थिति और सुरक्षा वापस पा सकेंगे।

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